MP SEIAA में गंभीर अनियमितताओं का आरोप, अध्यक्ष ने सदस्य सचिव हर्षल पंचोली को निलंबित कर कार्रवाई की मांग की
भोपाल, 21 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (MP SEIAA) में कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। SEIAA के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन को पत्र लिखकर सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। 20 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में उन्होंने सदस्य सचिव को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
भोपाल, 21 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (MP SEIAA) में कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। SEIAA के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन को पत्र लिखकर सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। 20 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में उन्होंने सदस्य सचिव को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
पत्र क्रमांक 92/SEIAA/2026 में आरोप लगाया गया है कि SEIAA की बैठकों के एजेंडा तैयार करने, पर्यावरणीय मंजूरियों से जुड़े मामलों को शामिल करने और बैठक की कार्यवाही का विवरण निर्धारित समय पर अपलोड करने में नियमों का पालन नहीं किया गया। अध्यक्ष ने इन कथित अनियमितताओं को पर्यावरणीय कानूनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन बताया है।
एजेंडा तैयार करने में नियमों की अनदेखी का आरोप
पत्र के अनुसार, MP SEIAA की 974वीं और 975वीं बैठकों के लिए एजेंडा 17 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड किया गया था। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एजेंडा तैयार करते समय भारत सरकार के 4 नवंबर 2008 के कार्यालय ज्ञापन और पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
पत्र में कहा गया है कि SEIAA में लगभग 500 मामले लंबित हैं, लेकिन एजेंडा तैयार करते समय पोर्टल पर उपलब्ध लंबित मामलों को कथित तौर पर क्रमवार शामिल नहीं किया गया। आरोप है कि कुछ मामलों को छोड़कर अन्य मामलों को मनमाने ढंग से एजेंडा में शामिल किया गया।
अध्यक्ष ने 974वीं बैठक के एजेंडा में ऐसे चार मामलों को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई है, जिनके बारे में पत्र में कहा गया है कि वे SEIAA के बजाय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) में लंबित थे। इसके अलावा, डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी (Deemed EC) से जुड़े मामलों में भी कथित तौर पर चुनिंदा मामलों को ही एजेंडा में शामिल करने का आरोप लगाया गया है।
NGT के आदेश के उल्लंघन का भी आरोप
पत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मामले O.A. No. 31/2026 (CZ) में 3 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश का उल्लेख किया गया है। अध्यक्ष ने आदेश के हवाले से आरोप लगाया है कि SEIAA की आवश्यक स्वीकृति के बिना खनन संबंधी कार्रवाई किया जाना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 और संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है।
पत्र के अनुसार, SEIAA अध्यक्ष ने इस संबंध में सदस्य सचिव को पहले भी कई पत्र लिखे थे। इनमें 10 फरवरी 2026, 8 मई 2026, 5 अक्टूबर 2026 और 13 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र शामिल बताए गए हैं। अध्यक्ष का आरोप है कि इन अनुरोधों के बावजूद संबंधित मामलों को SEIAA के समक्ष विचार के लिए एजेंडा में शामिल नहीं किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन एक अन्य मामले W.P. (Civil) No. 689/2025 का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। इसमें डीम्ड EC से जुड़े मामलों पर विचार करने के लिए एजेंडा में उन्हें शामिल करने का अनुरोध किए जाने की बात कही गई है।
बैठक की कार्यवाही अपलोड करने में देरी पर सवाल
SEIAA अध्यक्ष ने बैठकों की कार्यवाही का विवरण (Minutes of Meeting) निर्धारित समय में परिवेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पत्र के मुताबिक, 966वीं बैठक, जो 8 सितंबर 2026 को हुई थी, उसकी कार्यवाही 1 अक्टूबर 2026 को अपलोड की गई। वहीं, 965वीं बैठक, जो 18 अगस्त 2026 को हुई थी, उसका विवरण 5 सितंबर 2026 को अपलोड किया गया।
अध्यक्ष ने दावा किया है कि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने से प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन पर सवाल खड़े होते हैं।
पर्यावरणीय मंजूरी के पत्र जारी करने में देरी का आरोप
पत्र में यह भी कहा गया है कि पर्यावरणीय मंजूरी (EC) दिए जाने के बाद संबंधित मंजूरी पत्र समय पर परिवेश पोर्टल पर अपलोड या जारी नहीं किए जा रहे। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इससे आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि SEIAA के सदस्य सचिव को प्राधिकरण के निर्णयों को दरकिनार करने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त है। अध्यक्ष के अनुसार, पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों के तहत संबंधित निर्णय प्राधिकरण की बैठकों में लिए जाने चाहिए।
कार्रवाई में देरी से पर्यावरण को नुकसान की आशंका
पत्र के अंतिम हिस्से में अध्यक्ष ने कहा है कि कथित अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने और SEIAA के कामकाज में अव्यवस्था बढ़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई में देरी से प्राधिकरण और राज्य सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है।
शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि सदस्य सचिव हर्षल पंचोली को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। पत्र की प्रतियां केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्य प्रदेश शासन के संबंधित अधिकारियों और SEIAA की सदस्य डॉ. सुनंदा सिंह को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
महत्वपूर्ण: ये आरोप SEIAA अध्यक्ष द्वारा शासन को लिखे गए पत्र में लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सदस्य सचिव का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MP SEIAA के अध्यक्ष ने सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के खिलाफ क्या मांग की है?
अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने हर्षल पंचोली को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
हर्षल पंचोली पर किस तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं?
उन पर बैठकों का एजेंडा तैयार करने, पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े मामलों को शामिल करने और बैठक की कार्यवाही समय पर अपलोड करने में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप हैं।
SEIAA में लंबित मामलों को लेकर क्या आरोप लगाया गया है?
पत्र के अनुसार, करीब 500 लंबित मामलों को पोर्टल पर उपलब्ध क्रम के मुताबिक एजेंडा में शामिल नहीं किया गया और कुछ मामलों को कथित तौर पर मनमाने ढंग से चुना गया।
पत्र में NGT के किस आदेश का हवाला दिया गया है?
पत्र में NGT के मामले O.A. No. 31/2026 (CZ) में 3 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है।
बैठकों की कार्यवाही अपलोड करने को लेकर क्या आपत्ति है?
अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि बैठकों की कार्यवाही का विवरण परिवेश पोर्टल पर तय समय के भीतर अपलोड नहीं किया गया।
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