मणिपुर हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक की चुनाव याचिका खारिज की
बीजेपी विधायक के चुनाव को रद्द करने की याचिका खारिज, मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा- टेक्नोलॉजी को इंजीनियरिंग लिखना कोई बड़ा फ्रॉड नहीं मणिपुर हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक करम श्याम की 2022 के लांगथबाल
मणिपुर हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक करम श्याम की 2022 के लांगथबाल विधानसभा चुनाव में जीत को बरकरार रखते हुए उनकी चुनाव रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस एम. मुरलीधरन ने 14 जुलाई को फैसला सुनाते हुए कहा कि श्याम के चुनाव हलफनामे में दी गई जानकारी में कथित गड़बड़ी इतनी गंभीर नहीं है कि उनकी जीत को रद्द किया जाए या उन्हें अयोग्य ठहराया जाए।
डिग्री में गड़बड़ी को फ्रॉड मानने से इनकार
कांग्रेस नेता ओक्रम जॉय सिंह ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि करम श्याम ने अपने हलफनामे में अपनी शैक्षिक योग्यता को गलत तरीके से बताया है। उन्होंने टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की डिग्री को टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के तौर पर पेश किया। लेकिन कोर्ट ने इसे जानबूझकर गलत जानकारी देने या धोखाधड़ी मानने से इनकार कर दिया। फैसले में कहा गया, "ऐसी छोटी गलती को चुनाव प्रक्रिया को गुमराह करने या गंभीर मसला मानना सही नहीं होगा।"
फैसले का महत्व
इस फैसले से चुनाव हलफनामों में मामूली गलतियों और गंभीर गड़बड़ियों के बीच फर्क को लेकर न्यायपालिका का रुख साफ हुआ है। कोर्ट ने श्याम की जीत को बरकरार रखते हुए यह साफ कर दिया कि उम्मीदवारों की घोषणाओं में हर गलती पर सख्त सजा या अयोग्यता जरूरी नहीं है। यह फैसला इस बात पर भी जोर देता है कि ऐसी गलतियों का चुनाव प्रक्रिया की ईमानदारी पर कितना असर पड़ता है।
इस मामले पर आगे की जानकारी का इंतजार है।
स्रोत: Patrika
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मणिपुर हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक करम श्याम की चुनाव याचिका में क्या फैसला दिया?
मणिपुर हाईकोर्ट ने करम श्याम की 2022 के लांगथबाल विधानसभा चुनाव की जीत को बरकरार रखते हुए उनकी चुनाव रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया।
करम श्याम के खिलाफ चुनाव याचिका में क्या आरोप लगाए गए थे?
कांग्रेस नेता ओक्रम जॉय सिंह ने आरोप लगाया था कि करम श्याम ने अपने चुनाव हलफनामे में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की डिग्री को टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के रूप में गलत तरीके से बताया था।
कोर्ट ने डिग्री में इस गड़बड़ी को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि टेक्नोलॉजी को इंजीनियरिंग लिखना कोई बड़ा फ्रॉड नहीं है और ऐसी छोटी गलती को चुनाव प्रक्रिया को गुमराह करने या गंभीर मसला मानना सही नहीं होगा।
इस फैसले का मतलब क्या है?
इस फैसले से पता चलता है कि चुनाव हलफनामों में मामूली गलतियों और गंभीर गड़बड़ियों के बीच फर्क होता है। कोर्ट ने साफ किया कि हर छोटी गलती पर सख्त सजा या अयोग्यता जरूरी नहीं है।
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