मध्यप्रदेश में जिलों-तहसीलों की सीमाओं पर मंथन, ग्वालियर में बैठक
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा आसान और लोगों के करीब बनाने के लिए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है।
मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा आसान और लोगों के करीब बनाने के लिए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की बैठक गुरुवार को ग्वालियर के बाल भवन के सभागार में हुई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा ने की।
बैठक में प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं और उनके कामकाज को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। संभाग, जिला, उपखंड, तहसील और जनपद एवं विकासखंड की सीमाओं के परिसीमन और युक्तियुक्तिकरण पर अधिकारियों से सुझाव लिए गए। आयोग ने यह भी चर्चा की कि प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के साथ-साथ आगे भविष्य में नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए कौन से मार्गदर्शक सिद्धांत तय किए जाने चाहिए।
आयोग के चेयरमैन एसएन मिश्रा ने बैठक में कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जन अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे लोगों को सरकारी सेवाएं और सुविधाएं आसानी से मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को आयोग के गठन के उद्देश्य और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी।
बैठक में यह बात सामने रखी गई कि प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन केवल सीमाओं को बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका मकसद प्रशासन को लोगों के लिए ज्यादा सुगम और जनोन्मुखी बनाना है। इसी वजह से आयोग स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली दिक्कतों, जरूरतों और सुझावों को समझने पर जोर दे रहा है।
आयोग के सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अक्षय कुमार सिंह ने बताया कि आयोग प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर रहा है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जो समस्याएं और सुझाव सामने आएंगे, उनके आधार पर आयोग अपनी अनुशंसाएं तैयार करेगा।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने बैठक में कहा कि पुनर्गठन की प्रक्रिया को केवल जिले और तहसील की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को और प्रभावी बनाने पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के बढ़ते दौर में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी समय के अनुरूप बेहतर बनाने की जरूरत है।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने यह भी बताया कि आयोग की मंशा के अनुरूप जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा और उसे आयोग को भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया के जरिए जिला स्तर पर अलग-अलग विभागों के अनुभव और जरूरतों को आयोग तक पहुंचाया जाएगा।
नगरीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई। नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने नगरीय निकायों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में कई सुझाव आयोग के सामने रखे। उन्होंने नगरीय निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े बिंदुओं पर अपने सुझाव दिए।
बैठक की शुरुआत में आयोग के चेयरमैन एसएन मिश्रा और सचिव अक्षय कुमार सिंह ने प्रजेंटेशन के माध्यम से अधिकारियों को आयोग के उद्देश्य, कार्यक्षेत्र और पुनर्गठन की प्रक्रिया की जानकारी दी। इस प्रजेंटेशन में बताया गया कि आयोग किस तरह प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन से जुड़े विषयों पर काम कर रहा है और किन बिंदुओं पर अधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
ग्वालियर में हुई इस बैठक में जिले के विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस प्रशासनिक इकाइयों को लोगों की जरूरतों, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जन अपेक्षाओं के अनुसार ज्यादा व्यावहारिक और प्रभावी बनाने पर रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्वालियर में यह बैठक किस बारे में हुई?
यह बैठक मध्यप्रदेश में संभाग, जिला, उपखंड, तहसील, जनपद और विकासखंड जैसी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं और कामकाज को बेहतर बनाने पर चर्चा के लिए हुई।
बैठक की अध्यक्षता किसने की?
बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के चेयरमैन और सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा ने की।
आयोग का मुख्य मकसद क्या बताया गया?
आयोग का मकसद प्रशासनिक व्यवस्था को लोगों के करीब और आसान बनाना है, ताकि सरकारी सेवाएं और सुविधाएं लोगों तक आसानी से पहुंच सकें।
आयोग सुझाव कैसे जुटा रहा है?
आयोग प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर रहा है और प्रशासनिक अधिकारियों से स्थानीय समस्याओं और सुझावों पर चर्चा कर रहा है।
ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने क्या सुझाव दिया?
उन्होंने कहा कि पुनर्गठन को सिर्फ जिले और तहसील की सीमाओं तक सीमित न रखकर ग्रामीण प्रशासन को भी ज्यादा प्रभावी बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।