आरबीआई ने बैंक शेयर खरीदने के नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा
आरबीआई बैंक शेयर खरीदने के नियम आसान करने की तैयारी में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और पेंशन फंड्स को एक बार की मंजूरी दी जाएगी, जिससे वे 5% से कम हिस्सेदारी होने पर दोबारा 10% तक हिस्सेदारी बढ़ा सकें, बिना बार-बार अनुमति लेने की जरूरत के।
हिस्सेदारी खरीदने के नियम होंगे आसान
अभी के नियमों के मुताबिक, 2025 मास्टर डायरेक्शन के तहत, संस्थागत निवेशकों को हर बार आरबीआई से नई मंजूरी लेनी पड़ती है, जब उनकी हिस्सेदारी 5% से कम हो जाती है और वे इसे दोबारा बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन नए प्रस्तावित नियम, जो 2026 के ड्राफ्ट रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक: शेयर या वोटिंग राइट्स के अधिग्रहण और होल्डिंग) संशोधन दिशानिर्देश में बताए गए हैं, इस प्रक्रिया को खत्म करने की कोशिश करेंगे।
नए नियमों के तहत योग्य निवेशकों को एक बार की मंजूरी दी जाएगी, जो तब तक मान्य रहेगी जब तक आरबीआई इसे रद्द न कर दे।
योग्यता के लिए शर्तें
इस प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए संस्थागत निवेशकों को संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है: म्यूचुअल फंड्स के लिए SEBI, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए IRDAI और पेंशन फंड्स के लिए PFRDA। साथ ही, ये संस्थाएं उस बैंक के प्रमोटर ग्रुप या संबंधित इकाइयों का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
क्यों है ये अहम?
इस कदम से बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा और प्रशासनिक अड़चनें कम होंगी। आरबीआई का मकसद है कि बैंकिंग सेक्टर में संस्थागत भागीदारी को बढ़ावा मिले, साथ ही हिस्सेदारी के पैटर्न पर कड़ी नजर भी बनी रहे।
ये ड्राफ्ट गाइडलाइंस आरबीआई के व्यापक उद्देश्य को दर्शाते हैं, जिसमें बैंकिंग नियमों को बदलते बाजार के हिसाब से आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन बदलावों को कब लागू किया जाएगा, इस पर आरबीआई ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरबीआई ने बैंक शेयर खरीदने के नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित किए हैं?
आरबीआई ने एक बार की मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और पेंशन फंड्स को एक बार की मंजूरी मिलेगी, जिससे वे 5% से कम हिस्सेदारी होने पर दोबारा 10% तक बढ़ा सकें, बार-बार अनुमति लेने की जरूरत के बिना।
पहले संस्थागत निवेशकों को क्या करना पड़ता था?
पहले 2025 मास्टर डायरेक्शन के नियमों के तहत, जब निवेशकों की हिस्सेदारी 5% से कम हो जाती थी और वे इसे बढ़ाना चाहते थे, तो उन्हें हर बार आरबीआई से नई मंजूरी लेनी पड़ती थी।
इस सुविधा का लाभ कौन उठा सकते हैं?
म्यूचुअल फंड्स (SEBI के साथ रजिस्टर्ड), इंश्योरेंस कंपनियां (IRDAI के साथ रजिस्टर्ड) और पेंशन फंड्स (PFRDA के साथ रजिस्टर्ड) इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही, वे संबंधित बैंक के प्रमोटर ग्रुप या संबंधित इकाइयों का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
आरबीआई इस कदम से क्या हासिल करना चाहता है?
आरबीआई का मकसद है कि बैंकिंग सेक्टर में संस्थागत भागीदारी बढ़े, प्रशासनिक अड़चनें कम हों, और साथ ही हिस्सेदारी के पैटर्न पर कड़ी नजर भी बनी रहे। ये बदलाव बैंकिंग नियमों को बदलते बाजार के हिसाब से आधुनिक बनाने की कोशिश है।
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