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National Official source जम्मू और कश्मीर

हाई कोर्ट ने आजाद-रैना के सरकारी आवास पर मांगी कानूनी वजह

श्रीनगर, 15 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने राजनीतिक लोगों को सरकारी आवास अपने पास रखने की इजाजत देने वाली एक समान नीति की जानकारी मांगी है।

हाई कोर्ट ने आजाद-रैना के सरकारी आवास पर मांगी कानूनी वजह
Image credit: News Darpan Team

श्रीनगर, 15 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने राजनीतिक लोगों को सरकारी आवास अपने पास रखने की इजाजत देने वाली एक समान नीति की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और पूर्व बीजेपी जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष रविंदर रैना को सरकारी आवास मार्च 2027 या अगली समीक्षा तक, इनमें से जो पहले हो, तब तक अपने पास रखने की अनुमति किस कानूनी अधिकार के तहत दी गई।

यह आदेश चीफ जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस राजेश शेखरी की डिवीजन बेंच ने 12 अक्टूबर को दिया। बेंच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका प्रो. एस के भल्ला ने दायर की है और इसका नंबर WP(C)PIL No. 17/2020 है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि सरकारी आवास पर अनधिकृत कब्जे को सुरक्षा के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता। वकील ने कोर्ट के 26 दिसंबर 2022 के एक पुराने आदेश का भी हवाला दिया। उस आदेश में कोर्ट ने सरकारी संपत्तियों पर कब्जा रखने वाले लोगों को इसी आधार पर बेदखली से संरक्षण देने से इनकार किया था।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने कोर्ट को बताया कि आजाद और रैना के आवास बनाए रखने से जुड़े मामलों पर एक नामित कमेटी ने विचार किया था। यह बैठक 14 अगस्त 2026 को हुई थी।

मो‍निका कोहली ने बताया कि कमेटी ने दोनों आवासों का आवंटन जारी रखने की सिफारिश की। इसके बाद कमेटी की सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी के सामने रखी गईं। सक्षम प्राधिकारी ने दोनों राजनीतिक लोगों को अपने सरकारी आवास मार्च 2027 या अगली समीक्षा तक रखने की अनुमति दे दी। आदेश में साफ है कि इनमें से जो समय पहले आएगा, वही लागू होगा।

इसके बाद डिवीजन बेंच ने सरकार से पूछा कि राजनीतिक लोगों को सरकारी आवास बनाए रखने के मामले में कौन-सी समान नीति लागू है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि नामित कमेटी को यह तय करने का अधिकार किस आधार पर मिला कि सरकारी आवास जारी रखा जाना चाहिए या नहीं।

सरकार की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन लागू समान नीति के बारे में जानकारी देने और कोर्ट की ओर से उठाए गए सवालों पर सहायता करने वाला उचित हलफनामा दाखिल करेगा।

कोर्ट ने सरकार का अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर 2026 को तय की। इस आदेश से फिलहाल आजाद या रैना का मौजूदा आवंटन रद्द नहीं हुआ है। कोर्ट ने दोनों में से किसी को तत्काल सरकारी आवास खाली करने का निर्देश भी नहीं दिया है। आदेश का उद्देश्य प्रशासन से उस नीति और अधिकार के बारे में स्पष्टीकरण लेना है, जिसके आधार पर दोनों को आवास बनाए रखने की अनुमति दी गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाई कोर्ट ने सरकार से क्या जानकारी मांगी?

कोर्ट ने राजनीतिक लोगों को सरकारी आवास देने की समान नीति और गुलाम नबी आजाद व रविंदर रैना को आवास रखने की कानूनी वजह बताने को कहा।

आजाद और रैना को सरकारी आवास कब तक रखने की अनुमति है?

उन्हें मार्च 2027 या अगली समीक्षा तक आवास रखने की अनुमति है। इनमें से जो समय पहले आएगा, वही लागू होगा।

यह अनुमति किसने दी?

नामित कमेटी ने दोनों आवासों का आवंटन जारी रखने की सिफारिश की थी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने अनुमति दी।

इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?

मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर 2026 को होगी।

क्या कोर्ट ने आजाद या रैना को आवास खाली करने का आदेश दिया है?

नहीं, कोर्ट ने मौजूदा आवंटन रद्द नहीं किया है और दोनों में से किसी को तुरंत आवास खाली करने को नहीं कहा है।

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