पुणे में टैंगो डांस से मिल रहा है आत्मविश्वास और कनेक्शन
पुणे में टैंगो सीख रहे लोग: डांस के जरिए भरोसा, कनेक्शन और जिंदगी के सबक पुणे में अर्जेंटीना का टैंगो डांस लोगों को सिर्फ डांस सिखाने से ज्यादा कुछ दे रहा है।
पुणे में टैंगो सीख रहे लोग: डांस के जरिए भरोसा, कनेक्शन और जिंदगी के सबक
पुणे में अर्जेंटीना का टैंगो डांस लोगों को सिर्फ डांस सिखाने से ज्यादा कुछ दे रहा है। अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग इस डांस को सीखने आ रहे हैं, जो नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन और इम्प्रोवाइजेशन पर आधारित है। ये डांस लोगों को भरोसा, कनेक्शन और खुद को समझने जैसे पहलुओं को एक्सप्लोर करने का मौका दे रहा है। कई लोगों के लिए ये डांस मूवमेंट से ज्यादा पर्सनल ग्रोथ का जरिया बन गया है।
डांस के जरिए खुशी की तलाश
43 साल की डॉ. एम्मा जॉनसन का कहना है कि टैंगो ने उन्हें उस हिस्से से फिर से जोड़ा है, जिसे उन्होंने लंबे समय से खो दिया था। एंग्लो-इंडियन परिवार में पली-बढ़ी एम्मा के लिए डांस हर सेलिब्रेशन का हिस्सा था, लेकिन जिंदगी की जिम्मेदारियों ने इसे पीछे छोड़ दिया। दो साल पहले टैंगो ने इसे उनकी जिंदगी में वापस ला दिया। वो कहती हैं, "हमारे हर फैमिली गेदरिंग का अंत रॉक एंड रोल डांस के साथ होता था। टैंगो ने मेरी उस पुरानी खुशी को फिर से जगाया।"
डांस जो स्टेप्स से आगे बढ़ता है
दूसरे डांस फॉर्म्स की तरह टैंगो में फिक्स कोरियोग्राफी नहीं होती। ये इम्प्रोवाइजेशन और एक-दूसरे के मूवमेंट को समझने पर निर्भर करता है। पुणे की अनुभवी टैंगो इंस्ट्रक्टर मिताली चिनमुलगुंड बताती हैं, "टैंगो सिर्फ स्टेप्स याद रखने का डांस नहीं है। ये मूवमेंट के जरिए दूसरे इंसान को सुनने की कला है।" लीड और फॉलो के बीच का ये डायनामिक इंटरप्ले अवेयरनेस और भरोसा बढ़ाता है, जिससे ये डांस एक अलग तरह का कम्युनिकेशन बन जाता है।
कुछ लोगों के लिए टैंगो जिंदगी के सबक भी सिखा रहा है। 28 साल के मुंतज़िर कहते हैं, "टैंगो ने मुझे जिंदगी के बारे में एक बात सिखाई। ये कि किसी स्टेप को लेकर कमिटमेंट करना जरूरी है। वो सही हो या गलत, फर्क नहीं पड़ता।"
आधुनिक दौर की अकेलेपन की दवा
डिजिटल युग की बढ़ती दूरी के बीच टैंगो इंसानी कनेक्शन का एक अनोखा मौका दे रहा है। 38 साल की सोनल मंकर बताती हैं कि ये डांस बिना किसी इमोशनल प्रेशर के गहरे इंटरैक्शन की इजाजत देता है। "हमारी संस्कृति में पर्सनल स्पेस और एनर्जी शेयर करने को लेकर कई टैबू हैं। टैंगो आपको किसी और के स्पेस में रिस्पेक्टफुल तरीके से रहने का मौका देता है। ये सिर्फ मूवमेंट नहीं है, बल्कि म्यूजिक और रिदम के जरिए कनेक्शन है।" उनके लिए ये डांस एक सुकून भरा अनुभव है, जो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में आराम के पल देता है।
फिजिकल और मेंटल फायदे
इमोशनल और सोशल डाइमेंशन्स के अलावा, टैंगो फिजिकल फायदे भी देता है। इसके लगातार वॉकिंग और डायरेक्शनल चेंज से कोऑर्डिनेशन और बॉडी अवेयरनेस बेहतर होती है। कुछ पार्टिसिपेंट्स, जिनमें पार्किंसंस और एडीएचडी जैसी कंडीशन वाले लोग भी शामिल हैं, ने इसे एक कॉम्प्लिमेंट्री एक्टिविटी के रूप में फायदेमंद पाया है। हालांकि, मिताली का कहना है कि टैंगो से मूवमेंट और बैलेंस में मदद मिल सकती है, लेकिन ये मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है।
भरोसे और भावनाओं की भाषा
32 साल के सीएस शंकर के लिए टैंगो सीखना एक नई भाषा सीखने जैसा था। वो बताते हैं, "शुरुआत में हर स्टेप अजीब लगता है, जैसे कोई नई भाषा बोलना सीख रहे हों। धीरे-धीरे आप कम्युनिकेट करना सीखते हैं, पहले एक इंसान के साथ और फिर कई और लोगों के साथ। टैंगो ने मुझे सिखाया कि भरोसा और भावनाएं हमेशा शब्दों की जरूरत नहीं होतीं।"
जैसे-जैसे पुणे की टैंगो कम्युनिटी बढ़ रही है, पार्टिसिपेंट्स ये समझ रहे हैं कि ये डांस परफेक्ट स्टेप्स के बारे में नहीं है, बल्कि उन स्टेप्स के जरिए खुद को समझने का जरिया है। कई लोगों के लिए ये सेल्फ-डिस्कवरी, कनेक्शन और हीलिंग का सफर बन गया है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुणे में टैंगो डांस का क्या महत्व है?
पुणे में टैंगो डांस लोगों को भरोसा, कनेक्शन और खुद को समझने का मौका दे रहा है।
टैंगो डांस कैसे सिखाता है?
टैंगो डांस इम्प्रोवाइजेशन और नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन पर आधारित है, जिससे लोग एक-दूसरे के मूवमेंट को समझते हैं।
क्या टैंगो डांस से फिजिकल फायदे होते हैं?
हाँ, टैंगो डांस से कोऑर्डिनेशन और बॉडी अवेयरनेस बेहतर होती है।
टैंगो डांस का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर है?
टैंगो डांस इमोशनल और सोशल इंटरैक्शन को बढ़ाता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
क्या टैंगो डांस सीखना मुश्किल है?
शुरुआत में हर स्टेप अजीब लगता है, लेकिन धीरे-धीरे लोग कम्युनिकेट करना सीख जाते हैं।
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