ISRO की पंकति पांडे बनीं सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर, जीते Ecopreneur अवॉर्ड
ISRO की साइंटिस्ट से सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर बनीं पंकति पांडे, Ecopreneur अवॉर्ड जीतकर ला रहीं बदलाव कहानी: सस्टेनेबिलिटी को अक्सर नेताओं, बड़ी कंपनियों और ग्लोबल समिट्स तक सीमित माना जाता था, जिससे आम
ISRO की साइंटिस्ट से सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर बनीं पंकति पांडे, Ecopreneur अवॉर्ड जीतकर ला रहीं बदलाव
कहानी:
सस्टेनेबिलिटी को अक्सर नेताओं, बड़ी कंपनियों और ग्लोबल समिट्स तक सीमित माना जाता था, जिससे आम लोग खुद को जलवायु परिवर्तन की लड़ाई से दूर महसूस करते थे। लेकिन पंकति पांडे के लिए सस्टेनेबिलिटी की यात्रा उनके घर से शुरू हुई।
पंकति का करियर सफर वाकई प्रेरणादायक है। ISRO के गगनयान मिशन की प्रोजेक्ट मैनेजर से लेकर भारत की प्रमुख सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर बनने तक, उन्होंने दिखाया है कि पर्यावरण में बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति कैसे योगदान दे सकता है। उनकी पहल "ज़ीरो वेस्ट अड्डा" कम कचरे वाले जीवन के प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस पर फोकस करती है। इसी काम के लिए उन्हें 2025 में "टाइम्स इंटरनेट Ecopreneur अवॉर्ड" मिला।
यह अवॉर्ड भारत में पहली बार उन लोगों और बिज़नेस को पहचान देने के लिए शुरू किया गया, जो इनोवेटिव और कम्युनिटी-केंद्रित कामों से पर्यावरण में बदलाव ला रहे हैं। यह दिखाता है कि सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज़ और सफल बिज़नेस साथ-साथ चल सकते हैं।
सस्टेनेबिलिटी एडवोकेसी में आने से पहले पंकति ने 14 साल ISRO में साइंटिस्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने एडवांस्ड स्पेस मिशन और इंजीनियरिंग सिस्टम्स पर काम किया। लेकिन उनके घर में रोज़ाना दिखने वाले कचरे ने उन्हें सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पंकति ने छोटे-छोटे बदलावों से शुरुआत की। उन्होंने रीयूजेबल कंटेनर का इस्तेमाल शुरू किया, किचन वेस्ट से कंपोस्टिंग की, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम किया और नॉन-टॉक्सिक नैचुरल क्लीनिंग प्रोडक्ट्स अपनाए। इन्हीं बदलावों से "ज़ीरो वेस्ट अड्डा" की नींव पड़ी, जो कॉन्शियस कंजम्पशन, कंपोस्टिंग, स्लो फैशन और क्लाइमेट-फ्रेंडली आदतों को बढ़ावा देता है।
उनका सिंपल लेकिन असरदार मंत्र है: "जब आप कम खरीदते हैं और चीज़ों का लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, तो कम संसाधन निकाले जाते हैं, कम ऊर्जा लगती है और कम उत्सर्जन होता है," उन्होंने *द हिंदू* को बताया। पंकति लोगों को उनके छोटे-छोटे चुनावों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे सस्टेनेबल लाइफस्टाइल आसान और समझने लायक बन सके।
यही ग्रासरूट अप्रोच "टाइम्स इंटरनेट Ecopreneur अवॉर्ड" का मकसद है। यह अवॉर्ड उन लोगों को पहचान देता है जो सस्टेनेबिलिटी को आसान बना रहे हैं, कम्युनिटी को जोड़ रहे हैं और दिखा रहे हैं कि पर्यावरण की जिम्मेदारी और बिज़नेस ग्रोथ साथ-साथ चल सकते हैं।
पंकति के काम को कई सम्मान मिले हैं। 2024 में उन्हें "नेशनल ग्रीन चैंपियन क्रिएटर" का खिताब मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिए ईको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।
अपने वैज्ञानिक अनुभव और सस्टेनेबिलिटी के जुनून को मिलाकर, पंकति पांडे न केवल खुद बदलाव ला रही हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं—एक छोटे कदम से शुरुआत करके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंकति पांडे कौन हैं?
पंकति पांडे ISRO की पूर्व साइंटिस्ट हैं, जो अब सस्टेनेबिलिटी एजुकेटर बन गई हैं।
उन्हें कौन सा अवॉर्ड मिला है?
उन्हें 2025 में 'टाइम्स इंटरनेट Ecopreneur अवॉर्ड' मिला है।
पंकति की पहल 'ज़ीरो वेस्ट अड्डा' क्या है?
'ज़ीरो वेस्ट अड्डा' कम कचरे वाले जीवन के प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस पर फोकस करती है।
पंकति ने सस्टेनेबिलिटी के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उन्होंने रीयूजेबल कंटेनर का इस्तेमाल, किचन वेस्ट से कंपोस्टिंग और नॉन-टॉक्सिक क्लीनिंग प्रोडक्ट्स अपनाए हैं।
पंकति का संदेश क्या है?
उनका संदेश है कि कम खरीदने और चीज़ों का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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