एमपी 2013 एसआई भर्ती की मेरिट लिस्ट दोबारा बनेगी, हाईकोर्ट का आदेश
मध्य प्रदेश की वर्ष 2013 की सूबेदार, सब-इंस्पेक्टर (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती की मेरिट सूची अब दोबारा बनेगी। करीब 10 साल बाद 2013 SI भर्ती से जुड़ा पुराना विवाद फिर खुला है।
मध्य प्रदेश की वर्ष 2013 की सूबेदार, सब-इंस्पेक्टर (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती की मेरिट सूची अब दोबारा बनेगी। करीब 10 साल बाद 2013 SI भर्ती से जुड़ा पुराना विवाद फिर खुला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2015 को जारी अंतिम मेरिट सूची के विवादित हिस्से को रद्द कर दिया है और 12 सप्ताह में नई मेरिट सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मुख्य रूप से आयु सीमा में छूट लेकर अनारक्षित पदों पर चयन से जुड़ा था। छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने भर्ती नियमों को अहम माना। कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत जिस उम्मीदवार ने किसी प्रकार की छूट लेकर पात्रता हासिल की है, उसे उसी आधार पर अनारक्षित पद पर चयन का लाभ नहीं दिया जा सकता।
यानी विवाद उन उम्मीदवारों को लेकर था, जिन्हें आरक्षित वर्ग से जुड़ी आयु सीमा में छूट का लाभ मिला था, लेकिन बाद में उन्हें अनारक्षित पदों पर समायोजित किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस वजह से उनकी मेरिट और पद आवंटन पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने 162 अंक हासिल किए थे। उनका कहना था कि वे संबंधित SI पद की कटऑफ से महज एक अंक पीछे रह गए थे। उनकी पहली प्राथमिकता जिला पुलिस बल का SI पद था, लेकिन मेरिट और पद आवंटन के बाद उन्हें प्लाटून कमांडर पद मिला।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट का लाभ मिलने के बावजूद अनारक्षित पदों पर समायोजित कर दिया गया। उनके मुताबिक, इसी समायोजन के कारण उनकी मेरिट प्रभावित हुई और उन्हें उनकी पहली प्राथमिकता वाला पद नहीं मिल सका।
हाईकोर्ट ने 2013 के भर्ती नियमों के प्रावधानों को महत्वपूर्ण माना है। कोर्ट ने विवादित अनारक्षित समायोजन को हटाने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट ने पूरी भर्ती को रद्द नहीं किया है। कोर्ट ने संबंधित उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी रद्द नहीं की हैं। आदेश केवल अनारक्षित पदों पर हुए विवादित समायोजन की दोबारा समीक्षा से जुड़ा है।
अब राज्य और चयन बोर्ड को नियमों, उम्मीदवारों की पात्रता, मेरिट और पद प्राथमिकता के आधार पर नई सूची तैयार करनी होगी। नई मेरिट सूची में पद आवंटन की स्थिति फिर से देखी जाएगी। इस प्रक्रिया में उन अभ्यर्थियों की स्थिति बदल सकती है, जिनका दावा 162 अंक और संबंधित SI पद की कटऑफ से एक अंक पीछे रहने से जुड़ा था।
कोर्ट के आदेश के बाद करीब दस साल पुराने इस भर्ती विवाद में प्रभावित अभ्यर्थियों की पद स्थिति एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है। इस तरह “10 साल बाद खुला 2013 SI भर्ती का पन्ना, हाईकोर्ट के आदेश से फिर बनेगी मेरिट” वाली स्थिति अब औपचारिक आदेश के बाद आगे बढ़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एमपी 2013 SI भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
जबलपुर हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2015 की अंतिम मेरिट लिस्ट के विवादित हिस्से को रद्द कर दिया है और 12 हफ्ते में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया है।
यह विवाद किस बात को लेकर था?
विवाद उन उम्मीदवारों को लेकर था जिन्हें आरक्षित वर्ग की आयु सीमा में छूट मिली थी, लेकिन बाद में उन्हें अनारक्षित पदों पर समायोजित किया गया।
क्या हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती रद्द कर दी है?
नहीं, कोर्ट ने पूरी भर्ती रद्द नहीं की है। संबंधित उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी रद्द नहीं की गई हैं। आदेश सिर्फ विवादित अनारक्षित समायोजन की दोबारा समीक्षा से जुड़ा है।
अब नई मेरिट लिस्ट कैसे बनेगी?
राज्य और चयन बोर्ड को भर्ती नियमों, उम्मीदवारों की पात्रता, मेरिट और पद प्राथमिकता के आधार पर नई सूची तैयार करनी होगी।
याचिकाकर्ताओं का दावा क्या था?
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके 162 अंक थे और वे संबंधित SI पद की कटऑफ से सिर्फ एक अंक पीछे थे। उनका दावा था कि विवादित समायोजन की वजह से उन्हें पहली पसंद वाला SI पद नहीं मिला।
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