कुत्तों की समस्या हल करने के लिए मंत्री बिंदु कृष्णा की अपील
वैज्ञानिक और इंसानियत भरा तरीका जरूरी: मंत्री बिंदु कृष्णा केरल में आवारा कुत्तों की समस्या और रेबीज को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक और इंसानियत भरी रणनीति जरूरी है।
वैज्ञानिक और इंसानियत भरा तरीका जरूरी: मंत्री बिंदु कृष्णा
केरल में आवारा कुत्तों की समस्या और रेबीज को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक और इंसानियत भरी रणनीति जरूरी है। ये बात शुक्रवार को राज्य स्तरीय वर्कशॉप में पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री बिंदु कृष्णा ने कही। उन्होंने कहा कि सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया से इस समस्या का स्थायी हल नहीं निकलेगा।
'वन हेल्थ' अप्रोच से मिलकर काम करने की जरूरत
मंत्री बिंदु कृष्णा ने केरल वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (KVASU), मन्नूथी में अपने संबोधन में 'वन हेल्थ' अप्रोच की अहमियत पर जोर दिया। इस अप्रोच में पशुपालन, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वशासन विभागों के बीच तालमेल से समस्या का समाधान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकार एक डिजिटल पेट मैनेजमेंट सिस्टम बनाने पर विचार कर रही है। इस सिस्टम के तहत पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग, माइक्रोचिपिंग, वैक्सीनेशन और नसबंदी जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा। यह कदम आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने और रेबीज को रोकने के प्रयासों को मजबूत करेगा।
2030 तक रेबीज खत्म करने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि रेबीज को खत्म करने के लिए लगातार एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम और बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन ड्राइव चलाना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए तो केरल 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को खत्म करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
स्थानीय स्तर पर विकेंद्रीकृत मॉडल की वकालत
मंत्री ने आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के लिए वार्ड-स्तरीय मॉडल अपनाने की बात कही, जिसमें स्थानीय निकाय इस जिम्मेदारी को संभालें। उन्होंने सरकारी वेटरनरी अस्पतालों का पूरा इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
इस वर्कशॉप का आयोजन KVASU, केरल ग्राम पंचायत एसोसिएशन और केरल स्टेट वेटरनरी काउंसिल ने मिलकर किया था। इसमें आवारा कुत्तों के प्रबंधन, रेबीज रोकथाम की रणनीतियां, पशु कल्याण कानून और स्थानीय निकायों के अनुभवों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। आयोजकों ने कहा कि वर्कशॉप से निकली सिफारिशें राज्य सरकार को भेजी जाएंगी।
केरल का यह वैज्ञानिक और समग्र तरीका आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्रोत: The Hindu
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