मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 4.78 लाख मामले लंबित, 15 जजों के पद खाली
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों का बोझ लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। अदालत में करीब 4.78 लाख मामले लंबित हैं। वहीं, न्यायाधीशों के स्वीकृत 53 पदों में से 15 पद खाली पड़े हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों का बोझ लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। अदालत में करीब 4.78 लाख मामले लंबित हैं। वहीं, न्यायाधीशों के स्वीकृत 53 पदों में से 15 पद खाली पड़े हैं। इस समय मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोकजे सहित केवल 38 जज कार्यरत हैं।
सीमित संख्या में जजों के बीच इतने बड़े लंबित मामलों का निपटारा करना अदालत के लिए आसान नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 4.78 लाख लंबित मामलों और 38 कार्यरत जजों के आधार पर हर जज के हिस्से औसतन 12,573 मामले आते हैं।
यह औसत लंबित मामलों की कुल संख्या को कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या से विभाजित करने पर सामने आता है। हालांकि, हर जज के पास मामलों की वास्तविक संख्या एक जैसी नहीं हो सकती। मामलों का बंटवारा संबंधित जज की पीठ और उसके कार्यभार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 15 पद फिलहाल रिक्त हैं। इसका मतलब है कि स्वीकृत क्षमता के मुकाबले करीब 72 प्रतिशत पदों पर ही न्यायाधीश काम कर रहे हैं।
रिक्त पदों का असर मामलों की सुनवाई और लंबित प्रकरणों के निपटारे पर पड़ रहा है। अदालत के सामने बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई करने के साथ-साथ पुराने लंबित मामलों को भी आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।
अदालत में लंबित मामलों में आपराधिक, दीवानी और अन्य कानूनी विवाद शामिल हैं। इन मामलों में सुनवाई के लिए पक्षकारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या का असर न्याय पाने में लगने वाले समय पर पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में न्यायाधीशों के खाली पदों को भरना और न्यायिक संसाधनों को मजबूत करना अहम माना जाता है। अगर हाईकोर्ट में खाली पड़े सभी 15 पद भर दिए जाते हैं, तो न्यायाधीशों की कुल संख्या स्वीकृत संख्या के अनुसार 53 हो जाएगी।
जों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे के लिए काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
हालांकि, लंबित मुकदमों के वास्तविक निपटारे की रफ्तार केवल जजों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगी। मामलों की प्रकृति, नए प्रकरणों की संख्या और अदालतों की कार्यप्रणाली सहित कई कारक इसकी गति तय करेंगे।
फिलहाल, 4.78 लाख लंबित मामलों और 15 रिक्त न्यायाधीश पदों के बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सामने न्यायिक कामकाज को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कितने मामले लंबित हैं?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में करीब 4.78 लाख मामले लंबित हैं।
हाईकोर्ट में जजों के कितने पद खाली हैं?
जों के स्वीकृत 53 पदों में से 15 पद खाली हैं। फिलहाल 38 जज काम कर रहे हैं।
हर जज के हिस्से औसतन कितने मामले आते हैं?
4.78 लाख लंबित मामलों और 38 कार्यरत जजों के आधार पर हर जज के हिस्से औसतन 12,573 मामले आते हैं।
खाली पदों का मामलों पर क्या असर पड़ रहा है?
खाली पदों के कारण मामलों की सुनवाई और पुराने लंबित मामलों के निपटारे पर असर पड़ रहा है।
अगर सभी खाली पद भर दिए जाएं तो क्या होगा?
सभी 15 पद भरने पर हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या 53 हो जाएगी और मामलों की सुनवाई की क्षमता बढ़ सकती है।
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