फडणवीस ने 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर दी श्रद्धांजलि
स्वतंत्रता सेनानियों का देशभक्ति का जज्बा पीढ़ियों को प्रेरित करता है: फडणवीस 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के
स्वतंत्रता सेनानियों का देशभक्ति का जज्बा पीढ़ियों को प्रेरित करता है: फडणवीस
'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि
'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की देशभक्ति आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। इस ऐतिहासिक दिन को याद करने के लिए सभी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। यह दिन भारत की आजादी की लड़ाई का अहम मोड़ था।
अगस्त क्रांति मैदान पर श्रद्धांजलि
मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में शहीद स्मारक पर स्कूल के बच्चों और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने इकट्ठा होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह जगह ऐतिहासिक रूप से खास है क्योंकि यहीं से 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत की थी। यह आंदोलन ब्रिटिश हुकूमत को खत्म करने की निर्णायक अपील थी और भारत की आजादी की लड़ाई में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
नेताओं ने आंदोलन के महत्व पर विचार रखे
सीएम फडणवीस ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, "अगस्त क्रांति दिन पर हम उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं, जिनकी हिम्मत और दृढ़ संकल्प ने भारत की आजादी की राह को मजबूत किया। उनकी देशभक्ति की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।"
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने भी X पर इस आंदोलन की अहमियत बताते हुए इसे महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'करो या मरो' की अपील कहा। उन्होंने ज्ञात-अज्ञात सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि करोड़ों भारतीय इस आंदोलन से जुड़े और आजादी की लड़ाई को तेज किया।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सापकल ने भी कहा कि 'भारत छोड़ो' आंदोलन ने देश को औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने के लिए जनता के अटूट संकल्प को दिखाया। उन्होंने इस आंदोलन को भारत की आजादी की लड़ाई के अंतिम चरण को तेज करने वाला बताया।
क्यों है ये दिन खास
'भारत छोड़ो' आंदोलन सामूहिक संघर्ष और अन्याय के खिलाफ एकता की ताकत का प्रतीक है। तमाम चुनौतियों के बावजूद शुरू हुआ यह आंदोलन लाखों भारतीयों को आजादी की मांग के लिए प्रेरित करता रहा और आखिरकार 1947 में देश को आजादी मिली। आज यह आंदोलन साहस, एकता और देशभक्ति के उन मूल्यों की याद दिलाता है, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें सिखाए।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'भारत छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत कब और कहां से हुई?
'भारत छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान से की थी। यह आंदोलन ब्रिटिश हुकूमत को खत्म करने की एक निर्णायक अपील था।
इस साल 'भारत छोड़ो' आंदोलन की कौन सी वर्षगांठ मनाई गई?
इस साल 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ मनाई गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
'भारत छोड़ो' आंदोलन को 'करो या मरो' क्यों कहा गया?
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने इस आंदोलन को महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'करो या मरो' की अपील बताया। यह आंदोलन भारत को आजादी दिलाने के लिए जनता के अटूट संकल्प और एकता का प्रतीक था।
'भारत छोड़ो' आंदोलन का भारत की आजादी में क्या महत्व था?
यह आंदोलन भारत की आजादी की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसने लाखों भारतीयों को आजादी की मांग के लिए प्रेरित किया और आखिरकार 1947 में देश को आजादी मिली।
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