टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार, जो 40 साल से ममता बनर्जी की करीबी रही हैं, अब पार्टी में बगावत का नेतृत्व कर रही हैं।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार, जो 40 साल से ममता बनर्जी की करीबी रही हैं, अब पार्टी में बगावत का नेतृत्व कर रही हैं।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम माना जा रहा है।

Kakoli Ghosh Dastidar, TMC leader, in a dramatic political s · NewsDarpan AI
टीएमसी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार, जो करीब 40 साल से ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती हैं, अब पार्टी के अंदर बगावत की कमान संभाल रही हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अंदर इसे एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। काकोली घोष दस्तीदार ने लंबे समय तक ममता बनर्जी का साथ दिया और पार्टी के कई अहम फैसलों में उनके साथ खड़ी रहीं। लेकिन अब उनका यह कदम पार्टी नेतृत्व के लिए चौंकाने वाला है।
सूत्रों के मुताबिक यह बगावत ऐसे समय पर सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी और NCPI के बीच संभावित विलय की चर्चा चल रही है। हालांकि विलय की बातचीत के पूरे ब्यौरे अभी साफ नहीं हैं, लेकिन काकोली घोष दस्तीदार के इस रुख ने हालात को और पेचीदा बना दिया है। सालों तक पार्टी नेतृत्व का बिना शर्त समर्थन करने के बाद उनका यह फैसला उनकी राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने टीएमसी की आगे की रणनीति और क्षेत्र की दूसरी पार्टियों के साथ उसके रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल काकोली घोष दस्तीदार या टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस बगावत को पश्चिम बंगाल की सियासत में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।