कर्नाटक सरकार ने वॉइस एआई के लिए एलेवनलैब्स से साझेदारी की
कर्नाटक सरकार ने ElevenLabs के साथ साझेदारी की है। इसका फोकस कन्नड़ वॉइस एआई, नागरिक सेवाओं और शिकायतों के निपटारे पर रहेगा।
न्यूयॉर्क की कंपनी एलेवनलैब्स ने वॉइस एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी की
कर्नाटक में हुई इस नई साझेदारी का फोकस वॉइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कन्नड़ भाषा की स्किलिंग, नागरिक सेवाओं और शिकायतों के निपटारे तक पहुंचाने पर रहेगा। इसके साथ ही जिम्मेदार एआई और आवाज़ को फिर से तैयार करने के काम में भी मदद दी जाएगी।
इस समझौता ज्ञापन पर एलेवनलैब्स के को-फाउंडर और सीईओ माती स्टानिशेव्स्की और सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को यहां हस्ताक्षर किए।
यह समझौता कर्नाटक इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी, यानी केआईटीएस के साथ किया गया है। केआईटीएस इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लिए नोडल लागू करने वाली एजेंसी है।
कन्नड़ वॉइस एआई पर फोकस
एलेवनलैब्स न्यूयॉर्क की एक कंपनी है। यह जेनरेटिव वॉइस एआई, स्पीच सिंथेसिस, वॉइस क्लोनिंग और बातचीत करने वाले एआई एजेंट्स के क्षेत्र में काम करती है।
उम्मीद है कि इस साझेदारी से स्किलिंग, नागरिक सेवाओं और शिकायतों के निपटारे में कन्नड़ भाषा में वॉइस एआई को अपनाने में मदद मिलेगी।
इस समझौते में जिम्मेदार एआई और आवाज़ को फिर से तैयार करने का काम भी शामिल होगा। इससे इस समझौते का दायरा सिर्फ आवाज़ तैयार करने वाली टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहेगा।
एक समिट में बोलते हुए स्टानिशेव्स्की ने कहा, “भारत शुरू से ही वॉइस एक्सपीरियंस के मामले में सबसे आगे रहा है और शुरुआत से ही एलेवनलैब्स की कहानी का हिस्सा रहा है।”
इस समिट में एलेवनलैब्स के आवाज़ तैयार करने से आगे बढ़कर ऐसे बातचीत करने वाले एआई की दिशा में जाने की बात भी सामने आई, जो सुन सकता है, समझ सकता है और असली दुनिया से जुड़े काम पूरे कर सकता है।
भारत कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है
कंपनी के मुताबिक, अमेरिका के बाहर भारत एलेवनलैब्स का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
देश में कारोबार करने वाली कंपनियों ने पिछले एक साल के दौरान ‘एलेवनएजेंट्स’ पर 100 मिलियन बातचीत दर्ज कीं। इनमें से 70% से ज्यादा बातचीत हिंदी, कन्नड़, तमिल और तेलुगु में हुईं।
कंपनी ने कहा कि हर महीने भारत के 25,000 से ज्यादा डेवलपर और कारोबार उसके एपीआई के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
एलेवनलैब्स का दावा है कि पिछले एक साल में यह संख्या करीब 2.5x बढ़ी है।
ये आंकड़े भारतीय भाषाओं पर कंपनी के फोकस और बातचीत करने वाले एआई के क्षेत्र में उसके विस्तार का कंपनी की ओर से बताया गया संदर्भ देते हैं।
वॉइस रिस्टोरेशन कार्यक्रम
एलेवनलैब्स ने कहा कि उसने उन लोगों की 1 मिलियन आवाज़ों को फिर से तैयार करने का काम अपने जिम्मे लिया है, जिन्होंने एएलएस यानी एमियोट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस, सेरेब्रल पाल्सी, गले के कैंसर और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी स्थितियों के कारण अपनी आवाज़ हमेशा के लिए खो दी है।
कंपनी इस काम पर एएलएस केयर एंड सपोर्ट फाउंडेशन, ऑर्गनाइजेशन फॉर रेयर डिजीजेज इंडिया, ‘यस, वी कैन’, निपमैन फाउंडेशन और द क्वांटम हब समेत कई साझेदारों के साथ काम कर रही है।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसके व्यापक इम्पैक्ट कार्यक्रम के तहत भारत में 75 से ज्यादा एनजीओ को मुफ्त टेक्नोलॉजी दी गई है।
समिट में रेडियो और एंटरटेनमेंट क्षेत्र की पूर्व प्रोफेशनल सपना राणा ने एएलएस होने के बाद बोलने की क्षमता खोने के बाद का अपना अनुभव साझा किया।
राणा ने कहा कि अपनी आवाज़ को फिर से तैयार किए जाने से वह दोबारा बातचीत कर पा रही हैं और फिर से कुछ बना पा रही हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कर्नाटक सरकार और एलेवनलैब्स की साझेदारी का फोकस क्या है?
इस साझेदारी का फोकस कन्नड़ भाषा में स्किलिंग, नागरिक सेवाओं और शिकायतों के निपटारे तक वॉइस एआई पहुंचाना है।
एलेवनलैब्स ने कर्नाटक सरकार के साथ समझौता किस एजेंसी के साथ किया है?
यह समझौता कर्नाटक इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी यानी KITS के साथ किया गया है।
भारत एलेवनलैब्स का कितना बड़ा बाजार है?
कंपनी के मुताबिक, अमेरिका के बाहर भारत एलेवनलैब्स का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
एलेवनलैब्स के वॉइस रिस्टोरेशन कार्यक्रम का मकसद क्या है?
कंपनी का मकसद ALS, सेरेब्रल पाल्सी, गले के कैंसर और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी स्थितियों के कारण आवाज़ खो चुके लोगों की आवाज़ फिर से तैयार करना है।
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