केरल सरकार वायनाड में 60 किमी सोलर फेंसिंग लगाने का ऐलान
केरल सरकार वायनाड में इंसान और वन्यजीवों के संघर्ष को कम करने के लिए लगाएगी 60 किमी सोलर फेंसिंग इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए केरल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए केरल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वायनाड जिले के जंगलों के किनारे 60 किमी लंबी सोलर फेंसिंग लगाने का ऐलान किया गया है। मंगलवार को वन और वन्यजीव मंत्री शिबु बेबी जॉन ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह काम राज्य सरकार के 100 दिन के एक्शन प्रोग्राम के तहत किया जाएगा। इसके साथ ही जिले में पहले से लगी 25 किमी सोलर फेंसिंग की मरम्मत भी की जाएगी।
वायनाड में वन्यजीवों का गंभीर खतरा
वायनाड को केरल का सबसे ज्यादा इंसान-वन्यजीव संघर्ष वाला जिला माना गया है। इसकी वजह है घने जंगलों के करीब होना और यहां की बड़ी वन्यजीव आबादी। इन चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) को जिले के जंगलों की कैरीइंग कैपेसिटी का अध्ययन करने का जिम्मा दिया गया है। यह अध्ययन बाघ और हाथियों की आबादी का आकलन करेगा, जो इस संघर्ष के मुख्य कारण हैं।
मंत्री जॉन ने कहा कि इन समस्याओं का समाधान किसानों, वन विभाग, चुने हुए प्रतिनिधियों, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और पब्लिक विजिलेंस कमेटियों के सहयोग से ही संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार का नजरिया जंगलों की रक्षा और किसानों के भूमि अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने का होगा।
वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नए कदम
सोलर फेंसिंग प्रोजेक्ट के अलावा, सरकार अगले 100 दिनों में वायनाड में चार रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात करेगी ताकि आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके। वन विभाग के वॉचर्स को अतिरिक्त उपकरण भी दिए जाएंगे ताकि वे वन्यजीवों को बेहतर तरीके से संभाल सकें। इसके अलावा, 100 किमी वन विभाग की सड़कों पर झाड़ियों की सफाई की जाएगी।
भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा के लिए 6 अगस्त को पलक्कड़ में वन विभाग के अधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। मंत्री जॉन ने यह भी बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से बात की है ताकि पकड़े गए बाघों को दूसरे रिजर्व में शिफ्ट करने का विकल्प तलाशा जा सके।
जनता की भागीदारी और शिकायतों का समाधान
वन विभाग 1 अगस्त से केरल भर में अदालती सुनवाई आयोजित करेगा ताकि लंबित शिकायतों का निपटारा किया जा सके। इस पहल का मकसद वन्यजीव समस्याओं से प्रभावित स्थानीय समुदायों और सरकार के बीच भरोसा और सहयोग बढ़ाना है।
क्यों है यह जरूरी
वायनाड में इंसान-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या रही है, जिससे फसलों, मवेशियों और कई बार इंसानी जानों का नुकसान हुआ है। सरकार का यह बहुआयामी कदम, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, वैज्ञानिक अध्ययन और समुदाय की भागीदारी शामिल है, इन संघर्षों को कम करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश है। सोलर फेंसिंग प्रोजेक्ट और अन्य उपाय वायनाड जैसे संवेदनशील जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व की दिशा में अहम कदम हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल सरकार वायनाड में सोलर फेंसिंग क्यों लगा रही है?
इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए। वायनाड में हाथी और बाघ की बड़ी आबादी है, जिससे किसानों की फसलें और मवेशी नुकसान का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या को हल करने के लिए 60 किमी लंबी सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी।
यह सोलर फेंसिंग प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
यह काम राज्य सरकार के 100 दिन के एक्शन प्रोग्राम के तहत किया जाएगा। इसके साथ ही पहले से लगी 25 किमी सोलर फेंसिंग की मरम्मत भी की जाएगी।
वायनाड को इंसान-वन्यजीव संघर्ष के लिए सबसे ज्यादा जोखिम वाला क्यों माना जाता है?
क्योंकि यहां घने जंगल हैं और बाघ व हाथियों की बड़ी आबादी है। इसलिए Wildlife Institute of India को यहां की वन्यजीव क्षमता का अध्ययन करने का काम दिया गया है।
सरकार वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करने के लिए और क्या कर रही है?
सरकार चार रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात करेगी, वन विभाग के वॉचर्स को अतिरिक्त उपकरण देगी, 100 किमी सड़कों पर झाड़ियों की सफाई करेगी, और 1 अगस्त से अदालती सुनवाई आयोजित करेगी।
क्या बाघों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना है?
हां, वन मंत्री ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से बात की है ताकि पकड़े गए बाघों को दूसरे रिजर्व में शिफ्ट करने का विकल्प तलाशा जा सके।
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