बजट की कमी से दोनों डिप्टी सीएम की नई कारें अटकीं
मध्य प्रदेश में आर्थिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव का असर अब सरकारी वाहनों की खरीद पर भी दिखाई देने लगा है।
मध्य प्रदेश में आर्थिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव का असर अब सरकारी वाहनों की खरीद पर भी दिखाई देने लगा है। प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला की सरकारी इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां तय किलोमीटर की सीमा से काफी आगे निकल चुकी हैं। इसके बावजूद दोनों के लिए नई गाड़ियां खरीदने के प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी नहीं मिल सकी है। बजट की कमी का हवाला देते हुए नई इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड खरीदने का प्रस्ताव वापस कर दिया गया है।
अब दोनों उप मुख्यमंत्रियों का सरकारी सफर फिलहाल पुरानी गाड़ियों की मरम्मत के सहारे ही जारी रहेगा। वित्त विभाग ने मौजूदा वाहनों की मरम्मत कराकर काम चलाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद वाहन बदलने का मामला अटक गया है, जबकि दोनों गाड़ियां सरकारी नियमों में तय किलोमीटर की सीमा पार कर चुकी हैं।
शासकीय प्रावधानों के मुताबिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से 1 लाख 10 हजार किलोमीटर चलने के बाद सरकारी वाहन बदलने का प्रावधान है। इस नियम के तहत तय सीमा पूरी होने के बाद वाहन बदलने की व्यवस्था है। लेकिन उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला की सरकारी गाड़ियां इस सीमा से काफी आगे निकल चुकी हैं।
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की वर्ष 2024 मॉडल इनोवा क्रिस्टा अब 1 लाख 29 हजार किलोमीटर से अधिक चल चुकी है। वहीं, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की इसी मॉडल की गाड़ी 1 लाख 32 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय कर चुकी है। यानी दोनों वाहनों ने 1 लाख 10 हजार किलोमीटर की तय सीमा पार कर ली है।
इसी वजह से दोनों उप मुख्यमंत्रियों के लिए नई गाड़ियां खरीदने की मांग की गई थी। प्रस्ताव में नई इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड खरीदने की बात थी। हालांकि, प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के बजाय वित्त विभाग ने बजट की कमी का हवाला देते हुए उसे वापस कर दिया।
नई गाड़ियों की मांग गृह विभाग के स्टेट गैरेज के माध्यम से भेजी गई थी। इसके बाद गृह विभाग ने खरीद से जुड़ा बजट प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा। प्रस्ताव वित्त विभाग तक पहुंचा, लेकिन वहां से उसे हरी झंडी नहीं मिली।
वित्त विभाग की ओर से साफ किया गया कि फिलहाल नए वाहन खरीदने की स्थिति नहीं है। विभाग ने कहा कि मौजूदा वाहनों की मरम्मत कराकर ही काम चलाया जाए। इस फैसले का सीधा असर दोनों उप मुख्यमंत्रियों के लिए प्रस्तावित नई गाड़ियों की खरीद पर पड़ा है।
प्रदेश सरकार के सामने बढ़ते कर्ज और वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन की चुनौती भी बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार पर कर्ज का आंकड़ा 5.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। ऐसे में वित्त विभाग ने विभिन्न विभागों को खर्च बढ़ाने वाले प्रस्तावों से बचने के निर्देश दिए हैं।
विभागों से कहा गया है कि ऐसे प्रस्ताव भेजने से बचा जाए, जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अनावश्यक अतिरिक्त भार पड़े। सरकारी वाहनों की खरीद पर लगी रोक को भी इसी वित्तीय दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। दो उप मुख्यमंत्रियों की गाड़ियों की खरीद का प्रस्ताव लौटाए जाने से यह साफ है कि वाहन बदलने की मांग के बावजूद बजट की उपलब्धता निर्णायक बनी हुई है।
इस मामले में प्रस्तावित वाहनों के मॉडल और उनकी लागत भी चर्चा का हिस्सा है। जानकारी के अनुसार, मंत्रियों और अधिकारियों के लिए खरीदे जाने वाले वाहनों में बेस वेरिएंट भी शामिल होते हैं। वहीं, दोनों उप मुख्यमंत्रियों के लिए इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड की मांग की गई थी।
ऐसे में प्रस्तावित वाहनों की लागत और उपलब्ध बजट के बीच संतुलन भी अहम पहलू बन गया। गृह विभाग के स्टेट गैरेज के माध्यम से भेजी गई मांग पर वित्त विभाग ने बजट की कमी को आधार बनाकर मंजूरी नहीं दी। इसके बजाय पुराने वाहनों को ही मरम्मत के बाद इस्तेमाल करने का रास्ता चुना गया।
दूसरी ओर, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने नई गाड़ी खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी से दूरी बनाते हुए इसकी जिम्मेदारी अपने स्टाफ पर डाल दी। उन्होंने इस प्रस्ताव की जानकारी अपने स्तर से भेजे जाने से इनकार किया और कहा कि इसकी जिम्मेदारी स्टाफ की है। इससे वाहन खरीदने के प्रस्ताव को लेकर चर्चा और बढ़ गई।
मामले में एक तरफ सरकारी नियम 1 लाख 10 हजार किलोमीटर के बाद वाहन बदलने का प्रावधान बताता है। दूसरी तरफ, वित्तीय दबाव के चलते नई खरीद को मंजूरी नहीं दी जा रही है। जगदीश देवड़ा की गाड़ी 1 लाख 29 हजार किलोमीटर से अधिक और राजेंद्र शुक्ला की गाड़ी 1 लाख 32 हजार किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है।
फिलहाल वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक दोनों गाड़ियों की मरम्मत कराकर ही सरकारी कामकाज चलाया जाएगा। नई इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड खरीदने का प्रस्ताव बजट की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ सका है। ऐसे में अब सुरक्षा के दृष्टिकोण से तय वाहन बदलने के प्रावधान और राज्य के वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के सामने चुनौती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दोनों डिप्टी सीएम की नई गाड़ियां क्यों नहीं खरीदी गईं?
वित्त विभाग ने बजट की कमी का हवाला देते हुए नई इनोवा क्रिस्टा हाइब्रिड खरीदने का प्रस्ताव वापस कर दिया।
दोनों डिप्टी सीएम की मौजूदा गाड़ियां कितनी चल चुकी हैं?
जगदीश देवड़ा की गाड़ी 1 लाख 29 हजार किलोमीटर से ज्यादा और राजेंद्र शुक्ला की गाड़ी 1 लाख 32 हजार किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है।
सरकारी वाहन बदलने की तय सीमा कितनी है?
सरकारी नियमों के मुताबिक 1 लाख 10 हजार किलोमीटर चलने के बाद वाहन बदलने का प्रावधान है।
अब दोनों डिप्टी सीएम किन गाड़ियों से सफर करेंगे?
फिलहाल दोनों पुरानी गाड़ियों से ही सफर करेंगे। वित्त विभाग ने मौजूदा वाहनों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं।
नई गाड़ियों की खरीद का प्रस्ताव किसने भेजा था?
नई गाड़ियों की मांग गृह विभाग के स्टेट गैरेज के माध्यम से भेजी गई थी और गृह विभाग ने बजट प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।