ममूटी और वैकोम विजयलक्ष्मी ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में जीते पुरस्कार
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में मलयालम सिनेमा का मिला-जुला प्रदर्शन ममूटी और वैकोम विजयलक्ष्मी ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में चमक बिखेरी; मलयालम सिनेमा के लिए मिली-जुली किस्मत मलयालम सिनेमा ने
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में मलयालम सिनेमा का मिला-जुला प्रदर्शन
ममूटी और वैकोम विजयलक्ष्मी ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में चमक बिखेरी; मलयालम सिनेमा के लिए मिली-जुली किस्मत
मलयालम सिनेमा ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में कुछ बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन कुछ उम्मीदें टूट भी गईं। शनिवार को नई दिल्ली में घोषित हुए इन अवॉर्ड्स में इंडस्ट्री के दिग्गज ममूटी ने बेस्ट एक्टर का 'रजत कमल' अवॉर्ड जीता। राहुल सदाशिवन की हॉरर-थ्रिलर फिल्म ब्रमायुगम में कोडुमोन पोटी नाम के एक तानाशाही और रहस्यमय जमींदार के किरदार में ममूटी की दमदार एक्टिंग को खूब सराहा गया। ममूटी ने यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन के साथ साझा किया।
सिनेमैटोग्राफी और प्लेबैक सिंगिंग को भी सम्मान
ब्रमायुगम को एक और बड़ी जीत सिनेमैटोग्राफी के लिए मिली। तिरुवनंतपुरम के शहनाद जलाल ने बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड अपने नाम किया। जलाल की बेहतरीन कैमरा वर्क ने फिल्म को आलोचकों के बीच बड़ी सफलता दिलाई। यह उनकी दूसरी फिल्म है राहुल सदाशिवन के साथ, इससे पहले उन्होंने भूतकालम पर साथ काम किया था। जलाल ने 2010 में चित्रसूत्रम के लिए केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीता था और उनकी अन्य चर्चित फिल्में ई अदुथा कलथु और लेफ्ट राइट लेफ्ट रही हैं।
मशहूर सिंगर वैकोम विजयलक्ष्मी ने भी सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने अजयांते रंडम मोशानम के गाने "अंगु वाना कोनिलु" के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल) का अवॉर्ड जीता। विजयलक्ष्मी ने म्यूजिक डायरेक्टर धिबु निनन थॉमस का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उन्हें इस गाने को एक यादगार लोरी के रूप में पेश करने में मदद की।
फेमिनिची फातिमा को मिला बेस्ट मलयालम फिल्म का अवॉर्ड
फासिल मुहम्मद की पहली फिल्म फेमिनिची फातिमा (फेमिनिस्ट फातिमा) को बेस्ट मलयालम फिल्म का अवॉर्ड मिला। यह फिल्म महिलाओं पर थोपे गए पितृसत्ता और धार्मिक प्रतिबंधों पर तीखा व्यंग्य है। फिल्म को पहले ही 29वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (IFFK) में कई अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। फासिल मुहम्मद ने फिल्म की कंटेंट पर भरोसा जताया और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने पर खुशी जाहिर की।
कुछ फिल्मों को निराशा
उम्मीदों के बावजूद मंजुम्मल बॉयज और किष्किंधा कांडम जैसी फिल्में कोई अवॉर्ड नहीं जीत सकीं, जिससे इनके फैंस और क्रिएटर्स निराश हुए। किष्किंधा कांडम के लिए बेस्ट एक्टर की दौड़ में शामिल रहे एक्टर आसिफ अली ने ममूटी के साथ नामित होने पर गर्व जताया और उन्हें "ममुक्का" कहकर सम्मान दिया।
नॉन-फीचर फिल्म को स्पेशल मेंशन
नॉन-फीचर फिल्म कैटेगरी में आनंदा ज्योति (जोस एंटनी) की भद्र-काली नाटकम (भद्र-द डांस ऑफ काली) को स्पेशल मेंशन मिला। इस फिल्म को मिली पहचान ने इस साल मलयालम सिनेमा की उपलब्धियों में एक और सफलता जोड़ दी।
मलयालम सिनेमा के लिए मिला-जुला अनुभव
ममूटी, शहनाद जलाल, वैकोम विजयलक्ष्मी और फासिल मुहम्मद की जीत ने मलयालम सिनेमा की क्रिएटिव ताकत को साबित किया, लेकिन कुछ चर्चित फिल्मों को अवॉर्ड्स न मिलने से यह भी दिखा कि अवॉर्ड्स का फैसला कितना अप्रत्याशित हो सकता है। 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स मलयालम सिनेमा के लिए जश्न और आत्ममंथन दोनों का मौका लेकर आए।
स्रोत: The Hindu
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