भारत-नेपाल सीमा विवाद: पीएम बालेन शाह के बयान से मचा कूटनीतिक...
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए बयान से नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है। इस बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर संसद में दिए अपने बयान से नई चर्चा छेड़ दी है। 36 वर्षीय बालेन शाह ने कहा कि भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है। यह बयान केवल नेपाल में बल्कि भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
बालेन शाह ने यह भी सुझाव दिया कि इस विवाद को सुलझाने के लिए भारत और चीन के साथ-साथ ब्रिटेन से भी बातचीत करनी होगी। उनका यह बयान, जिसमें एक तीसरे देश को शामिल करने की बात कही गई, कूटनीतिक हलकों में हैरानी का कारण बना है।
इस बयान के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री शाह का इशारा सैन्य कब्जे की ओर नहीं था, बल्कि सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर अतिक्रमण की ओर था। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इसे संसद के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है।
भारत-नेपाल सीमा विवाद मुख्य रूप से काला पानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है। दोनों देश ऐतिहासिक संधियों और नदियों के स्रोतों की अलग-अलग व्याख्या करते हैं। बालेन शाह के इस बयाने इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है, जिससे समाधान की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए बयान से नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है। इस बयाने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने क्या कहा है?
बालेन शाह ने कहा कि भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, लेकिन नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है।
बालेन शाह ने विवाद सुलझाने के लिए किससे बातचीत करने की बात कही?
उन्होंने भारत और चीन के साथ-साथ ब्रिटेन से भी बातचीत करने का सुझाव दिया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बालेन शाह के बयान पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि शाह का इशारा सैन्य कब्जे की ओर नहीं था, बल्कि सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर अतिक्रमण की ओर था।
भारत-नेपाल सीमा विवाद मुख्य रूप से किन क्षेत्रों को लेकर है?
यह विवाद मुख्य रूप से काला पानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है।
बालेन शाह के बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने क्या मांग की?
विपक्षी नेताओं ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इसे संसद के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
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