नैसकॉम और इंडीड की रिपोर्ट के मुताबिक, AI से जुड़े 70% फास्ट-ट्रैक कोर्स फर्जी हैं।
कंपनियां उन्हीं को तवज्जो दे रही हैं जिनके पास लाइव-डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो है।
नैसकॉम और इंडीड की रिपोर्ट के मुताबिक, AI से जुड़े 70% फास्ट-ट्रैक कोर्स फर्जी हैं।
कंपनियां उन्हीं को तवज्जो दे रही हैं जिनके पास लाइव-डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो है।

AI fast-track courses are under scrutiny for their effective · NewsDarpan AI
देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल की मांग तेजी से बढ़ रही है। नैसकॉम और इंडीड की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट में मौजूद करीब 70% फास्ट-ट्रैक कोर्स सिर्फ धोखा दे रहे हैं। कंपनियां अब 4 साल की डिग्री का इंतजार करने के बजाय 3-6 महीने के कोर्स से तैयार उम्मीदवारों को हायर कर रही हैं। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सिर्फ सर्टिफिकेट बेचने वाले फर्जी बूटकैंप्स से बचें।
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार उन्हीं कोर्स को तवज्जो दे रहा है, जिनके अंत में छात्रों के पास 3-4 लाइव, डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो मौजूद हो।
AI कोर्स को लेकर दो मुख्य बातें सामने आई हैं:
1. टूल-बेस्ड स्किल्स (अल्पकालिक): जैसे चैटजीपीटी सिखाने वाले कोर्स की प्रासंगिकता 6 महीने तक सीमित हो सकती है।
2. कोर प्रिंसिपल्स (दीर्घकालिक): डेटा लिटरेसी, एथिकल AI, और AI सिस्टम डायरेक्शन जैसे सिद्धांत लंबे समय तक प्रासंगिक रहेंगे।
AI सीखने की शुरुआत के लिए 'AI for Everyone' कोर्स (एंड्रयू एनजी) को Coursera पर फ्री में उपलब्ध बताया गया है। यह कोर्स बिना कोडिंग के AI की बुनियादी समझ देता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर पड़ेगा। 40% कंपनियां डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को ज़रूरी मान रही हैं। नैसकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।