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Karnataka Official source कर्नाटक

कर्नाटक में प्राइवेट कंपनियों के लिए पावर ट्रांसमिशन सेक्टर खोला

कर्नाटक में पावर ट्रांसमिशन सेक्टर अब प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेगा, BOOT मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों को एंट्री देने का

कर्नाटक में प्राइवेट कंपनियों के लिए पावर ट्रांसमिशन सेक्टर खोला
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कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों को एंट्री देने का फैसला किया है। यह काम BOOT (बिल्ड, ओन, ऑपरेट और ट्रांसफर) मॉडल के तहत होगा। मंड्या जिले में हम्पापुरा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (HPTL) और बेलगावी में मेखली पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (MPTL) के दो बड़े प्रोजेक्ट्स प्राइवेट कंपनियों को तय समय के लिए सौंपे जाएंगे। हालांकि, इसके लिए कर्नाटक इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (KERC) की मंजूरी जरूरी है।

प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए चुनी गईं प्राइवेट कंपनियां

कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPTCL) ने KERC से HPTL और MPTL के लिए ट्रांसमिशन लाइसेंस जारी करने की मांग की है। HPTL के लिए रेसोनिया लिमिटेड और MPTL के लिए दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों के रूप में चुना गया है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स को REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (RECPDCL) ने स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में डेवलप किया है। यह कंपनी भारत सरकार के पावर मंत्रालय के तहत आती है।

प्रोजेक्ट्स का इंफ्रास्ट्रक्चर

HPTL प्रोजेक्ट के तहत हम्पापुरा में 400/220/33 kV का सबस्टेशन बनाया जाएगा और लगभग 125 किलोमीटर लंबी 220 kV डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह लाइन मंड्या के नागमंगला, मड्डूर, तुबिनकेरे और हुयगोनाहल्ली जैसे अहम इलाकों को जोड़ेगी। इसका मकसद मंड्या में 220 kV नेटवर्क को मजबूत करना और सबस्टेशनों तक भरोसेमंद पावर सप्लाई पहुंचाना है।

वहीं, MPTL प्रोजेक्ट के तहत मेखली में 400/220/33 kV का सबस्टेशन बनाया जाएगा और 470 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। इसमें 320 किलोमीटर की डबल सर्किट लाइन मेखली को यालावर और धोनी से जोड़ेगी, जबकि 130 किलोमीटर की डबल सर्किट लाइन मेखली को कुदाची, अक्स और महालिंगपुरा से जोड़ेगी।

रेगुलेटरी प्रक्रिया और पब्लिक की राय

KERC ने इस प्रस्ताव पर 1 सितंबर तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। KERC के एक सीनियर अधिकारी ने साफ किया कि यह लाइसेंस सिर्फ पावर ट्रांसमिशन के लिए है, डिस्ट्रीब्यूशन के लिए नहीं। BOOT मॉडल के तहत प्राइवेट कंपनियां तय समय तक रेगुलेटेड टैरिफ पर इस इंफ्रास्ट्रक्चर को ऑपरेट करेंगी। इसके बाद या तो यह संपत्ति राज्य की नोडल एजेंसी को ट्रांसफर कर दी जाएगी या परफॉर्मेंस के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाएगा।

राष्ट्रीय ट्रेंड से जुड़ा कर्नाटक

इस कदम के साथ कर्नाटक उन राज्यों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने पहले ही पावर ट्रांसमिशन में प्राइवेट कंपनियों को मौका दिया है। KERC के मुताबिक, देशभर में अब तक ऐसे करीब 90 प्रोजेक्ट्स को लाइसेंस दिया जा चुका है। कर्नाटक इस मॉडल को अपनाने वाला आखिरी राज्यों में से एक है।

प्राइवेट कंपनियों को एंट्री देकर कर्नाटक का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर की एफिशिएंसी बढ़ाना और पावर सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को हल करना है। यह राज्य के एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में पावर ट्रांसमिशन सेक्टर कब प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला गया?

कर्नाटक सरकार ने पावर ट्रांसमिशन सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला है, यह BOOT मॉडल के तहत किया गया है।

HPTL और MPTL प्रोजेक्ट्स किसके द्वारा विकसित किए गए हैं?

HPTL और MPTL प्रोजेक्ट्स को REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (RECPDCL) ने स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में विकसित किया है।

प्राइवेट कंपनियों को लाइसेंस देने के लिए किसकी मंजूरी जरूरी है?

प्राइवेट कंपनियों को लाइसेंस देने के लिए कर्नाटक इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (KERC) की मंजूरी जरूरी है।

BOOT मॉडल के तहत प्राइवेट कंपनियों का क्या रोल होगा?

BOOT मॉडल के तहत प्राइवेट कंपनियां तय समय तक रेगुलेटेड टैरिफ पर इंफ्रास्ट्रक्चर को ऑपरेट करेंगी।

कर्नाटक का यह कदम किस उद्देश्य से उठाया गया है?

कर्नाटक का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर की एफिशिएंसी बढ़ाना और पावर सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को हल करना है।

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