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The Success Story: डेंटिस्ट से आईपीएस तक, अजय पाल शर्मा का हौसले की कहानी

आईपीएस अजय पाल शर्मा की कहानी एक डेंटिस्ट से पुलिस अधिकारी बनने तक के संघर्ष और हौसले की मिसाल है।

डेंटिस्ट से आईपीएस तक, अजय पाल शर्मा का हौसले की कहानी
Image credit: News Darpan Team

आईपीएस अजय पाल शर्मा की कहानी एक डेंटिस्ट से पुलिस अधिकारी बनने तक के संघर्ष और हौसले की मिसाल है। पंजाब के लुधियाना में 26 अक्टूबर 1985 को जन्मे अजय पाल शर्मा ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज पटियाला से बीडीएस की डिग्री हासिल की और डेंटल सर्जन के तौर पर अपना करियर शुरू किया। लेकिन एक आरामदायक और सम्मानजनक मेडिकल करियर छोड़कर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का फैसला किया। 2009 में पहली कोशिश में इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन सफल नहीं हो सके। हार न मानते हुए उन्होंने दोबारा मेहनत की और 2011 में ऑल इंडिया रैंक 160 हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में चयन हुआ। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।

अजय पाल शर्मा के परिवार में शिक्षा और अनुशासन को बहुत अहमियत दी जाती थी। उनके पिता अमरजीत शर्मा सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। खास बात यह है कि उनके छोटे भाई अमित पाल शर्मा ने भी यूपीएससी में 17वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनकर नाम कमाया। लुधियाना के लोग दोनों भाइयों को सादगी और पढ़ाई के प्रति गंभीरता के लिए याद करते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों साइकिल से इलाके में घूमते थे और अपने लक्ष्य को लेकर बेहद फोकस रहते थे।

आईपीएस बनने के बाद अजय पाल शर्मा ने उत्तर प्रदेश के कई चुनौतीपूर्ण जिलों में पोस्टिंग संभाली। शामली, रामपुर, नोएडा और जौनपुर जैसे इलाकों में उनकी सख्त पुलिसिंग ने उन्हें खास पहचान दिलाई। शामली में कैराना और आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ी हुई थी। उनके नेतृत्व में पुलिस ने अपराधियों और अवैध हथियारों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए। एक कार्रवाई में 203 हथियार बरामद किए गए और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ। कुख्यात अपराधी फुरकान को पकड़ने के लिए चलाए गए ऑपरेशन में मुठभेड़ के दौरान वह घायल हुआ और उसके गैंग के करीब 20 सदस्य गिरफ्तार हुए। इन्हीं कार्रवाइयों के बाद उन्हें एनकाउंटर कॉप के तौर पर पहचाना जाने लगा।

रामपुर में उनकी पोस्टिंग के दौरान 2019 में एक नाबालिग बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या के मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। मुठभेड़ में आरोपी के पैरों में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया और मीडिया में उन्हें यूपी का सिंघम और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाने लगा। रामपुर में पुलिस के दबाव के चलते 146 वांछित आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। जौनपुर में एसपी के तौर पर लगभग 22 महीने के कार्यकाल में उनके नेतृत्व में 136 पुलिस मुठभेड़ों की संख्या मीडिया रिपोर्टों में सामने आई। पूरे करियर में उनके नाम से 500 से ज्यादा पुलिस मुठभेड़ों का जिक्र कई रिपोर्टों में हुआ है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि इतने लोग मारे गए।

2020 में कई आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ जांच में अजय पाल शर्मा का नाम भी आया और उन्हें रामपुर से हटाया गया। उन्होंने आरोपों से इनकार किया था। बाद की रिपोर्टों में विभागीय जांच समाप्त होने और क्लीन चिट मिलने के बाद जनवरी 2025 में उनके डीआईजी पद पर प्रमोशन की खबर आई। प्रयागराज में उन्हें महाकुंभ 2025 की पुलिस व्यवस्था में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और नोडल अधिकारी की अहम जिम्मेदारी मिली। अप्रैल 2026 में वह फिर सुर्खियों में आए जब चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दक्षिण 24 परगना में पुलिस ऑब्जर्वर बनाया। एक वायरल वीडियो में वह तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थकों को मतदाताओं को धमकाने के मामले में सख्त चेतावनी देते दिखे, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

अजय पाल शर्मा की कहानी सिर्फ एनकाउंटर के आंकड़ों की नहीं है। यह असफलता के बाद उठने, बना-बनाया करियर छोड़कर नया रास्ता चुनने और लगातार मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा है। डेंटिस्ट की कुर्सी से आईपीएस की वर्दी तक पहुंचने का यह सफर दिखाता है कि अगर लक्ष्य साफ हो और हौसला बुलंद हो तो रास्ते बदलने से डरना नहीं चाहिए। आज वह प्रयागराज में वरिष्ठ पुलिस जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और उनका करियर युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि सफलता उसे मिलती है जो गिरने के बाद फिर उठता है और आगे बढ़ता रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजय पाल शर्मा पहले क्या करते थे और फिर आईपीएस कैसे बने?

अजय पाल शर्मा ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज पटियाला से बीडीएस की डिग्री लेकर डेंटल सर्जन के तौर पर शुरुआत की। लेकिन आरामदायक करियर छोड़कर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की। 2009 में पहली कोशिश में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर 2011 में ऑल इंडिया रैंक 160 के साथ आईपीएस में चयन हुआ।

शामली में अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से क्या हुआ?

शामली में कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस ने अपराधियों और अवैध हथियारों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए। एक ऑपरेशन में 203 हथियार बरामद किए गए, हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ, और कुख्यात अपराधी फुरकान के गैंग के करीब 20 सदस्य गिरफ्तार हुए।

जौनपुर में एसपी के तौर पर उनके कार्यकाल में क्या हुआ?

जौनपुर में लगभग 22 महीने के कार्यकाल में उनके नेतृत्व में 136 पुलिस मुठभेड़ें हुईं। पूरे करियर में उनके नाम से 500 से ज्यादा पुलिस मुठभेड़ों का जिक्र आया है।

2020 में अजय पाल शर्मा को क्या हुआ?

2020 में कई आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ जांच में उनका नाम भी आया और उन्हें रामपुर से हटाया गया। बाद में विभागीय जांच समाप्त होने के बाद जनवरी 2025 में उन्हें डीआईजी पद पर प्रमोशन मिला।

अजय पाल शर्मा के भाई ने क्या हासिल किया?

उनके छोटे भाई अमित पाल शर्मा ने यूपीएससी में 17वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनकर नाम कमाया। दोनों भाई सादगी और पढ़ाई के प्रति गंभीरता के लिए जाने जाते हैं।

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