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Uttar Pradesh Official source लखनऊ

राजनाथ और गडकरी ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया

राजनाथ, गडकरी ने किया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, सफर अब सिर्फ 40 मिनट में सोमवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी

राजनाथ और गडकरी ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

सोमवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। इस नए एक्सप्रेसवे से लखनऊ और कानपुर के बीच सफर का समय 2 घंटे से घटकर सिर्फ 40 मिनट रह जाएगा। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

लंबे समय से थी मांग

उद्घाटन के मौके पर राजनाथ सिंह ने इस प्रोजेक्ट की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाले हाईवे की मांग सालों से लंबित थी। उन्होंने नितिन गडकरी को इस प्रोजेक्ट को तुरंत मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया। राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि भविष्य में क्षेत्र की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतें बिना देरी पूरी होंगी। इस एक्सप्रेसवे की नींव मार्च 2019 में रखी गई थी।

विश्वस्तरीय तकनीक और आधुनिक सुविधाएं

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपनी उन्नत सुविधाओं के लिए खास है और इसे भारत के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में मील का पत्थर माना जा रहा है। दिसंबर 2020 में इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) का दर्जा दिया गया। यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है।

प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटा गया। पहले हिस्से में 18 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन है, जो लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ को जोड़ता है। घनी आबादी और जमीन अधिग्रहण जैसी चुनौतियों के बावजूद इसे पूरा किया गया। दूसरे हिस्से में 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जो लखनऊ और उन्नाव जिलों के 42 गांवों से होकर गुजरता है।

आधुनिक तकनीक से लैस

इस एक्सप्रेसवे में एडवांस्ड ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिससे निर्माण में सटीकता और मजबूती बढ़ी और मानवीय गलतियां कम हुईं। इसमें मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे पारंपरिक टोल प्लाजा की जरूरत खत्म हो गई है। गाड़ियां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं और टोल का भुगतान FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से होगा।

सुरक्षा के मामले में यह देश के सबसे उन्नत एक्सप्रेसवे में से एक है। इसमें 80 से ज्यादा हाई-डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड रडार लगाए गए हैं। ओवरस्पीडिंग जैसी नियमों की अनदेखी पर ऑटोमैटिक चालान जारी होंगे।

क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे लखनऊ और कानपुर के बीच बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में मदद करेगा, जिससे पहले घंटों तक जाम लगता था। करीब ₹4,500 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से सुरक्षित और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य के विकास में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों का धन्यवाद किया और कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "नए उत्तर प्रदेश" के विजन का हिस्सा है, जो बेहतर गवर्नेंस, मजबूत सुरक्षा और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है।

इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत से राज्य में कनेक्टिविटी और यात्रा समय में सुधार हुआ है। यह भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक नई मिसाल कायम करता है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से सफर का समय कितना कम हो गया है?

लखनऊ और कानपुर के बीच सफर का समय पहले 2 घंटे था, जो अब सिर्फ 40 मिनट रह गया है।

इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 63 किलोमीटर है।

इस एक्सप्रेसवे में टोल का भुगतान कैसे होता है?

इस एक्सप्रेसवे में Multi-Lane Free Flow (MLFF) टोलिंग सिस्टम है। टोल का भुगतान FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से होता है।

यह एक्सप्रेसवे किन खास तकनीकों से लैस है?

यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें 80 से ज्यादा हाई-डेफिनिशन कैमरे, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड रडार भी लगाए गए हैं।

इस प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी थी?

इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब ₹4,500 करोड़ थी।

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