कानपुर में दशहरे पर रावण की पूजा, साल में एक बार खुलते कपाट
कानपुर के शिवाला इलाके में स्थित दशानन मंदिर देश का अनोखा मंदिर माना जाता है। यहाँ दशहरे पर रावण का पुतला जलाया नहीं जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है।
कानपुर के शिवाला इलाके में स्थित दशानन मंदिर देश का अनोखा मंदिर माना जाता है। यहाँ दशहरे पर रावण का पुतला जलाया नहीं जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। यह मंदिर कैलाश मंदिर परिसर के अंदर, फूल मंडी के पास बना है। इसे दशानन मंदिर के नाम से जाना जाता है।
मंदिर में रावण की 5 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित है। इसे शक्ति का प्रहरी माना जाता है। पूरे देश में दशहरे के मौके पर रावण दहन की परंपरा है, लेकिन इस मंदिर में रावण की विद्वता और शिवभक्ति के लिए पूजा होती है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट साल में सिर्फ एक बार, विजयादशमी के दिन ही खुलते हैं। बाकी 364 दिन मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। मान्यता है कि यहाँ मन्नत मांगने से शक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
मंदिर के निर्माण को लेकर दो मत हैं। हालांकि, मुख्य मान्यता यह है कि उन्नाव के महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने 1868 में कैलाश मंदिर के साथ इसका निर्माण करवाया था। इसके बाद दशानन मंदिर की स्थापना 1890 के आसपास करवाई गई। इस हिसाब से यह मंदिर करीब 135-158 साल पुराना है।
महाराज शिव भक्त थे। इसी वजह से उन्होंने रावण को उसके प्रकांड पंडित होने और शिव के परम भक्त होने के कारण यहाँ स्थापित करवाया। मंदिर में रावण को सिर्फ एक ऐसे पात्र के रूप में नहीं देखा जाता, जिसका दशहरे पर दहन किया जाता है, बल्कि उसकी विद्वता और शिवभक्ति को भी पूजा का आधार माना जाता है।
दशहरे के दिन सुबह लगभग 9 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। पूजा की शुरुआत रावण की मूर्ति की सफाई से होती है। इसके बाद मूर्ति का दुग्ध स्नान कराया जाता है और अभिषेक किया जाता है।
फिर रावण की प्रतिमा का भव्य श्रृंगार किया जाता है। वैदिक मंत्रों के साथ पूजा और आरती होती है। भक्त सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और “लंकापति नरेश रावण की जय” का जयकारा लगाते हैं।
शाम को रावण दहन के साथ मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद वे एक साल के लिए बंद रहते हैं। इस दिन मंदिर में दर्शन के लिए 15 से 20 हजार भक्त आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानपुर के दशानन मंदिर में रावण की पूजा क्यों होती है?
यहाँ रावण की विद्वता और शिवभक्ति के लिए पूजा होती है।
दशानन मंदिर के कपाट कब खुलते हैं?
मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार, विजयादशमी के दिन सुबह करीब 9 बजे खुलते हैं।
दशानन मंदिर में रावण की प्रतिमा कितनी ऊँची है?
मंदिर में रावण की 5 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित है।
दशहरे के दिन मंदिर में कौन-कौन सी पूजा होती है?
रावण की मूर्ति की सफाई, दुग्ध स्नान, अभिषेक, श्रृंगार, वैदिक मंत्रों के साथ पूजा और आरती होती है।
मंदिर के कपाट फिर कब बंद कर दिए जाते हैं?
शाम को रावण दहन के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और फिर एक साल बाद खुलते हैं।
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