एमजीएसयू को मिला नया कुलपति, प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने संभाला पदभार
राजस्थान के कुलाधिपति एवं राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के आधिकारिक आदेश के बाद बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) को नया कुलपति मिल गया है।
राजस्थान के कुलाधिपति एवं राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के आधिकारिक आदेश के बाद बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) को नया कुलपति मिल गया है। हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर औपचारिक रूप से पदभार संभाल लिया।
प्रो. बिश्नोई के पदभार ग्रहण करने के साथ ही MGSU में नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई। विश्वविद्यालय में इस मौके पर एक विशेष कार्यक्रम रखा गया, जिसमें नए कुलपति का स्वागत किया गया और उन्हें औपचारिक रूप से कार्यभार सौंपा गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डॉ. वंदना बिश्नोई और निवर्तमान कार्यवाहक कुलपति प्रो. अखिल रंजन गर्ग खास तौर पर मौजूद रहे। प्रो. अखिल रंजन गर्ग को विश्वविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। उन्होंने प्रो. नरसी राम बिश्नोई को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया और कुलपति पद का कार्यभार सौंपा।
इस दौरान विश्वविद्यालय के अलग-अलग संकायों के अध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक भी मौजूद रहे। सभी ने नए कुलपति प्रो. बिश्नोई का अभिनंदन किया। विश्वविद्यालय परिसर में पदभार ग्रहण का कार्यक्रम गरिमामय माहौल में हुआ।
पदभार संभालने के बाद प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विश्वविद्यालय के समस्त संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संदेश में विश्वविद्यालय की आगे की प्राथमिकताओं और कामकाज की दिशा को लेकर अपनी बात रखी।
प्रो. बिश्नोई ने कहा: "महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार (Research & Innovation) के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाना मेरी प्राथमिकता रहेगी। विश्वविद्यालय में पारदर्शी प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण माहौल और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। हम सभी को मिलकर एक टीम भावना के साथ काम करना होगा ताकि यह संस्थान अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र बन सके।"
MGSU के कुलपति पद के लिए चयन प्रक्रिया में देशभर से वरिष्ठ शिक्षाविदों ने आवेदन किया था। जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए देशभर से 185 वरिष्ठ शिक्षाविदों ने आवेदन किया था। इसी प्रक्रिया में 85 दावेदारों में से अंतिम चयन की बात भी सामने आई है।
वीसी सर्च कमेटी द्वारा 5 योग्य शिक्षाविदों का पैनल गठित किया गया था। इसी पैनल में से राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने प्रो. नरसी राम बिश्नोई के नाम पर अपनी स्वीकृति दी। यह स्वीकृति 'विश्वविद्यालय अधिनियम 2003 (संशोधित)' की धारा 11(3) व 11(7) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दी गई।
प्रो. नरसी राम बिश्नोई का कार्यकाल पदभार ग्रहण की तिथि से 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक रहेगा। यानी वे निर्धारित नियमों के अनुसार इस पद पर बने रहेंगे।
विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति को प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज के लिए अहम माना जा रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित का कार्यकाल 6 अगस्त को समाप्त हो गया था। इसके बाद से विश्वविद्यालय का कार्यभार बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU) के कुलपति प्रो. अखिल रंजन गर्ग संभाल रहे थे।
अब प्रो. बिश्नोई के स्थायी कुलपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्यों में और अधिक गति आने की उम्मीद जताई गई है। MGSU में नए नेतृत्व के साथ उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार, पारदर्शी प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण माहौल और विद्यार्थियों के समग्र विकास को लेकर आगे काम किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MGSU के नए कुलपति कौन बने हैं?
MGSU के नए कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई बने हैं। उन्होंने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर पदभार संभाला।
प्रो. नरसी राम बिश्नोई पहले कहां कुलपति रह चुके हैं?
प्रो. नरसी राम बिश्नोई हिसार के गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रह चुके हैं।
MGSU में पदभार किसने सौंपा?
निवर्तमान कार्यवाहक कुलपति प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने प्रो. नरसी राम बिश्नोई का स्वागत किया और उन्हें कुलपति पद का कार्यभार सौंपा।
नए कुलपति ने अपनी प्राथमिकता क्या बताई?
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि उनकी प्राथमिकता MGSU को उच्च शिक्षा, शोध और Research & Innovation के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
प्रो. नरसी राम बिश्नोई का कार्यकाल कितना होगा?
उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण की तारीख से 3 साल या 70 वर्ष की उम्र तक रहेगा, जो भी नियमों के अनुसार लागू होगा।
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