पटवारी छुट्टी पर, कलेक्टरों को 7 दिन में काम शुरू कराने का अल्टीमेटम
पटवारियों के सामूहिक अवकाश से मध्यप्रदेश में राजस्व काम प्रभावित मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग और पटवारियों के बीच विवाद अब प्रदेशव्यापी टकराव में बदल गया है।
पटवारियों के सामूहिक अवकाश से मध्यप्रदेश में राजस्व काम प्रभावित
मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग और पटवारियों के बीच विवाद अब प्रदेशव्यापी टकराव में बदल गया है। स्वामित्व योजना के तहत गांवों में मकानों की निशुल्क रजिस्ट्री में पटवारियों की भूमिका को लेकर शुरू हुआ विवाद कार्रवाई तक पहुंच गया है। बर्खास्तगी, निलंबन और नोटिस के विरोध में पटवारी गुरुवार से रविवार तक सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। इससे तहसीलों में राजस्व से जुड़े कई जरूरी काम प्रभावित होने लगे हैं।
नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कामों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। लोक सेवा गारंटी के तहत तय समयसीमा में किए जाने वाले कई काम भी प्रभावित हो रहे हैं। अकेले भोपाल में करीब 200 पटवारियों के अवकाश पर रहने से राजस्व संबंधी कामकाज पर असर पड़ा है। जमीन से जुड़े कामों के लिए तहसीलों में आने वाले लोगों को अब अपनी फाइलों के आगे बढ़ने का इंतजार करना पड़ रहा है।
पटवारियों के विरोध के बीच सरकार ने भी सख्त रुख अपना लिया है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अपने जिले में पटवारियों से काम नहीं करा पाने वाले अधिकारियों को भी जवाबदेही के लिए तैयार रहना होगा। मुख्य सचिव ने यह तक कह दिया कि जो कलेक्टर अपने जिले में पटवारियों से काम नहीं ले पाएंगे, वे भोपाल ट्रांसफर के लिए तैयार रहें।
इसी वजह से प्रशासन और पटवारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ गया है। एक तरफ पटवारी सामूहिक अवकाश और विरोध के जरिए कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं सरकार जिला प्रशासन के जरिए राजस्व कामकाज को सामान्य बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इस टकराव के बीच अब प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में राजस्व कार्यों को प्रभावित नहीं होने दें और पटवारियों से काम कराएं। उन्होंने सात दिन की समयसीमा तय करते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का संकेत दिया। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया कि पटवारियों के विरोध के कारण राजस्व से जुड़े काम रुकने नहीं चाहिए।
बैठक के दौरान कुछ कलेक्टरों ने सुझाव दिया कि पटवारी संघ के पदाधिकारियों से बातचीत की जाए और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जाए। हालांकि, मुख्य सचिव इस सुझाव से सहमत नहीं हुए। उनके सख्त रुख से यह साफ हो गया कि सरकार फिलहाल हड़ताल के आगे झुकने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए कामकाज सामान्य कराने के पक्ष में है।
पटवारी संघ के मुताबिक, विवाद की जड़ स्वामित्व योजना के तहत गांवों में मकानों की निशुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर संघ आपत्ति जता रहा है। पटवारियों का कहना है कि इस भूमिका और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को लेकर उनकी चिंताएं हैं। इसी मुद्दे पर उनका विरोध बढ़ता गया और मामला प्रदेशभर में फैल गया।
विरोध तेज होने के बाद सरकार और प्रशासन की ओर से पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। निलंबन, नोटिस और बर्खास्तगी की कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ ने सामूहिक अवकाश का रास्ता चुना। अब मामला सिर्फ रजिस्ट्री की प्रक्रिया या पटवारियों की भूमिका तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक सख्ती और कर्मचारियों के विरोध के बीच बढ़ते टकराव का रूप ले चुका है।
इसी बीच, राजस्व कार्यों में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है। लोकायुक्त में दर्ज शिकायतों के आधार पर पांच जिलों से जुड़े मामलों में पटवारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों के जरिए राजस्व विभाग में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश की गई है।
सतना जिले में रामपुर बघेलान के डेंगराहट हल्का-17 में तत्कालीन पटवारी संतोष सतनामी पर नामांतरण और बंटवारे के लिए 15 हजार रुपए मांगने का आरोप है। उन्हें कथित तौर पर पांच हजार रुपए लेते हुए पकड़ा गया था। यह मामला लोकायुक्त में दर्ज शिकायतों के आधार पर सामने आए मामलों में शामिल है।
जबलपुर में कुंडम तहसील के पिपरिया ग्राम मझौली में चार बीघा जमीन के नामांतरण के लिए पटवारी सनी द्विवेदी पर 15 हजार रुपए मांगने का आरोप है। इस मामले को भी अभियोजन स्वीकृति की कार्रवाई से जुड़े मामलों में शामिल किया गया है।
नर्मदापुरम और सीहोर से जुड़े मामलों में नगर सर्वेक्षक देवेंद्र सहरिया तथा जावर तहसील के धर्मेंद्र सिंह राठौर के नाम सामने आए हैं। दोनों से जुड़े मामलों में 10 हजार रुपए रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए हैं। वहीं, भोपाल में कोलार क्षेत्र के पटवारी मंगलेश खंडेलवाल पर फर्जी नामांतरण और लीज नवीनीकरण के एवज में आठ हजार रुपए लेने का आरोप है।
इन मामलों में अभियोजन स्वीकृति की कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग की ओर से जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती का संदेश देने की कोशिश की गई है। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोप और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग बातें हैं। आरोप सामने आने या अभियोजन स्वीकृति दिए जाने को अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।
पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई का असर ग्वालियर और जबलपुर में भी दिखाई दिया है। ग्वालियर में गुरुवार को 19 पटवारियों को निलंबित किया गया। इसके विरोध में पटवारियों ने बस्ता जमा कर शुक्रवार से कलमबंद हड़ताल का ऐलान किया है। बस्ता जमा करने और काम बंद करने के ऐलान के बाद वहां भी प्रशासन और पटवारियों के बीच विवाद बढ़ गया है।
जबलपुर में 17 पटवारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा दो पटवारियों की दो-दो वेतनवृद्धियां रोकने की कार्रवाई हुई है। जबलपुर में ही 164 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। निलंबन, वेतनवृद्धि रोकने और नोटिस की इन कार्रवाइयों ने पटवारी संगठनों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
पटवारियों के सामूहिक अवकाश और अलग-अलग जिलों में हुई कार्रवाई का असर आम लोगों के काम पर पड़ रहा है। जमीन के नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इन कामों से जुड़ी फाइलों की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। लोक सेवा गारंटी के तहत समयसीमा में पूरे होने वाले कामों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि राजस्व व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना जरूरी है। दूसरी ओर, पटवारी अपनी भूमिका, जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद को लेकर विरोध पर अड़े हैं। स्वामित्व योजना की निशुल्क रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद अब निलंबन, बर्खास्तगी और कारण बताओ नोटिस तक पहुंच चुका है।
मुख्य सचिव की ओर से कलेक्टरों को दिए गए सात दिन के अल्टीमेटम के बाद अब प्रशासन के सामने राजस्व कामकाज सामान्य कराने की चुनौती है। यह भी देखना होगा कि जिले के अधिकारी पटवारियों से काम करा पाते हैं या नहीं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा नहीं कर पाने वाले कलेक्टरों को भोपाल ट्रांसफर के लिए तैयार रहना होगा।
फिलहाल पटवारियों का सामूहिक अवकाश जारी है और कई जिलों में कार्रवाई के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। इस टकराव के बीच सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ रही है, जिनके जमीन संबंधी काम सरकारी दफ्तरों में अटके हुए हैं। अब सवाल यही है कि सात दिन के भीतर प्रशासन कामकाज सामान्य करा पाता है या पटवारियों और सरकार के बीच विवाद और गहराता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्यप्रदेश में पटवारी सामूहिक अवकाश पर क्यों गए हैं?
पटवारी स्वामित्व योजना के तहत गांवों में मकानों की निशुल्क रजिस्ट्री में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर विरोध कर रहे हैं।
पटवारियों के सामूहिक अवकाश से कौन-कौन से काम प्रभावित हुए हैं?
नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और लोक सेवा गारंटी के तहत होने वाले कई राजस्व काम प्रभावित हुए हैं।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को कितने दिन का अल्टीमेटम दिया है?
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन में राजस्व काम शुरू कराने का निर्देश दिया है।
काम नहीं करा पाने वाले कलेक्टरों के लिए क्या चेतावनी दी गई है?
जो कलेक्टर अपने जिले में पटवारियों से काम नहीं करा पाएंगे, उन्हें भोपाल ट्रांसफर के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
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