इंडोनेशिया के अनंबास द्वीपों पर प्लास्टिक प्रदूषण का संकट बढ़ा
प्लास्टिक से घुट रहे इंडोनेशिया के द्वीप, पॉलिसी और नियमों का कमजोर अमल इंडोनेशिया के अनंबास द्वीप प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते संकट से जूझ रहे हैं।
प्लास्टिक से घुट रहे इंडोनेशिया के द्वीप, पॉलिसी और नियमों का कमजोर अमल
इंडोनेशिया के अनंबास द्वीप प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते संकट से जूझ रहे हैं। यहां छोड़े गए "घोस्ट नेट्स" और दूसरा कचरा समुद्री जीवन को खतरे में डाल रहा है और स्थानीय लोगों पर सफाई का दबाव बढ़ा रहा है। ये मछली पकड़ने वाले जाल अक्सर पड़ोसी देशों के जहाजों द्वारा फेंके जाते हैं।
यायासन अनंबास की प्रमुख देविना मारिस्कोवा ने इन जालों के विनाशकारी असर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ये अक्सर कछुओं जैसे बड़े समुद्री जीवों को फंसा लेते हैं। नियमों और उनके अमल की कमी के चलते जिम्मेदारों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
ये समस्या एशिया और दूसरे विकासशील इलाकों की बड़ी चुनौती को दिखाती है, जहां बढ़ती खपत, लंबे समुद्र तट और कमजोर कचरा प्रबंधन सिस्टम की वजह से हर साल लाखों टन प्लास्टिक नदियों, समुद्रों और महासागरों में पहुंच जाता है।
ग्रीनपीस मलेशिया की जीरो-वेस्ट कैंपेनर डनक्सिन वेंग ने कहा, "प्रदूषण की कोई सीमा नहीं होती और यह प्लास्टिक और दूसरे कचरे की लहर हमारे तटों तक लाता रहेगा।" फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया हर साल 6.8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पैदा करता है, जिसमें से करीब 6.2 लाख टन समुद्री पर्यावरण में पहुंच जाता है।
इस सीमा-पार पर्यावरण संकट से निपटने के लिए मजबूत नियम और जवाबदेही की जरूरत है ताकि नाजुक समुद्री जीवन और तटीय समुदायों की रक्षा की जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंबास द्वीपों पर प्लास्टिक प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
अनंबास द्वीपों पर प्लास्टिक प्रदूषण का मुख्य कारण 'घोस्ट नेट्स' और अन्य कचरा है, जो समुद्री जीवन को खतरे में डाल रहा है।
इंडोनेशिया हर साल कितना प्लास्टिक कचरा पैदा करता है?
इंडोनेशिया हर साल 6.8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पैदा करता है।
इस प्रदूषण से निपटने के लिए क्या जरूरी है?
इस प्रदूषण से निपटने के लिए मजबूत नियम और जवाबदेही की जरूरत है।
प्रदूषण का समुद्री जीवन पर क्या असर है?
प्रदूषण का समुद्री जीवन पर विनाशकारी असर है, खासकर बड़े जीवों जैसे कछुओं पर।
स्थानीय लोगों पर इस समस्या का क्या असर पड़ रहा है?
स्थानीय लोगों पर सफाई का दबाव बढ़ रहा है।
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