टाटा डीलर को टेस्ट ड्राइव कार बेचने पर 9 लाख का मुआवजा
टेस्ट ड्राइव वाली कार को नया बताकर बेचा, ग्राहक को मिला 9 लाख रुपये का मुआवजा बॉडी: टेस्ट ड्राइव वाली कार को नया बताकर बेचने पर पंजाब के एक टाटा मोटर्स डीलरशिप, हिंद मोटर्स इंडिया लिमिटेड, को 9 लाख
टेस्ट ड्राइव वाली कार को नया बताकर बेचा, ग्राहक को मिला 9 लाख रुपये का मुआवजा
बॉडी:
टेस्ट ड्राइव वाली कार को नया बताकर बेचने पर पंजाब के एक टाटा मोटर्स डीलरशिप, हिंद मोटर्स इंडिया लिमिटेड, को 9 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश मिला है। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) ने 15 जुलाई को फैसला सुनाते हुए डीलर को अनुचित व्यापार प्रथा और सेवा में कमी का दोषी ठहराया।
डीलर को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया
मामला अक्टूबर 2011 का है, जब पटियाला जिले के साधु सिंह ने 7 लाख रुपये से ज्यादा में टाटा मांजा एलान खरीदी थी। सिंह ने आरोप लगाया कि कार में अगले ही दिन से खराबियां आने लगीं, जिसके लिए उन्हें बार-बार डीलरशिप पर जाना पड़ा, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। बाद में पता चला कि यह कार टेस्ट ड्राइव के लिए इस्तेमाल की गई थी, जिसे नया बताकर बेचा गया। इसके बाद सिंह ने पूरी रकम वापस, मुआवजा और कानूनी खर्च की मांग की।
अगस्त 2012 में जिला आयोग ने सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। हिंद मोटर्स को कार की कीमत ब्याज सहित लौटाने, गाड़ी वापस लेने और 2 लाख रुपये मुआवजा व 20,000 रुपये कानूनी खर्च देने का आदेश दिया। हालांकि, डीलर ने पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की, जिसने 2014 में मुआवजा घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया और टाटा मोटर्स को भी जिम्मेदार ठहराया।
निर्माता को जिम्मेदारी से मुक्त किया गया
मामला NCDRC तक पहुंचा, जहां सिंह ने राज्य आयोग के फैसले को चुनौती दी। राष्ट्रीय आयोग ने रिटायर्ड जस्टिस ए पी साही और सदस्य भरतकुमार पंड्या की अध्यक्षता में फैसला सुनाया कि टाटा मोटर्स को डीलर की गलती के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने कहा कि निर्माता और डीलर "प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल" के आधार पर काम करते हैं, यानी वे स्वतंत्र इकाइयां हैं और अपने कार्यों के लिए खुद जिम्मेदार हैं।
राज्य आयोग के निष्कर्षों को खारिज करते हुए, NCDRC ने जिला आयोग के मूल आदेश को पूरी तरह बहाल कर दिया। हिंद मोटर्स को सिंह की भुगतान की गई राशि ब्याज सहित लौटानी होगी, कार वापस लेनी होगी और 2 लाख रुपये मुआवजा व 20,000 रुपये कानूनी खर्च देने होंगे। वहीं, टाटा मोटर्स को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।
एक अहम फैसला
यह फैसला ऑटोमोबाइल डीलरों को अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए जिम्मेदार ठहराता है, जैसे टेस्ट ड्राइव वाली कार को नया बताकर बेचना। साथ ही यह स्पष्ट करता है कि डीलरों की स्वतंत्र गलतियों के लिए निर्माताओं को दंडित नहीं किया जा सकता। यह फैसला डीलरशिप को धोखाधड़ी से बचने की चेतावनी देता है और उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करता है।
उपभोक्ता शिकायतों के लिए लोग अपने राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर कॉल कर सकते हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टाटा डीलर को 9 लाख का मुआवजा क्यों देना पड़ा?
डीलर ने टेस्ट ड्राइव के लिए इस्तेमाल की गई कार को नई कार बताकर ग्राहक को बेच दी। कार में खराबियां आईं और पूरा मामला कोर्ट तक गया। NCDRC ने डीलर को अनुचित व्यापार प्रथा का दोषी ठहराया और कार की कीमत ब्याज सहित, 2 लाख रुपये मुआवजा और 20,000 रुपये कानूनी खर्च देने का आदेश दिया।
यह मामला कितने साल पुराना था?
यह मामला अक्टूबर 2011 का है। ग्राहक साधु सिंह ने पटियाला से 7 लाख रुपये से ज्यादा में टाटा मांजा एलान खरीदी थी। फैसला 15 जुलाई 2024 को NCDRC ने सुनाया।
क्या टाटा मोटर्स को भी दंडित किया गया?
नहीं। NCDRC ने कहा कि निर्माता और डीलर स्वतंत्र इकाइयां हैं और अपने-अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए डीलर की गलती के लिए टाटा मोटर्स को दंडित नहीं किया जा सकता।
अगर किसी को गाड़ी में समस्या हो तो क्या करें?
आप अपने राज्य की उपभोक्ता शिकायत हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर कॉल कर सकते हैं।
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