AIIMS में 34.6% फैकल्टी पद खाली, भर्ती में चुनौतियाँ जारी
तीन में से एक AIIMS फैकल्टी पोस्ट खाली, सरकार ने संसद में दी जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में 34.6% फैकल्टी पद अभी भी खाली
तीन में से एक AIIMS फैकल्टी पोस्ट खाली, सरकार ने संसद में दी जानकारी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में 34.6% फैकल्टी पद अभी भी खाली हैं, जबकि कमी को पूरा करने की कोशिशें जारी हैं। ये जानकारी लोकसभा सांसद मुरारी लाल मीणा के सवाल पर संसद सत्र के दौरान दी गई।
20 AIIMS में 2,181 फैकल्टी पद खाली
20 AIIMS में कुल 6,304 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 2,181 पद खाली हैं। नॉन-फैकल्टी पदों में भी भारी कमी है, जहां 59,225 स्वीकृत पदों में से 15,159 पद खाली हैं। ये करीब 25% की कमी दर्शाता है।
AIIMS दिल्ली, जो प्रमुख संस्थान है, वहां 1,313 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 436 पद खाली हैं। नॉन-फैकल्टी पदों की बात करें तो 13,913 स्वीकृत पदों में से 2,461 पद खाली हैं।
2023 से स्थिति में सुधार
सरकार ने बताया कि पिछले तीन सालों में खाली पदों की दर में कमी आई है। 2023-24 में फैकल्टी पदों की कमी 39.22% थी, जो 2026-27 में घटकर 34.6% हो गई। इसी तरह, नॉन-फैकल्टी पदों की कमी 39.19% से घटकर 25.6% हो गई है।
भर्ती में चुनौतियां और सरकार के कदम
मंत्रालय ने बताया कि खाली पदों की वजहों में योग्य प्रोफेशनल्स की उपलब्धता, आरक्षण नीति और AIIMS कैंपस का लोकेशन शामिल हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
- स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी: हर AIIMS में फैकल्टी भर्ती को तेज करने के लिए एक स्थायी कमेटी बनाई गई है।
- रिटायर्ड फैकल्टी की नियुक्ति: नेशनल इंपॉर्टेंस के संस्थान और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रिटायर्ड प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को 70 साल की उम्र तक कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा सकता है।
- विजिटिंग फैकल्टी स्कीम: भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुभवी प्रोफेसरों को नए AIIMS में पढ़ाने का मौका दिया जा रहा है।
- सेंट्रलाइज्ड भर्ती परीक्षा: AIIMS दिल्ली नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (NORCET) और नॉन-फैकल्टी पदों के लिए कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जाम (CRE) आयोजित करता है। इसके अलावा, जूनियर और सीनियर रेजिडेंट पदों के लिए साल में दो बार इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस कंबाइंड एंट्रेंस टेस्ट (INI-CET) और इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस सुपर स्पेशियलिटी (INI-SS) परीक्षा होती है।
क्यों है ये मुद्दा अहम
AIIMS संस्थान भारत के हेल्थकेयर और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम के लिए बेहद जरूरी हैं। खासकर फैकल्टी पदों में लगातार कमी से शिक्षा और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। सरकार ने खाली पदों को कम करने में कुछ सुधार किया है, लेकिन मौजूदा कमी दिखाती है कि योग्य प्रोफेशनल्स को आकर्षित और बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत है।
स्रोत: Indian Express
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