दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रिया रिपोर्ट करने की ट्रेनिंग दी गई
हापुड़ स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में फार्माकोलॉजी विभाग ने छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के मौके पर एक अहम जागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
हापुड़ स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में फार्माकोलॉजी विभाग ने छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के मौके पर एक अहम जागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का विषय था प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया भरने और पीवीपीआई को रिपोर्ट करना, जो मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों के लिए बेहद जरूरी है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एनसीसी, आईपीसी, गाजियाबाद, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। कार्यशाला का मुख्य मकसद चिकित्सा विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं यानी एडीआर की पहचान करने, उनका दस्तावेजीकरण करने, फॉर्म भरने और रिपोर्टिंग की व्यावहारिक जानकारी देना था। साथ ही इसका उद्देश्य औषधि सुरक्षा और तर्कसंगत औषधि इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान, जरूरी जानकारी का दस्तावेजीकरण, एडीआर फॉर्म भरने और भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम यानी पीवीपीआई के तहत रिपोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दवाओं के इस्तेमाल के दौरान होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की समय पर पहचान और सही रिपोर्टिंग मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बहुत अहम भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि फार्माकोविजिलेंस रोगी सुरक्षा, दवा की क्वालिटी, तर्कसंगत औषधि इस्तेमाल और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि यह सिस्टम पूरे देश में दवाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया फॉर्म भरने और उसकी रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को उदाहरणों के जरिए समझाया गया। इससे विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को एडीआर की पहचान और समयबद्ध रिपोर्टिंग के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल विकसित करने का मौका मिला।
प्रशिक्षण सत्र खत्म होने के बाद फार्माकोविजिलेंस और प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग विषय पर एक इंटरैक्टिव क्विज का भी आयोजन किया गया। इस क्विज में स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ ने भी उत्साह के साथ हिस्सा लिया। क्विज के जरिए प्रतिभागियों के ज्ञान को परखने के साथ-साथ फार्माकोविजिलेंस से जुड़े अहम विषयों को सहभागिता वाले तरीके से दोहराया गया।
कार्यक्रम का समन्वय डॉ. कविता धर बगाती, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी विभाग ने अपनी टीम के साथ मिलकर किया। आयोजन में डॉ. शाकिता फातिमा, डॉ. तबिंदा नज़ीर, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. सोनाक्षी सिंह, डॉ. तरुण शर्मा, डॉ. श्रेया सक्सेना, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. उत्कर्ष हरि, डॉ. अखिलदास, डॉ. सुरभि और डॉ. दीपक ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यशाला के सफल आयोजन के साथ सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने सुरक्षित दवा इस्तेमाल, रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।
कार्यक्रम में संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. चरनजीत सिंह अहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, जनरल मैनेजर श्री एन. वर्धराजन और डायरेक्टर श्री रघुवार दत्त सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी तथा नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एडीआर यानी प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया क्या होती है और इसे रिपोर्ट करना क्यों जरूरी है?
एडीआर (Adverse Drug Reaction) दवा लेने के बाद शरीर में आने वाली अनचाही प्रतिक्रिया को कहते हैं। इसे समय पर पहचानकर रिपोर्ट करना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और दवाओं की क्वालिटी में सुधार आता है।
यह प्रशिक्षण कार्यशाला किसके लिए आयोजित की गई थी?
यह कार्यशाला मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों के लिए आयोजित की गई थी। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भाग लिया।
प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया को दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है?
प्रक्रिया में एडीआर की पहचान करना, जरूरी जानकारी का दस्तावेजीकरण करना, एडीआर फॉर्म भरना और भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) के तहत इसे रिपोर्ट करना शामिल है।
फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम क्या करता है?
फार्माकोविजिलेंस रोगी सुरक्षा, दवा की क्वालिटी, तर्कसंगत औषधि इस्तेमाल और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करता है। यह पूरे देश में दवाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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