लाड़ली बहना पर मोहन यादव की ‘महंगी’ टिप्पणी, सियासत गरम
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की लाड़ली बहना योजना को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद सियासत गरमा गई है।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की लाड़ली बहना योजना को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को आयोजित बुंदेली समागम में योजना के खर्च को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।” इस टिप्पणी के बाद सवाल उठने लगा कि क्या सरकार योजना की राशि घटाने, इसका दायरा कम करने या इसे बंद करने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री की बात एक बुंदेली कंटेंट क्रिएटर के सवाल के जवाब में सामने आई। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह टिप्पणी की। बयान का अंदाज भले ही मजाकिया था, लेकिन लाड़ली बहना योजना पर होने वाले भारी सरकारी खर्च के बीच इसके राजनीतिक और आर्थिक मायने निकाले जाने लगे हैं। योजना से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने राशि दी जाती है। इसलिए मुख्यमंत्री की ‘भारी मार’ वाली बात को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है कि लाड़ली बहना योजना बंद होने वाली है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेज इसके उलट तस्वीर दिखाते हैं। 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सरकार ने हाल ही में 2026-27 से 2030-31 तक योजना को लगातार चलाने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की मंजूरी दी है।
इन आंकड़ों से साफ है कि फिलहाल योजना को खत्म करने का कोई सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। बल्कि योजना को आगे जारी रखने की तैयारी दिखाई दे रही है। सरकार की ओर से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए दी गई मंजूरी भी इसी बात की ओर इशारा करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री की टिप्पणी को योजना बंद करने की घोषणा के तौर पर देखना अभी सही नहीं होगा।
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत 2023 में ₹1,000 प्रतिमाह की सहायता से हुई थी। इसके बाद महिलाओं को दी जाने वाली राशि बढ़ाकर ₹1,250 प्रतिमाह की गई और अब यह राशि ₹1,500 प्रतिमाह है। वर्तमान में करीब 1.25 करोड़ महिलाएं इस योजना के दायरे में हैं। आधिकारिक पोर्टल पर 1,25,22,542 पात्र आवेदक दर्ज हैं।
अगर करीब 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹1,500 दिए जाते हैं, तो सिर्फ मासिक भुगतान का आकार लगभग ₹1,875 करोड़ बैठता है। सालाना हिसाब से यह रकम करीब ₹22,500 करोड़ होती है। इसमें प्रशासनिक और अन्य संबंधित खर्च अलग हैं। इस वजह से लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश के सबसे बड़े नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों में शामिल है।
2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया जाना इसी बड़े वित्तीय आकार को दिखाता है। योजना के तहत हर महीने भुगतान होने के कारण सरकार के बजट पर इसका असर लगातार बना रहता है। महिलाओं की संख्या, हर महीने दी जाने वाली राशि और पूरे साल के भुगतान को देखें तो योजना पर होने वाला खर्च हजारों करोड़ रुपए में पहुंचता है। इसी खर्च को मुख्यमंत्री की ‘महंगी पड़ गई’ वाली टिप्पणी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
मध्यप्रदेश का कुल 2026-27 बजट करीब ₹4.23 लाख करोड़ है। इसमें लाड़ली बहना योजना के लिए रखा गया ₹23,883 करोड़ का प्रावधान राज्य के कुल बजटीय खर्च का बड़ा हिस्सा है। इसके साथ ही राज्य सरकार पर वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसी प्रतिबद्ध देनदारियां भी हैं। 2026-27 में इन तीनों मदों पर संयुक्त प्रतिबद्ध व्यय करीब ₹1.38 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
इसी वित्तीय स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री की ‘इतनी भारी मार पड़ती है’ वाली टिप्पणी का एक मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि वह सरकार पर पड़ रहे वित्तीय दबाव की बात कर रहे थे। इसे योजना बंद करने की घोषणा के बजाय योजना के बड़े खर्च को लेकर सरकार पर पड़ने वाले असर की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने योजना बंद करने या इसकी राशि घटाने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।
लाड़ली बहना योजना की राशि को ₹3,000 प्रतिमाह करने की मांग और राजनीतिक वादे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। लेकिन अभी सरकारी स्तर पर महिलाओं को ₹3,000 प्रतिमाह देने की कोई नई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। वर्तमान भुगतान ₹1,500 प्रतिमाह है। मुख्यमंत्री ने भी बुंदेली समागम में इसी राशि का उल्लेख किया।
इसलिए योजना से जुड़ी दो बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली बात यह है कि योजना बंद होने का फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत नहीं है। दूसरी बात यह है कि राशि को ₹3,000 प्रतिमाह करने का भी अभी कोई नया सरकारी ऐलान नहीं हुआ है। मौजूदा व्यवस्था में महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह दिए जा रहे हैं और योजना को 2030-31 तक जारी रखने के लिए सरकार ने मंजूरी दी है।
बुंदेली समागम में अपनी टिप्पणी के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए सरकार की ओर से कोई तकलीफ नहीं होगी। उन्होंने योजना के बारे में बताया कि इसकी शुरुआत ₹1,000 से हुई थी और अब महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उनके इस बयान को योजना के आगे जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा गया।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का “लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।” कहना फिलहाल योजना बंद करने की सरकारी तैयारी का संकेत नहीं है। उपलब्ध बजट और सरकारी मंजूरी योजना को आगे जारी रखने की तस्वीर दिखाते हैं। असली मुद्दा योजना का बढ़ता वित्तीय आकार है। करीब सवा करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹1,500 देने वाली इस योजना पर सालाना हजारों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यही वित्तीय बोझ मुख्यमंत्री की मजाकिया टिप्पणी के पीछे छिपा सबसे बड़ा तथ्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि लाड़ली बहना योजना बहुत महंगी पड़ गई और मुख्यमंत्री बनते ही उन पर भारी मार पड़ गई।
क्या लाड़ली बहना योजना बंद होने वाली है?
अभी तक योजना बंद करने का कोई आधिकारिक संकेत या फैसला सामने नहीं आया है।
लाड़ली बहना योजना के लिए 2026-27 के बजट में कितनी राशि रखी गई है?
2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को हर महीने कितनी राशि मिलती है?
फिलहाल योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹1,500 दिए जाते हैं।
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