जम्मू-कश्मीर पर पाक-ईयू के बयान को भारत ने किया खारिज, कहा- 'कोई अधिकार नहीं'
भारत ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने पर कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि यह देश का आंतरिक मामला है।
भारत ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) के एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस बयान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में शामिल किया गया था। नई दिल्ली ने इसे सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान और ईयू को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी भी बाहरी टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारतीय अधिकारियों ने इस बयान को 'अस्वीकार्य' बताया और जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।
यह बयान इस्लामाबाद में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के बीच हुई बातचीत के बाद जारी किया गया था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बाहरी पक्षों को ऐसे संवेदनशील मामलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
इस घटनाक्रम ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना दिया है। साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि यूरोपीय संघ ने इस तरह के विवादास्पद मुद्दे को अपने बयान में क्यों शामिल किया।
भारत ने एक बार फिर अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी जमीन और अधिकारों पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने पाकिस्तान और ईयू के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भारत ने इस बयान को कड़ी आपत्ति जताते हुए खारिज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत का क्या कहना है?
भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न हिस्सा है और बाहरी टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत ने इस विवादास्पद मुद्दे पर क्यों प्रतिक्रिया दी?
भारत ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया है।
पाकिस्तान और ईयू के बीच बातचीत का क्या विषय था?
इस बातचीत में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई थी, जिसमें जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र था।
भारत ने किस बात पर जोर दिया है?
भारत ने जोर देकर कहा कि बाहरी पक्षों को संवेदनशील मामलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
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