गोंडा में नकली नौकरी का झांसा, 10 लाख रुपये ठगे जाने का आरोप
गोंडा में सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से लाखों रुपये की वसूली करने के आरोप में कोतवाली नगर पुलिस ने करण वर्मा और उसके सहयोगी अनूप कुमार पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
गोंडा में सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से लाखों रुपये की वसूली करने के आरोप में कोतवाली नगर पुलिस ने करण वर्मा और उसके सहयोगी अनूप कुमार पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पीड़ित का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बाद भी दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
पटेल नगर में रहने वाले रियाज अहमद सिद्दीकी ने शिकायत में बताया कि करण वर्मा और अनूप कुमार पांडेय ने खुद को बहुत प्रभावशाली व्यक्ति बताया और सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। आरोपियों ने रियाज के भाइयों को स्वास्थ्य विभाग और जल निगम में नौकरी दिलाने का झांसा दिया, जबकि उनकी बहन को शिक्षा विभाग में जॉब दिलाने का वादा किया।
पीड़ित ने बताया कि अलग-अलग तारीखों में आरोपियों ने कुल 10.25 लाख रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। इस रकम का इंतजाम करने के लिए रियाज को अपनी पैतृक जमीन बेचनी पड़ी और आभूषण भी गिरवी रखने पड़े। आरोपियों ने वादा किया था कि अगर नौकरी नहीं लगी तो पूरी रकम वापस कर देंगे।
रियाज का आरोप है कि बाद में आरोपियों की तरफ से दिए गए नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज फर्जी, कूटरचित और भ्रामक पाए गए। जब उन्होंने रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने जान से मारने, दुकान बंद कराने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। पीड़ित का दावा है कि उनके पास व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद हैं।
पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने अब तक सिर्फ 4.02 लाख रुपये वापस किए हैं, जबकि 6.22 लाख रुपये अभी भी बाकी हैं। इसी मामले में कोतवाली नगर थाने में करण वर्मा और अनूप कुमार पांडेय समेत अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
रियाज अहमद सिद्दीकी ने गंभीर आरोप लगाया है कि दोनों आरोपियों की पुलिस से साठगांठ है, जिसकी वजह से मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी, उनके बैंक खातों और संपत्तियों की जांच करने और बाकी बची रकम की बरामदगी की मांग की है।
रियाज ने यह भी आशंका जताई है कि आरोपी दूसरे लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी कर चुके हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच में लगी हुई है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी का अभी तक इंतजार बना हुआ है। पीड़ित ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार के तीन सदस्यों के लिए नौकरी की उम्मीद में पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी लगा दी थी, लेकिन सब कुछ बेकार हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोंडा में किस तरह की ठगी का केस दर्ज हुआ है?
करण वर्मा और अनूप कुमार पांडेय ने सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 10.25 लाख रुपये ठग लिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जल निगम और शिक्षा विभाग में नौकरी का वादा किया, लेकिन नियुक्ति के दस्तावेज फर्जी निकले।
पीड़ित ने इतना पैसा जुटाने के लिए क्या किया?
रियाज अहमद सिद्दीकी को नौकरी का झांसा देने वाले आरोपियों को 10 लाख रुपये देने के लिए अपनी पैतृक जमीन बेचनी पड़ी और आभूषण भी गिरवी रखने पड़े।
आरोपी कितनी रकम वापस कर चुके हैं?
आरोपियों ने अब तक सिर्फ 4.02 लाख रुपये वापस किए हैं, जबकि 6.22 लाख रुपये अभी भी बाकी हैं।
पीड़ित के पास क्या सबूत हैं?
रियाज के पास WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद हैं जो धोखाधड़ी को साबित करते हैं।
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