क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन 100 साल बाद फिर शुरू, पंजाब को 1,400 करोड़ का लाभ
क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन करीब 100 साल बाद फिर शुरू, पंजाब को 1,400 करोड़ रुपये का फायदा पंजाब की लंबे समय से अटकी क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन करीब एक सदी बाद फिर से शुरू हो गई है।
पंजाब की लंबे समय से अटकी क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन करीब एक सदी बाद फिर से शुरू हो गई है। रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार को ऐलान किया कि 39.68 किलोमीटर लंबी ये रेल परियोजना, जो गुरदासपुर जिले के क़ादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी, 1,400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी।
इस प्रोजेक्ट को नॉर्दर्न रेलवे पूरा करेगा। ये लाइन क़ादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सथियाला और ब्यास जैसे अहम कस्बों और गांवों से गुजरेगी। इस नए रेल कॉरिडोर से पंजाब के माझा इलाके के कई हिस्से रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए कनेक्टिविटी और आवाजाही बेहतर होगी।
क़ादियां-ब्यास लाइन के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें घुमान और बुटाला पर दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल और 54 रोड अंडर ब्रिज (RUBs) बनाए जाएंगे। सुरक्षा और सुविधा के लिए ब्रॉड-गेज कॉरिडोर में आधुनिक सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम के साथ स्वदेशी 'कवच' ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया जाएगा।
क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन का इतिहास ब्रिटिश दौर का है। इसे पहली बार 1928-29 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने मंजूरी दी थी। 1930 के दशक की शुरुआत तक इसका निर्माण काफी आगे बढ़ चुका था, लेकिन बदलती प्राथमिकताओं और हालात की वजह से इसे रोक दिया गया। बाद में इसे 'सोशलली डिजायरेबल रेल कनेक्टिविटी प्रोग्राम' के तहत 2010-11 के पूरक रेलवे बजट में शामिल किया गया। कई सालों की देरी के बाद अब इसे करीब 1,400 करोड़ रुपये के संशोधित बजट के साथ मंजूरी मिल गई है।
इस रेलवे लाइन के बनने से पंजाब के कई अहम धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इनमें क़ादियां (जो अहमदिया मुस्लिम समुदाय का जन्मस्थान है), ब्यास में डेरा बाबा जयमल सिंह, श्री दरबार साहिब, डेरा बाबा नानक, घुमान में गुरुद्वारा भगत नामदेव जी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं।
कनेक्टिविटी के अलावा, इस प्रोजेक्ट से बड़े आर्थिक फायदे की उम्मीद है। इससे किसानों को मार्केट तक पहुंच बेहतर होगी, सामान की तेज़ और आसान ढुलाई होगी, व्यापार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निर्माण और संचालन के दौरान रोजगार के मौके पैदा होंगे, और माझा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन क्या है और इसे कब शुरू किया जा रहा है?
क़ादियां-ब्यास रेलवे लाइन 39.68 किलोमीटर लंबी एक रेल परियोजना है जो गुरदासपुर जिले के क़ादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। यह लाइन करीब 100 साल बाद फिर से शुरू हो गई है। इसे 1,400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा।
इस रेल लाइन का निर्माण कितने समय से रुका हुआ था?
यह रेलवे लाइन 1928-29 में पहली बार मंजूरी दी गई थी, और 1930 के दशक की शुरुआत तक इसका निर्माण काफी आगे बढ़ चुका था। लेकिन बाद में प्राथमिकताओं के बदलने से इसे रोक दिया गया। करीब एक सदी बाद अब इसे फिर से मंजूरी मिली है।
इस प्रोजेक्ट से पंजाब को क्या फायदे होंगे?
इस रेलवे लाइन से किसानों को बाजार तक पहुंच बेहतर होगी, सामान की तेजी से ढुलाई होगी, व्यापार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निर्माण के दौरान रोजगार के मौके बनेंगे, और माझा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। इसके अलावा धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
इस रेलवे लाइन में कौन-कौन से आधुनिक सुविधाएं होंगी?
इसमें घुमान और बुटाला पर दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल और 54 रोड अंडर ब्रिज बनाए जाएंगे। साथ ही आधुनिक सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम तथा स्वदेशी 'कवच' ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया जाएगा।
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