हाथरस में सवर्ण समाज का प्रदर्शन, आरक्षण-यूजीसी नीतियों की समीक्षा मांगी
हाथरस, उत्तर प्रदेश में UGC से जुड़ी नीतियों, आरक्षण व्यवस्था और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा की मांग को लेकर मंगलवार को सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए।
हाथरस, उत्तर प्रदेश में UGC से जुड़ी नीतियों, आरक्षण व्यवस्था और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा की मांग को लेकर मंगलवार को सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। शोभित कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग संगठनों के बैनर तले जुटे लोगों ने प्रदर्शन किया और बाद में राष्ट्रपति के नाम संबोधित संयुक्त ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
प्रदर्शनकारी पहले हतीसा पुल के नीचे पहुंचे। वहां राजा महेंद्र प्रताप सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पदयात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट परिसर की ओर बढ़े। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की गई और मांगों को उठाया गया।
जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालात को देखते हुए एडीएम ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। एडीएम ने उनसे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
इस प्रदर्शन में राष्ट्रवादी प्रताप सेना, भारतीय परशुराम सेना, राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा पार्टी, भारतीय किसान यूनियन भानु, भारतीय किसान यूनियन किसान समेत कई संगठनों से जुड़े लोग शामिल रहे। इन संगठनों से जुड़े लोगों ने अपनी मांगों को एक संयुक्त ज्ञापन के जरिए रखा।
ज्ञापन में UGC रेगुलेशन-2026 के प्रावधानों की व्यापक समीक्षा की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी वर्गों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ समानता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने भर्ती, नियुक्ति, पदोन्नति, शोध और अकादमिक अवसरों से जुड़े मुद्दों को भी ज्ञापन में शामिल किया। उनकी मांग थी कि इन सभी क्षेत्रों में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि सभी वर्गों को समान अवसर और समान न्याय मिल सके।
ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि सभी वर्गों के लिए समान अवसर की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।
इसके साथ ही एससी/एसटी अधिनियम से जुड़े मामलों को लेकर भी मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की, जिनमें शिकायत या आरोपों की सत्यता को लेकर सवाल उठते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने हाथरस जिले में इस अधिनियम के तहत दर्ज ऐसे मामलों की विशेष समीक्षा कराने की मांग भी की। ज्ञापन में कहा गया कि जांच में अगर शिकायत या आरोप असत्य पाए जाएं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग रखी कि अगर गलत तथ्यों के आधार पर मुआवजा दिए जाने की स्थिति सामने आती है, तो नियमानुसार जांच हो और जरूरी कार्रवाई की जाए। इन मांगों को राष्ट्रपति के नाम संबोधित संयुक्त ज्ञापन में शामिल किया गया और ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
प्रदर्शन के दौरान शरद उपाध्याय नन्दा, संजय शर्मा, मतेंद्र सिंह गहलोत, राजू कौशिक, जयप्रकाश तिवारी, निशांत उपाध्याय, ठाकुर राम जादौन, विजय कुमार शर्मा, अजय शर्मा, राणा ऋषि प्रताप सिंह, विश्वेन्द्र प्रताप सिंह, रितिक कुशवाह, राणा मुनि प्रताप, जोगेंद्र सिंह प्रधान, सतेंद्र ठाकुर, निशांत चौहान और पवन कुमार गहलोत समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में किस बात को लेकर प्रदर्शन हुआ?
हाथरस में सवर्ण समाज के लोगों ने UGC नीतियों, आरक्षण व्यवस्था और SC/ST एक्ट के प्रावधानों की समीक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन किसे सौंपा?
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित संयुक्त ज्ञापन SDM को सौंपा।
प्रदर्शन में कौन-कौन से संगठन शामिल थे?
प्रदर्शन में राष्ट्रवादी प्रताप सेना, भारतीय परशुराम सेना, राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा पार्टी, भारतीय किसान यूनियन भानु और भारतीय किसान यूनियन किसान समेत कई संगठन शामिल रहे।
UGC को लेकर प्रदर्शनकारियों की क्या मांग थी?
उन्होंने UGC रेगुलेशन-2026 के प्रावधानों की व्यापक समीक्षा और उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता, निष्पक्षता और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों पर क्या मांग रखी गई?
प्रदर्शनकारियों ने ऐसे मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की, जिनमें शिकायत या आरोपों की सत्यता पर सवाल उठते हैं।
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