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मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी में तीन सेवारत सैनिक समेत सात गिरफ्तार

मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी की जांच में तीन सेवारत सैन्यकर्मियों समेत सात गिरफ्तार मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी की जांच का दायरा बढ़ा, सात और गिरफ्तार बोलारम में 20 बटालियन, मद्रास

मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी में तीन सेवारत सैनिक समेत सात गिरफ्तार
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मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी की जांच का दायरा बढ़ा, सात और गिरफ्तार

बोलारम में 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से हथियारों की चोरी की जांच में गिरफ्तार किए गए सात लोगों में सेना के तीन सेवारत कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल बैंकों, ज्वेलरी की दुकानों और अमीर लोगों को निशाना बनाकर की जाने वाली लूट में किया जाना था।

मलकाजगिरी की पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने शनिवार, 3 अक्टूबर को बताया कि इन नई गिरफ्तारियों के बाद हिरासत में मौजूद आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। गिरफ्तार किए गए सातों लोगों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इन गिरफ्तारियों के बाद सेवारत सैन्यकर्मी, एक पूर्व सैनिक, आम नागरिक और हथियारों के बाजार से कथित तौर पर जुड़े लोग एक ही जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस हिरासत में मुख्य आरोपी उप्पुथोल्ला मल्लेश उर्फ राजू से 22 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच पूछताछ के दौरान इस बड़ी साजिश का पता चला।

मामले में सेना के तीन सेवारत कर्मचारियों के नाम

सेना के सेवारत कर्मचारियों की पहचान कोंडुरी शेषुलु, विनोद कुमार और कुचरकांति प्रवीण के तौर पर हुई है।

36 साल के शेषुलु 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट में सिपाही हैं। वह आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मार्कापुरम के रहने वाले हैं। 34 साल के विनोद कुमार नाइक हैं और उसी बटालियन में कोट यानी हथियारों के भंडार में कर्मचारी हैं। वह भी मार्कापुरम के रहने वाले हैं।

37 साल के प्रवीण 16 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट में हवलदार हैं। वह महबूबनगर जिले के गुंडलापोट्टापल्ली के रहने वाले हैं।

पुलिस का आरोप है कि इन तीनों को योजना की जानकारी थी। उन्होंने कोट, गार्ड की तैनाती और संतरी की ड्यूटी से जुड़ी जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने कोट और मैगजीन के ताले तोड़ने में भी मदद की। ये आरोप उन कर्मचारियों से जुड़े हैं, जिन्होंने मद्रास रेजिमेंट में मल्लेश के साथ सेवा की थी।

इनके साथ गिरफ्तार किए गए चार आम नागरिकों की पहचान अवि डे उर्फ ओबी, बिरबल शाह, उप्पुथोल्ला मल्लिकार्जुन और चेम्माकर निरंजन के रूप में हुई है।

32 साल का डे पश्चिम बंगाल के बैरकपुर का रहने वाला है। वहीं 27 साल का शाह बैरकपुर कैंटोनमेंट के पास गन्ने के रस की दुकान चलाता है। 39 साल का मल्लिकार्जुन राजमिस्त्री है और नगरकुरनूल जिले के पादरा का रहने वाला है। वह मल्लेश का रिश्तेदार भी है। 39 साल का निरंजन जनरल स्टोर चलाता है। वह मल्लेश का दोस्त है और पादरा का रहने वाला है।

पुलिस ने लूट की कथित योजना के बारे में बताया

पुलिस कमिश्नर सुमति ने कहा कि नौकरी छोड़ने के बाद मल्लेश पर आर्थिक दबाव था। इसके बाद उसने मल्लिकार्जुन और निरंजन के साथ बड़ी संपत्ति संबंधी वारदातों की योजना बनाई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति नाराजगी और “जल्दी पैसा” कमाने की चाहत ऐसे कारण थे, जिनकी वजह से उसने हथियारों के साथ लूट करने के बारे में सोचा।

पुलिस ने बताया कि मल्लेश ने मल्लिकार्जुन और निरंजन के साथ बैंक लूट के वीडियो साझा किए थे। उसने दोनों से कहा था कि वे इस तरह की लूट को अंजाम देने के तरीके का अध्ययन करें। जांचकर्ताओं के अनुसार, चोरी से पहले ही उसने सेवारत सैन्यकर्मियों, संभावित लुटेरों और हथियारों के कथित कारोबारियों को जोड़कर एक नेटवर्क तैयार कर लिया था।

पुलिस के मुताबिक, जिन जगहों को निशाना बनाने की योजना थी, उनमें बैंक और ज्वेलरी की दुकानें शामिल थीं। पुलिस ने यह भी कहा कि इस समूह की योजना अमीर लोगों से पैसे ऐंठने के लिए आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल करने की थी।

पुलिस कमिश्नर सुमति ने कहा कि जांच में किसी आतंकी या उग्रवादी संगठन से जुड़े होने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि मकसद बड़ी संपत्ति संबंधी वारदातों को अंजाम देना था।

पश्चिम बंगाल में संपर्कों के जरिए पिस्तौल खरीदने की कोशिशें रुक जाने के बाद कथित योजना में बदलाव किया गया। इसके बाद मल्लेश ने अपनी पुरानी यूनिट से हथियार चुराने का फैसला किया और शेषुलु, विनोद कुमार तथा प्रवीण से संपर्क किया।

पश्चिम बंगाल में मौजूद आरोपियों से यह संपर्क 2022 का है। उस समय 20 बटालियन की तैनाती बैरकपुर में थी। शाह के जरिए मल्लेश ने डे से ₹10,000 में देश में बना एक हथियार यानी तमंचा और एक जिंदा कारतूस खरीदा था।

बाद में 23 सितंबर को यह हथियार मल्लेश के पिता के साईं नगर कॉलोनी, अचमपेट स्थित घर से बरामद किया गया। पुलिस ने कहा कि इस हथियार का इस्तेमाल किसी वारदात में नहीं हुआ था।

ताले तोड़े जाने के बाद चोरी का पता चला

चोरी और सेंधमारी का पता 31 अगस्त को चला। 20 बटालियन के कर्मचारियों ने देखा कि कोट और मैगजीन के ताले तोड़ दिए गए थे। चोरी की वारदात 30 अगस्त की रात और 31 अगस्त के शुरुआती घंटों के बीच की बताई गई है।

यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मयंक गोवितिकर ने उसी शाम बोल्लारम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी से पहले मल्लेश ने कई बार इलाके की रेकी की थी। जांचकर्ताओं ने कहा कि उसे पता था कि यूनिट के सीसीटीवी कैमरे मरम्मत के दौर से गुजर रहे थे।

पुलिस ने यह भी कहा कि चोरी के बाद मल्लेश ने आधी रात के आसपास प्रवीण को फोन किया और उसे बताया कि काम हो गया है। पुलिस की जांच के मुताबिक, इस जानकारी से सेंधमारी की तैयारी और उसे अंजाम देने में सेवारत सैन्यकर्मियों की कथित भूमिका का संकेत मिलता है।

बरामद हथियार और गोला-बारूद

चोरी किए गए हथियारों और गोला-बारूद का पूरा जखीरा बाद में बरामद कर लिया गया। इसमें पांच मैगजीन के साथ चार एके-203 राइफलें, तीन मैगजीन के साथ एक इंसास राइफल और 12 मैगजीन के साथ 9 एमएम की छह पिस्तौलें शामिल थीं।

बरामद सामान में मैगजीन के साथ 6.35-बोर की एक नागरिक पिस्तौल और तीन दूरबीनें भी शामिल थीं। गोला-बारूद में 9 एमएम के 1,156 कारतूस, एके-203 के 720 कारतूस और इंसास के 36 कारतूस शामिल थे।

पुलिस ने पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए। हथियार और गोला-बारूद मल्लेश से जुड़े अलग-अलग ठिकानों से बरामद किए गए। इनमें नगरकुरनूल के अचमपेट में उसके पिता का घर भी शामिल है।

बोलारम की चोरी के बाद डे कथित तौर पर सेना से चोरी किए गए हथियार खरीदने के लिए तैयार हो गया था। पुलिस के मुताबिक, उसने हर पिस्तौल के लिए ₹3 लाख और हर लंबी बंदूक के लिए ₹5 लाख देने की पेशकश की थी। गोला-बारूद के लिए अलग से भुगतान किया जाना था।

आरोप है कि शाह ने इस प्रस्तावित सौदे में बिचौलिए की भूमिका निभाई। डे के खिलाफ पहले से ही आर्म्स एक्ट का एक मामला लंबित है। यह मामला बैरकपुर की सेकंड जुडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में खारदह पुलिस स्टेशन से जुड़े मामले में चल रहा है।

मल्लेश की सेवा और मामला

37 साल का मल्लेश 20 बटालियन, मद्रास रेजिमेंट का रिटायर्ड हवलदार है। उसे 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वह चंचलगुडा सेंट्रल जेल में बंद है।

वह नगरकुरनूल के पादरा मंडल के उडुमेल्ली गांव का रहने वाला है। मल्लेश ने 30 जून, 2026 को सेना छोड़ दी थी।

पुलिस ने कहा कि 22 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच उसकी हिरासत के दौरान इस बड़ी साजिश का पता चला। जांचकर्ताओं के मुताबिक, घटनाओं का सिलसिला संपत्ति से जुड़ी वारदातों की कथित योजना और पिस्तौल हासिल करने की कोशिशों से शुरू होकर पुरानी यूनिट के शस्त्रागार से हथियारों की चोरी और चोरी किए गए हथियारों को बेचने के प्रस्ताव तक पहुंचा।

यह मामला बोल्लारम पुलिस स्टेशन में क्राइम नंबर 207/2026 के तौर पर दर्ज है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 331(4), 305, 249, 317(5), 61(2) और 49 लगाई गई हैं। मामले में आर्म्स एक्ट, 1959 की धाराएं 25(1ए), 25(1)(ए) और 25(1)(बी) भी शामिल की गई हैं।

मामले की जांच जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से चोरी के मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए?

इस मामले में तीन सेवारत सैन्यकर्मियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक चोरी किए गए हथियारों का इस्तेमाल किस लिए होना था?

पुलिस के मुताबिक इन हथियारों का इस्तेमाल बैंकों, ज्वेलरी की दुकानों और अमीर लोगों को निशाना बनाकर लूट के लिए होना था।

गिरफ्तार किए गए सात लोगों को अदालत ने क्या सजा दी?

सातों आरोपियों को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामले में गिरफ्तार तीन सेवारत सैन्यकर्मियों के नाम क्या हैं?

इनकी पहचान कोंडुरी शेषुलु, विनोद कुमार और कुचरकांति प्रवीण के तौर पर हुई है।

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