रवि मोहन और प्रोडक्शन हाउस के 15 करोड़ के विवाद को आर्बिट्रेशन को भेजा
मद्रास हाई कोर्ट ने रवि मोहन और बॉबी टच गोल्ड के 15 करोड़ रुपये के विवाद को आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल को भेजा। फिल्म डील और एडवांस को लेकर विवाद।
मद्रास हाई कोर्ट ने सभी लंबित आवेदन—जिनमें सिक्योरिटी डिपॉजिट और संपत्ति अटैचमेंट से जुड़े विवाद शामिल हैं—एक्टर रवि मोहन और प्रोडक्शन हाउस बॉबी टच गोल्ड यूनिवर्सल प्राइवेट लिमिटेड के बीच 15 करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद को सुलझाने के लिए पहले से बनाए गए आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल को भेज दिए हैं।
जस्टिस एम. सुंदर और मुम्मिनेनी सुधीर कुमार की सेकेंड डिविजन बेंच ने रवि मोहन की ओरिजिनल साइड अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सिंगल जज के 23 जुलाई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें 5.90 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी जमा करने को कहा गया था। यह रेफरल मंगलवार को दोनों पक्षों के वकीलों की सहमति से किया गया।
खत्म हुई फिल्म डील को लेकर आमने-सामने दावे
बॉबी टच गोल्ड यूनिवर्सल ने जुलाई में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आरोप लगाया था कि रवि मोहन ने दो फिल्मों के लिए सितंबर 2024 में दिए गए 6 करोड़ रुपये एडवांस वापस नहीं किए, जबकि एग्रीमेंट खत्म हो चुका था। प्रोडक्शन हाउस ने 5.9 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी मांगी और एक्टर को ब्रो कोड नाम की फिल्म बनाने या दूसरे प्रोड्यूसर्स के साथ काम करने से रोकने की मांग की थी।
रवि मोहन ने अपने आवेदनों में दावा किया कि शूटिंग शुरू करने में देरी की वजह से उन्हें 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एडवांस एडजस्ट करने के बाद उन्होंने 9 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की और कोर्ट से आदेश मांगा कि प्रोडक्शन हाउस उस रकम की सिक्योरिटी दे और अपनी फिल्म चेन्नई सिटी गैंगस्टर्स के अधिकार ट्रांसफर न करे।
सिंगल जज का आदेश और अपील
जस्टिस अब्दुल कुद्दूस ने एक्टर के आवेदनों को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनका नुकसान का दावा आर्बिट्रल कार्यवाही खत्म होने तक अंतरिम राहत नहीं पा सकता। प्रोडक्शन हाउस ने रवि मोहन की प्रोफेशनल गतिविधियों के खिलाफ इंजंक्शन की मांग वापस ले ली और सिर्फ 5.9 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी पर फोकस किया।
यह पाते हुए कि प्रोड्यूसर का कॉन्ट्रैक्चुअल दावा अंतरिम सुरक्षा के लायक है, जबकि एक्टर का नुकसान का दावा नहीं, जस्टिस कुद्दूस ने रवि मोहन को सिक्योरिटी जमा करने का आदेश दिया। एक्टर ने फिर मामले को डिविजन बेंच में ले जाया।
बेंच ने नोट किया कि रिटायर्ड हाई कोर्ट जज को पहले ही सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया जा चुका है और फैसला सुनाया कि अब ट्रिब्यूनल सभी लंबित आवेदनों पर फैसला करेगा, जिनमें सिक्योरिटी, प्रॉपर्टी अटैचमेंट और अंतरिम आदेशों से जुड़े मामले शामिल हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रवि मोहन और प्रोडक्शन हाउस के बीच विवाद किस बात को लेकर है?
बॉबी टच गोल्ड यूनिवर्सल प्राइवेट लिमिटेड का दावा है कि रवि मोहन ने दो फिल्मों के लिए सितंबर 2024 में दिए गए 6 करोड़ रुपये का एडवांस वापस नहीं किया, जबकि एग्रीमेंट खत्म हो चुका था। रवि मोहन का कहना है कि शूटिंग में देरी से उन्हें 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले को कहां भेजा है?
मद्रास हाई कोर्ट ने इस 15 करोड़ रुपये के विवाद को एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल को भेज दिया है, जहां एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज को सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया गया है।
रवि मोहन को कितनी सिक्योरिटी जमा करने का आदेश दिया गया है?
सिंगल जज ने रवि मोहन को 5.90 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी जमा करने का आदेश दिया था। रवि मोहन ने इस आदेश के खिलाफ डिविजन बेंच में अपील की, लेकिन वह खारिज कर दी गई।
आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल को कौन-कौन से मामलों पर फैसला करना होगा?
ट्रिब्यूनल को सभी लंबित आवेदनों पर फैसला करना होगा, जिनमें सिक्योरिटी डिपॉजिट, संपत्ति अटैचमेंट और अंतरिम आदेशों से जुड़े विवाद शामिल हैं।
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