EWS सुधार की मांग पर रविन्द्र सिंह भाटी की यात्रा 25 सितंबर से
जयपुर, 22 सितंबर। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है।
जयपुर, 22 सितंबर। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है। रविन्द्र सिंह भाटी प्रेस नोट - 22 September, 2026 के अनुसार, उन्होंने मंगलवार को जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता की और EWS पात्रता, प्रमाण-पत्र, आयुसीमा, आवेदन शुल्क, आय निर्धारण, छात्रवृत्ति, छात्रावास, शैक्षणिक सुविधाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़ी प्रमुख मांगें रखीं।
भाटी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि EWS आरक्षण व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, न्यायसंगत और प्रभावी बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक देश की भौगोलिक, कृषि और आर्थिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। अलग-अलग राज्यों में जमीन, खेती, सिंचाई, उत्पादन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अलग है। ऐसे में EWS पात्रता तय करने के लिए पूरे देश में एक समान संपत्ति संबंधी मानदंड कई राज्यों की जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बैठते।
उन्होंने बताया कि EWS आरक्षण व्यवस्था संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ देशभर में लागू हुई थी। राजस्थान में फरवरी 2019 से सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। भाटी ने कहा कि इसके बाद समय-समय पर कुछ प्रक्रियात्मक सुधार जरूर किए गए हैं, लेकिन केंद्र स्तर पर EWS अभ्यर्थियों से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयां अब भी बनी हुई हैं।
रविन्द्र सिंह भाटी ने खास तौर पर राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कृषि भूमि की उत्पादकता हर जगह समान नहीं है। कहीं सिंचाई की सुविधा है तो कहीं नहीं है। स्थानीय भूमि मूल्यों में भी बड़ा अंतर है। ऐसे में सिर्फ जमीन के आकार को आर्थिक स्थिति का आधार मानना वास्तविक आर्थिक क्षमता का सही आकलन नहीं करता। उनका कहना है कि किसी परिवार के पास कितनी जमीन है, यह अकेला पैमाना नहीं हो सकता, क्योंकि उस जमीन की उपयोगिता, उत्पादन और उससे होने वाली आमदनी अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
भाटी ने मांग की कि EWS पात्रता तय करते समय भूमि के आकार के साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई सुविधा, स्थानीय भूमि मूल्य और वास्तविक आर्थिक उपयोगिता जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि अगर इन बातों को शामिल किया जाए तो EWS व्यवस्था उन परिवारों तक ज्यादा सही तरीके से पहुंच सकेगी, जिनके लिए यह आरक्षण बनाया गया है।
विधायक ने राज्यवार परिस्थितियों के अनुरूप EWS नियम बनाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि राजस्थान एवं गुजरात सहित कुछ राज्यों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए EWS प्रमाण-पत्र से संबंधित प्रावधानों में अपने स्तर पर बदलाव किए हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के लिए भी मान्यता दी जाए।
भाटी के अनुसार, अभी अभ्यर्थियों को केंद्र और राज्य के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी स्वीकार किया जाए तो अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और उम्मीदवारों को बार-बार प्रमाण-पत्र बनवाने की दिक्कत से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022-23 में राजस्थान सरकार द्वारा 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जबकि केंद्र सरकार द्वारा 95,243 EWS प्रमाण-पत्र जारी हुए। भाटी के अनुसार यह अंतर बताता है कि EWS प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को अधिक सरल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब राज्य स्तर पर बड़ी संख्या में प्रमाण-पत्र जारी हो रहे हैं और केंद्र स्तर पर संख्या कम है, तो इस प्रक्रिया की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझना जरूरी है।
भाटी ने EWS अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में राहत देने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि EWS अभ्यर्थियों को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह अधिकतम आयुसीमा में उचित छूट दी जाए। इसके साथ ही आवेदन शुल्क में राहत दी जाए और जहां लागू हो, न्यूनतम अर्हताओं में भी उचित छूट दी जाए। उनका कहना है कि अगर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों और उम्मीदवारों को समान अवसर देना है, तो परीक्षा और आवेदन की प्रक्रिया में भी व्यावहारिक सहूलियतें जरूरी हैं।
उन्होंने EWS प्रमाण-पत्र की वैधता को लेकर भी बदलाव की मांग की। भाटी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में EWS प्रमाण-पत्र की वैधता एक वर्ष है। उन्होंने इसे बढ़ाकर तीन अथवा पांच वर्ष किए जाने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर इसके नवीनीकरण की व्यवस्था करने की मांग भी की। उनके अनुसार, इससे हर साल प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से जुड़ी परेशानी कम हो सकती है।
पत्रकार वार्ता में परिवार की आय की गणना से जुड़ी प्रक्रिया को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। भाटी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में परिवार की परिभाषा में कई तरह के संबंधों को शामिल किया जाता है। इसके कारण कई मामलों में आय निर्धारण की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। खास तौर पर विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मायके और ससुराल दोनों पक्षों से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि EWS आय निर्धारण की प्रक्रिया को अन्य आरक्षण व्यवस्थाओं में इस्तेमाल की जाने वाली आय/क्रीमीलेयर निर्धारण की व्यवस्था की तरह सरल बनाया जाए। भाटी ने कहा कि माता-पिता की आय को प्रमुख आधार मानते हुए स्पष्ट और व्यावहारिक नियम तय किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि नियम ऐसे हों, जिन्हें समझना और लागू करना आसान हो, ताकि पात्र अभ्यर्थी प्रक्रिया की जटिलताओं में न उलझें।
रविन्द्र सिंह भाटी ने EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी अवसरों में समान भागीदारी दिलाने के लिए ऐसी सुविधाओं की जरूरत है। उनके मुताबिक, सिर्फ आरक्षण का प्रावधान काफी नहीं है, बल्कि पढ़ाई, तैयारी और रहने से जुड़ी मदद भी जरूरी है, ताकि कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी आगे बढ़ सकें।
इसके अलावा, भाटी ने EWS से संबंधित नीतिगत और प्रशासनिक समस्याओं के समेकित समाधान के लिए राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर विचार करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि EWS से जुड़े मामलों में कई स्तरों पर समस्याएं आती हैं। ऐसे में एक संस्थागत व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए, जो इन विषयों को व्यवस्थित तरीके से देख सके।
भाटी ने स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में EWS वर्ग के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था किए जाने की मांग की। उनका कहना है कि इससे स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही उनके मुद्दों को निर्णय प्रक्रिया में स्थान मिल सकेगा।
रविन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक इन मांगों के समर्थन में अपनी लिखित सहमति और समर्थन पत्र दे चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सांसदों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया गया है और उन्हें EWS से जुड़े विषयों और प्रस्तावित सुधारों से अवगत कराया गया है।
प्रेस ब्रीफ के अनुसार, संबंधित सांसदों ने भी इस मांग के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। प्रेस ब्रीफ में कहा गया कि सांसदों ने मौखिक रूप से अपनी सहमति और समर्थन का आश्वासन दिया है। भाटी ने इसे EWS सुधारों से जुड़ी मांगों के लिए व्यापक समर्थन के रूप में रखा।
पत्रकार वार्ता के दौरान रविन्द्र सिंह भाटी ने घोषणा की कि वे इन मांगों को जनता और जनप्रतिनिधियों तक व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए 25 सितंबर 2026 से प्रदेशभर में यात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान EWS व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, प्रस्तावित सुधारों और समान अवसर से संबंधित मांगों पर अलग-अलग क्षेत्रों में संवाद किया जाएगा।
भाटी ने कहा कि EWS आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अवसर उपलब्ध कराना है। उनके मुताबिक, इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए पात्रता और प्रमाण-पत्र की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो देश के अलग-अलग राज्यों की वास्तविक सामाजिक, कृषि और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखे।
उन्होंने केंद्र सरकार से EWS पात्रता और संपत्ति संबंधी मौजूदा मानदंडों की व्यापक समीक्षा करने का आग्रह किया। भाटी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को EWS आरक्षण का उद्देश्यपूर्ण और प्रभावी लाभ मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रविन्द्र सिंह भाटी EWS को लेकर क्या मांग कर रहे हैं?
रविन्द्र सिंह भाटी EWS आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि EWS पात्रता, प्रमाण-पत्र, आयुसीमा, आवेदन शुल्क, आय निर्धारण, छात्रवृत्ति, छात्रावास और प्रतिनिधित्व से जुड़ी दिक्कतों को ठीक किया जाए।
भाटी के मुताबिक EWS पात्रता में जमीन को लेकर क्या बदलाव होना चाहिए?
भाटी का कहना है कि सिर्फ जमीन के आकार से आर्थिक स्थिति तय नहीं होनी चाहिए। जमीन की उत्पादकता, सिंचाई सुविधा, स्थानीय जमीन के दाम और उससे होने वाली असली आमदनी को भी देखा जाना चाहिए।
राज्यों के EWS प्रमाण-पत्र पर भाटी की क्या मांग है?
भाटी की मांग है कि राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता दी जाए, ताकि उम्मीदवारों को अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की परेशानी न हो।
राजस्थान में EWS आरक्षण कब लागू हुआ था?
लेख के मुताबिक राजस्थान में फरवरी 2019 से सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था।
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