इंदौर के 125 व्यापारिक संगठनों ने तय किया, एमडीआर लगा तो हटाएंगे क्यूआर
इंदौर के व्यापारियों ने ₹2000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित MDR सरचार्ज के विरोध में बड़ा फैसला लिया है।
इंदौर के व्यापारियों ने ₹2000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित MDR सरचार्ज के विरोध में बड़ा फैसला लिया है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े 125 व्यापारिक संगठनों ने तय किया है कि सरचार्ज लागू होते ही दुकानों और प्रतिष्ठानों से UPI QR कोड हटा दिए जाएंगे। इसके बाद व्यापारी नगद कारोबार अपनाएंगे।
व्यापारियों का कहना है कि अगर उन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, तो वे भुगतान का माध्यम भी बदल देंगे। व्यापारियों ने साफ किया है कि व्यापार की लागत बढ़ाने वाला कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका यह विरोध अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाजारों में भी दिखाई देगा।
यह सामूहिक फैसला अभिनव कला समाज के हॉल परिसर में शुक्रवार को हुई बैठक में लिया गया। बैठक की अगुवाई अहिल्या चेम्बर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और महामंत्री गोपाल दास अग्रवाल ने की। इसमें चेम्बर्स से जुड़े 125 व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित सरचार्ज के विरोध में एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि शुल्क किसी भी राशि या तारीख से लागू किया जाए, व्यापारी उसी दिन से QR कोड हटाने के सामूहिक फैसले पर अमल करेंगे। यानी सरचार्ज लागू होने की स्थिति में दुकानों पर डिजिटल भुगतान के लिए लगे QR कोड हटाए जाएंगे और नगद भुगतान का विकल्प अपनाया जाएगा।
व्यापारियों ने इस फैसले के जरिए यह संदेश दिया है कि अतिरिक्त लागत का बोझ वे अपने कारोबार पर नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि भुगतान का माध्यम चुनना व्यापारी की व्यावसायिक परिस्थितियों और लागत से जुड़ा विषय है। इसलिए सरचार्ज के विरोध में नगद व्यवहार अपनाना उनका सामूहिक निर्णय है।
अहिल्या चेम्बर्स के संयुक्त सचिव और इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि 23 सितंबर को आयोजित नो UPI डे के जरिए इंदौर के व्यापारियों ने सरचार्ज के विरोध में देशभर तक संदेश पहुंचाया था। अब 125 व्यापारिक संगठनों का साझा फैसला इस आंदोलन को अगले चरण में ले जाएगा।
अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारी पहले ही प्रतिस्पर्धा, बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ उनके आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अतिरिक्त लागत व्यापारी को ही उठानी पड़ेगी, तो वह उस भुगतान माध्यम को क्यों अपनाए, जिस पर उसे शुल्क देना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारी किस माध्यम से भुगतान स्वीकार करेगा, यह उसके कारोबार की परिस्थितियों और लागत से जुड़ा मामला है। सरचार्ज के विरोध में नगद व्यवहार का विकल्प अपनाना व्यापारियों का साझा फैसला है। अब जरूरत है कि सभी व्यापारिक संगठन इस फैसले पर एकजुट रहें, ताकि व्यापारियों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सके।
इस निर्णय को बाजारों तक पहुंचाने के लिए अहिल्या चेम्बर्स के पदाधिकारी अगले पांच दिनों तक इंदौर के अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान व्यापारियों को प्रस्तावित सरचार्ज के प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें सामूहिक निर्णय के समर्थन में लामबंद किया जाएगा।
चेम्बर्स के पदाधिकारी बाजारों में व्यापारियों से संपर्क कर इस फैसले की जानकारी देंगे। पांच दिन तक चलने वाले इस जनसंपर्क अभियान का मकसद व्यापारिक संगठनों के साझा निर्णय को बाजार स्तर तक पहुंचाना है। संगठन चाहता है कि सरचार्ज के विरोध में सभी व्यापारी एकजुट रहें और फैसले पर साथ खड़े हों।
बैठक से निकला संदेश यह है कि व्यापारी अपना विरोध केवल ज्ञापन और नारों तक सीमित नहीं रखना चाहते। सरचार्ज लागू होने की स्थिति में QR कोड हटाकर नगद कारोबार अपनाने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा है। चेम्बर्स पदाधिकारियों ने कहा कि व्यापारी हितों की रक्षा के लिए यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
बैठक में रमेश खंडेलवाल, गोपाल दास अग्रवाल, अक्षय जैन, गोविंद अग्रवाल, नरेंद्र बाफना, रजनीश चोरड़िया, हरदीप सिंह, मनीष निगम, सुशील मेहता, कैलाश खंडेलवाल, मनोज काला, चंद्रशेखर खन्ना, बसंत सोनी, प्रदीप जैन, पुरषोत्तम शर्मा महेंद्र जैन सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंदौर के व्यापारियों ने क्या फैसला लिया है?
₹2000 से अधिक के UPI लेन-देन पर MDR सरचार्ज लागू होने पर दुकानों और प्रतिष्ठानों से QR कोड हटाने का फैसला लिया है।
इस फैसले में कितने व्यापारिक संगठन शामिल हैं?
अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े 125 व्यापारिक संगठनों ने यह फैसला लिया है।
QR कोड हटाने के बाद व्यापारी कौन सा भुगतान विकल्प अपनाएंगे?
QR कोड हटाने के बाद व्यापारी नगद भुगतान का विकल्प अपनाएंगे।
व्यापारियों ने यह फैसला क्यों लिया?
व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ वे अपने कारोबार पर नहीं लेना चाहते।
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