हमीरपुर में नाग पंचमी पर कपड़े की गुड़िया की अनोखी परंपरा
हमीरपुर में नाग पंचमी के मौके पर बुंदेलखंड की सदियों पुरानी परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है। यहां कपड़े की गुड़िया बनाकर उसे कूटने की अनोखी परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
हमीरपुर में नाग पंचमी के मौके पर बुंदेलखंड की सदियों पुरानी परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है। यहां कपड़े की गुड़िया बनाकर उसे कूटने की अनोखी परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। इस परंपरा में युवतियां और महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
हमीरपुर मुख्यालय के मेरापुर गांव में हर साल नाग पंचमी पर यह खास परंपरा देखने को मिलती है। इस परंपरा के तहत युवतियां कपड़े की गुड़िया बनाती हैं और फिर उसे नदी में फेंकती हैं। इसके बाद उस गुड़िया पर लाठियां बरसाई जाती हैं। इस अनोखे रीति-रिवाज को लेकर बुंदेलखंड में कई मान्यताएं प्रचलित हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह परंपरा महिलाओं के जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को दूर करने का प्रतीक मानी जाती है। इसे शुभ माना जाता है और हर साल इसे पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाया जाता है। बुंदेलखंड के कई हिस्सों में यह परंपरा आज भी जीवित है और लोग इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखते हैं।
मेरापुर में हर साल नाग पंचमी पर इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग आते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाता है। बुंदेलखंड की यह परंपरा समय के साथ और मजबूत होती जा रही है और नई पीढ़ी भी इसे पूरे उत्साह से आगे बढ़ा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाग पंचमी पर हमीरपुर में कौन सी अनोखी परंपरा मनाई जाती है?
हमीरपुर में नाग पंचमी पर कपड़े की गुड़िया बनाकर उसे कूटने की परंपरा मनाई जाती है।
इस परंपरा में कौन लोग भाग लेते हैं?
इस परंपरा में युवतियां और महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
कपड़े की गुड़िया को क्या किया जाता है?
गुड़िया को नदी में फेंका जाता है और फिर उस पर लाठियां बरसाई जाती हैं।
यह परंपरा किस चीज का प्रतीक मानी जाती है?
यह परंपरा महिलाओं के जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को दूर करने का प्रतीक मानी जाती है।
क्या यह परंपरा सिर्फ हमीरपुर में ही है?
नहीं, बुंदेलखंड के कई हिस्सों में यह परंपरा आज भी जीवित है।
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