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राप्ती नदी के कटान से श्रावस्ती का 37 करोड़ का पुल खतरे में

श्रावस्ती में राप्ती नदी के कटान ने 37 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और एप्रोच मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया है।

राप्ती नदी के कटान से श्रावस्ती का 37 करोड़ का पुल खतरे में
Image credit: News Darpan Team

श्रावस्ती में राप्ती नदी के कटान ने 37 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और एप्रोच मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क खतरे में है और स्थानीय लोगों को महज 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 80 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ सकता है।

नेशनल मीडिया में हैडलाइन बनने के बाद सेतु निगम और प्रशासन की नींद खुली है। जो राप्ती का कटान पहले मिट्टी को निगल रहा था, वह अब पटरी तक पहुंच चुका है। अब अधिकारी ईंट डालकर कटान रोकने की कोशिश में युद्धस्तर पर जुट गए हैं।

हालांकि किसी भी आला अधिकारी ने अभी तक स्थलीय निरीक्षण नहीं किया है, जो भारी लापरवाही साबित हो रही है।

सवाल उठ रहे हैं कि जब नदी शांत थी तब अफसर क्यों सोते रहे। ऐन वक्त पर बोरियों और ईंट-मिट्टी से बांधने की नौटंकी क्यों की जा रही है। पुल और सड़क के बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह सवाल अधिकारियों के सामने खड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावस्ती में राप्ती नदी का कटान किस चीज़ को खतरे में डाल रहा है?

राप्ती नदी का कटान 37 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल और एप्रोच मार्ग को खतरे में डाल रहा है। यह कटान अब पटरी तक पहुंच चुका है।

नदी के कटान से इलाकों में आवाजाही में क्या परेशानी हो रही है?

सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क खतरे में है। लोगों को महज 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 80 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ सकता है।

कटान रोकने के लिए अभी क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

सेतु निगम और प्रशासन ईंट डालकर और बोरियों से बांधकर कटान रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, किसी भी आला अधिकारी ने अभी तक स्थलीय निरीक्षण नहीं किया है।

अधिकारियों पर क्या सवाल उठ रहे हैं?

सवाल है कि जब नदी शांत थी तब अफसर क्यों सोते रहे। पुल और सड़क को बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। अब आपातकालीन उपायों पर निर्भर क्यों होना पड़ रहा है।

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