कानपुर दक्षिण में 30 लाख आबादी का अस्पताल 7 साल से बंद
कानपुर दक्षिण की 30 लाख की आबादी के लिए बनाया गया सरकारी अस्पताल आज भी शोपीस बना हुआ है। नौबस्ता में बना 100 बेड का यह अस्पताल पूरी तरह तैयार है, लेकिन पिछले कई सालों से इसमें ताला लटका हुआ है।
कानपुर दक्षिण की 30 लाख की आबादी के लिए बनाया गया सरकारी अस्पताल आज भी शोपीस बना हुआ है। नौबस्ता में बना 100 बेड का यह अस्पताल पूरी तरह तैयार है, लेकिन पिछले कई सालों से इसमें ताला लटका हुआ है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल का लोगों को अब तक इलाज के लिए इस्तेमाल नहीं मिल पाया है।
जानकारी के मुताबिक, 4.31 करोड़ रुपये की लागत से बना यह अस्पताल 2019 में ही बनकर तैयार हो गया था। इसके बावजूद 7 साल बीत जाने के बाद भी यहां डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में मैनपावर और जरूरी संसाधन नहीं होने के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल की बिल्डिंग तैयार होने के बाद भी यहां OPD शुरू नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी महकमे स्वास्थ्य के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। लोगों के मुताबिक, 2 दर्जन से ज्यादा बार अधिकारियों का निरीक्षण हो चुका है, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
कानपुर दक्षिण की 30 लाख आबादी को इस अस्पताल से बड़ी उम्मीद थी। लोगों को लगा था कि अस्पताल शुरू होने के बाद इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन अस्पताल चालू न होने की वजह से मरीजों और उनके परिवारों को 15-20 किलोमीटर दूर हैलट या उर्सला अस्पताल जाना पड़ता है।
इलाज के लिए दूर जाना लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। वहीं, तैयार अस्पताल का इस्तेमाल नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। जनता अब सवाल पूछ रही है - आखिर कब तक करोड़ों का ये अस्पताल शोपीस बना रहेगा और कब मिलेगा गरीबों को इलाज की सौगात?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानपुर दक्षिण का सरकारी अस्पताल कब बनकर तैयार हुआ था?
नौबस्ता में बना 100 बेड का अस्पताल 2019 में 4.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ था।
अस्पताल अब तक क्यों बंद है?
अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है और मैनपावर व जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
इस अस्पताल में क्या शुरू नहीं हुआ है?
अस्पताल की इमारत तैयार होने के बावजूद यहां ओपीडी शुरू नहीं हुई है।
इलाज के लिए लोगों को कहां जाना पड़ता है?
अस्पताल बंद होने के कारण मरीजों और उनके परिवारों को 15 से 20 किलोमीटर दूर हैलट या उर्सला अस्पताल जाना पड़ता है।
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