कोडागु के किसानों की फसल चक्र में देरी, मॉनसून कमजोर
कोडागु के किसान परेशान, कमजोर मॉनसून से फसल चक्र में देरी मडिकेरी: कोडागु जिले के किसान इस साल मॉनसून में देरी से जूझ रहे हैं, जिससे बारिश पर निर्भर खेती प्रभावित हो रही है।
मडिकेरी: कोडागु जिले के किसान इस साल मॉनसून में देरी से जूझ रहे हैं, जिससे बारिश पर निर्भर खेती प्रभावित हो रही है। आमतौर पर मई के आखिर तक मॉनसून शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। पिछले साल की भारी बारिश और बाढ़ के मुकाबले इस बार सूखा जैसे हालात हैं।
कावेरी और हरंगी जैसी अहम नदियों का जलस्तर काफी गिर गया है। जिले में अभी तक सिर्फ छिटपुट बारिश हुई है और ज्यादातर समय धूप ही रही है। बारिश के आंकड़े हालात की गंभीरता दिखा रहे हैं। इस साल कोडागु में अब तक सिर्फ 254 मिमी बारिश हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुई 889 मिमी बारिश से 71% कम है। तालुकों में औसत बारिश भी काफी कम हुई है, जिससे धान की बुवाई और दूसरी खेती में देरी हो रही है।
किसान, जो इस समय तक बुवाई की तैयारी में जुट जाते थे, अब पर्याप्त बारिश न होने से परेशान हैं। कॉफी के बागान, जो इस इलाके की एक और अहम फसल हैं, भी लंबे सूखे की वजह से खतरे में हैं। स्थानीय लोग भी इस बदले हुए मौसम को लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि अब छाते बारिश से बचने के लिए नहीं, बल्कि गर्मी से बचने के लिए ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
हालांकि, किसानों के लिए थोड़ी राहत की उम्मीद है। मौसम विभाग ने 22 जून से 27 जून के बीच बारिश की संभावना जताई है। 22 जून को 90% बारिश की संभावना है, जबकि अगले कुछ दिनों में यह संभावना 60% से 80% के बीच रहेगी। इससे किसानों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोडागु के किसानों को किस समस्या का सामना करना पड़ रहा है?
कोडागु के किसान कमजोर मॉनसून की वजह से फसल चक्र में देरी का सामना कर रहे हैं।
इस साल कोडागु में अब तक कितनी बारिश हुई है?
इस साल कोडागु में अब तक सिर्फ 254 मिमी बारिश हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुई 889 मिमी बारिश से 71% कम है।
किसानों के लिए कब बारिश की संभावना जताई गई है?
मौसम विभाग ने 22 जून से 27 जून के बीच बारिश की संभावना जताई है।
किसान अब बुवाई की तैयारी में क्यों परेशान हैं?
किसान अब पर्याप्त बारिश न होने के कारण बुवाई की तैयारी में परेशान हैं।
स्थानीय लोग मौसम में बदलाव के बारे में क्या कह रहे हैं?
स्थानीय लोग कहते हैं कि अब छाते बारिश से बचने के लिए नहीं, बल्कि गर्मी से बचने के लिए ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
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