चीनी की महंगाई से सरकार और अड़तीस कमा रही है, गहलोत का आरोप
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि चीनी की महंगाई से सरकार और उद्योगपति मुनाफा कमा रहे हैं, आम जनता को नुकसान हो रहा है।
विपक्षी नेताओं ने केंद्र पर लगाया आरोप कि चीनी की बढ़ती कीमतों से मुनाफा कमा रही है सरकार, आम आदमी पर बोझ
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि चीनी की बढ़ती कीमतें आम आदमी की मेहनत की कमाई की सीधी लूट है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में सिर्फ मुट्ठी भर उद्योगपतियों और सरकार को फायदा हो रहा है, जबकि आम जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मुनाफा उद्योगपतियों का, तकलीफ जनता की
गहलोत की टिप्पणी इस बात पर केंद्रित है कि यह एक जानबूझकर किया गया इंतजाम है जिससे चुनिंदा उद्योगपतियों को जनता की कीमत पर फायदा हो रहा है। उनके मुताबिक, चीनी की बढ़ी हुई कीमतों से होने वाला मुनाफा सिर्फ कॉर्पोरेट हितों और सरकारी खजाने में जा रहा है, जबकि आम लोगों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यह आरोप चीनी की कीमतों के संकट को एक बड़ी आर्थिक नीति से जोड़ता है, जिसके बारे में विपक्ष का कहना है कि यह आम लोगों की भलाई के बजाय कुछ खास अमीरों को फायदा पहुंचाती है। कीमतों में बढ़ोतरी को बाजार के उतार-चढ़ाव के बजाय संगठित लूट बताकर, गहलोत इस मुद्दे को हालात की बजाय जानबूझकर की गई नीति के तौर पर पेश कर रहे हैं।
नोट: हेडलाइन में संजय राउत के बयान और प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के दौर का जिक्र है, लेकिन दिए गए सोर्स मटीरियल में सिर्फ अशोक गहलोत की चीनी की कीमतों और औद्योगिक मुनाफे पर टिप्पणी है। राउत के कोई बयान, डेटा या संदर्भ उपलब्ध सोर्स में नहीं मिले।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गहलोत ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर क्या आरोप लगाया है?
अशोक गहलोत ने कहा है कि चीनी की महंगाई आम आदमी की मेहनत की सीधी लूट है। उनका आरोप है कि इससे सरकार और मुट्ठी भर उद्योगपतियों को ही फायदा हो रहा है, जबकि आम जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गहलोत के मुताबिक चीनी महंगाई से किसको लाभ मिल रहा है?
गहलोत के अनुसार, चीनी की बढ़ी हुई कीमतों से होने वाला मुनाफा सिर्फ कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट उद्योगपतियों और सरकारी खजाने में जा रहा है।
क्या यह महंगाई सिर्फ बाजार के उतार-चढ़ाव की वजह से है?
गहलोत के अनुसार नहीं। उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी को बाजार का हाल मानने के बजाय इसे एक जानबूझकर की गई संगठित लूट और नीति बताया है।
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