नीलगिरी में देशी फलदार पेड़ों की खेती को बढ़ावा देने की पहल
देशी फल लौटाने की कोशिश: नीलगिरी में देशी फलदार पेड़ों की खेती को बढ़ावा नीलगिरी जिला प्रशासन ने हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के साथ मिलकर देशी फलदार पेड़ों की खेती को फिर से शुरू करने और बढ़ावा देने के
नीलगिरी जिला प्रशासन ने हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के साथ मिलकर देशी फलदार पेड़ों की खेती को फिर से शुरू करने और बढ़ावा देने के लिए एक पहल शुरू की है। इस कोशिश के तहत कूनूर के पोमोलॉजिकल स्टेशन में एक एकड़ जमीन देशी पेड़ों की खेती के लिए समर्पित की गई है। इस प्रोजेक्ट का आधिकारिक उद्घाटन 17 जून को जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्य तन्नीरू ने किया।
इस प्रोजेक्ट में जंगली अंजीर, मंकी फ्रूट, जंगली अमरूद, जामुन और वक्की फल (Eleocarpus tectorius) जैसे देशी फलों की खेती पर जोर दिया गया है। प्रशासन स्थानीय किसानों को भी इन देशी किस्मों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, पोमोलॉजिकल स्टेशन नीलगिरी में पाए जाने वाले देशी सजावटी और फूलदार पेड़ों की पौध तैयार करने में भी मदद कर रहा है। जिला कलेक्टर तन्नीरू ने हाल ही में कूनूर के उन बागों का दौरा किया जहां किसान आड़ू, आलूबुखारा, नाशपाती, अंगूर, संतरा और नींबू जैसे फलों की खेती कर रहे हैं।
हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बताया कि पोमोलॉजिकल स्टेशन में लगे फलदार पेड़ों की वजह से यह जगह पक्षी प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है। उम्मीद है कि देशी पेड़ों की शुरुआत से यहां और भी ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां आएंगी। विभाग स्थानीय किसानों और प्लांटेशन मालिकों से इस पहल में जुड़ने की अपील कर रहा है और लोगों को कूनूर में उगाए गए उत्पाद खरीदने के लिए स्टेशन का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
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