कर्नाटक हाईकोर्ट में छह नए जजों की नियुक्ति, कुल ताकत 54 हुई
कर्नाटक हाईकोर्ट में छह नए जजों ने संभाला पद, कुल ताकत बढ़कर 54 हुई कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को छह नए अतिरिक्त जजों ने शपथ ली। इसके साथ ही कोर्ट की कुल बेंच ताकत 54 हो गई।
कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को छह नए अतिरिक्त जजों ने शपथ ली। इसके साथ ही कोर्ट की कुल बेंच ताकत 54 हो गई। नए जज हैं जस्टिस राघवेंद्र एस. श्रीवत्स, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्या आर., टी.पी. विवेकानंद, बी. प्रमोद और एच. शांति भूषण।
नए जजों का कानूनी अनुभव और विशेषज्ञता
इन छह जजों के पास कानूनी क्षेत्र में गहरा अनुभव और अलग-अलग विशेषज्ञता है।
जस्टिस राघवेंद्र एस. श्रीवत्स का जन्म 1976 में चिकबल्लापुर में हुआ। उन्होंने बेंगलुरु के यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की और नई दिल्ली के इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट से साइबर लॉ में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया। 1999 में एडवोकेट के तौर पर पंजीकरण करवाने के बाद उन्होंने चिकबल्लापुर कोर्ट, कर्नाटक हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की। जनवरी 2024 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला।
जस्टिस हेमा कुलकर्णी, जो कलबुर्गी जिले के सेडम की रहने वाली हैं, ने गुलबर्गा यूनिवर्सिटी से तीसरी रैंक के साथ कानून की डिग्री ली और बाद में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल की। 1999 में एडवोकेट के तौर पर पंजीकरण करवाने के बाद उन्होंने कलबुर्गी कोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। उन्होंने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट और डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स के लिए पैनल एडवोकेट के तौर पर भी काम किया।
जस्टिस सुब्रमण्या का जन्म 1975 में तुमकुर जिले में हुआ। उन्होंने बेंगलुरु से कॉमर्स और लॉ की डिग्री ली। 1999 में एडवोकेट बने और 2019 में राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल के तौर पर सेवा दी। उन्हें 2014 में कानूनी क्षेत्र में योगदान के लिए केम्पेगौड़ा अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
जस्टिस टी.पी. विवेकानंद का जन्म 1977 में मैसूरु जिले में हुआ। उन्होंने मंड्या से बीए और एलएलबी किया और 2000 में कानून की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने कई शहरी विकास प्राधिकरणों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए पैनल काउंसल के तौर पर काम किया, जिनमें कर्नाटक स्टेट स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन भी शामिल है।
जस्टिस बी. प्रमोद, जिनका जन्म भी 1977 में हुआ, ने बेंगलुरु के यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और 2000 में कानून की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने केंद्रीय सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं जैसे एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के लिए पैनल काउंसल के तौर पर काम किया।
जस्टिस एच. शांति भूषण का जन्म 1977 में मंड्या जिले में हुआ। उन्होंने कुवेम्पु यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया। 2005 में एडवोकेट बने और कर्नाटक हाईकोर्ट के लिए डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया के तौर पर सेवा दी। उन्होंने कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन और बैंगलोर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का प्रतिनिधित्व किया।
इसकी अहमियत
इन छह जजों की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब कर्नाटक हाईकोर्ट लंबित मामलों को निपटाने के लिए काम कर रहा है। कोर्ट की ताकत अब 54 जजों तक पहुंचने से मामलों को तेजी से निपटाने और समय पर न्याय देने में मदद मिलेगी। नए जजों की विविध पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता कोर्ट की क्षमता को और मजबूत करेगी ताकि वह अलग-अलग कानूनी मुद्दों को बेहतर तरीके से संभाल सके।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कर्नाटक हाईकोर्ट में कितने नए जजों की नियुक्ति हुई है?
कर्नाटक हाईकोर्ट में छह नए जजों की नियुक्ति हुई है।
नए जजों की कुल संख्या कितनी हो गई है?
नए जजों की नियुक्ति के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट की कुल ताकत 54 हो गई है।
नए जजों में से एक जज का नाम क्या है?
नए जजों में जस्टिस राघवेंद्र एस. श्रीवत्स का नाम है।
नए जजों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नए जजों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना और समय पर न्याय देना है।
इन जजों का कानूनी अनुभव कैसा है?
इन छह जजों के पास कानूनी क्षेत्र में गहरा अनुभव और अलग-अलग विशेषज्ञता है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में आधार कार्ड सेंटरों पर अवैध वसूली का मामला सामने आया
- 2
गाजियाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
- 3
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नवाचार कार्यशाला का आयोजन
- 4
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘फ्री थिंकर्स क्लब’ की शुरुआत
- 5
शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।