आईआईटी-हैदराबाद ने QS रैंकिंग में 76 पायदान की छलांग लगाई
आईआईटी-हैदराबाद ने QS वर्ल्ड रैंकिंग में 76 पायदान की छलांग लगाई हैदराबाद: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIT-H) ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अपनी अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई
हैदराबाद: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIT-H) ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अपनी अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगाई है। संस्थान 664वें स्थान से 76 पायदान ऊपर चढ़कर 588वें स्थान पर पहुंच गया है। गुरुवार को जारी इस रैंकिंग में रिसर्च और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन को इस उपलब्धि के मुख्य कारण बताया गया है। संस्थान ने सस्टेनेबिलिटी और एकेडमिक रेप्युटेशन में भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसमें रिसर्च साइटेशन इसका सबसे मजबूत पहलू रहा।
IIT-H के रिसर्च साइटेशन मेट्रिक ने इस साल बेहतरीन प्रदर्शन किया, जो यह दिखाता है कि संस्थान के पब्लिश किए गए काम को ग्लोबल लेवल पर कितनी बार रेफर किया गया। संस्थान के QS रैंकिंग नोडल कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर सौरभ शांडिल्य ने कहा, "हमारा सबसे मजबूत पैरामीटर अब भी साइटेशन पर फैकल्टी है।" उन्होंने यह भी बताया कि IIT-H तेजी से भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते टेक्नोलॉजी संस्थानों में से एक बन रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रिसर्च कोलैबोरेशन ने भी रैंकिंग सुधारने में अहम भूमिका निभाई। संस्थान इस समय कई अहम प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जिनमें 6G कम्युनिकेशन, ऑटोनॉमस नेविगेशन, सेमीकंडक्टर्स, एआई-इंबेडेड इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्मार्ट मोबिलिटी शामिल हैं। इसके अलावा, जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के साथ संस्थान की पुरानी साझेदारी ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को मजबूत किया है। इस साझेदारी के तहत जॉइंट रिसर्च, फैकल्टी एक्सचेंज और जापानी फंडिंग तक पहुंच संभव हुई है। यूरोप और अमेरिका के विश्वविद्यालयों के साथ भी कोलैबोरेशन बढ़ाने पर काम चल रहा है।
IIT-H के डायरेक्टर प्रोफेसर बीएस मूर्ति ने इस सफलता का श्रेय संस्थान के फैकल्टी और छात्रों की मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, "यह हमारे शानदार फैकल्टी और बेहतरीन छात्रों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रैंकिंग ही संस्थान का अंतिम लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा, "रैंकिंग जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि यह रैंकिंग किस चीज का परिणाम है।"
संस्थान फिलहाल प्रोडक्ट-बेस्ड पीएचडी को बढ़ावा देने पर फोकस कर रहा है। इस मॉडल में इंडस्ट्री सीधे रिसर्च स्कॉलर्स को फंड करती है ताकि वे खास प्रोडक्ट्स डेवलप कर सकें। इस साल IIT-H ने पहली बार ऐसे 25 पद शुरू किए हैं। प्रोफेसर मूर्ति ने इस पहल को बेहद अहम बताते हुए कहा, "भारत को ऐसे बिल्डर्स की जरूरत है जो टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स बनाकर देश को आत्मनिर्भर बना सकें और एक विकसित भारत की ओर योगदान दे सकें।"
सस्टेनेबिलिटी भी IIT-H की रैंकिंग में सुधार का एक बड़ा कारण रहा है। संस्थान ने सोलर पावर जेनरेशन, कैंपस शटल सर्विस और साइकिल सब्सिडी स्कीम जैसे कई कदम उठाए हैं। साइकिल सब्सिडी स्कीम के तहत संस्थान छात्रों को साइकिल खरीदने की लागत का आधा हिस्सा देता है। इन प्रयासों की देखरेख के लिए एक ग्रीन ऑफिस बनाया गया है, जो कैंपस में पौधारोपण अभियान भी चलाता है।
आगे की योजनाओं में IIT-H का फोकस ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और फैकल्टी को आकर्षित करने पर है। यह भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए ग्लोबल पहचान बनाने का एक अहम पहलू है। हाल ही में संस्थान ने फ्रांस में एक इवेंट के दौरान अपने तीन स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजीज को पेश किया। इस इवेंट में भारत के 130 उच्च शिक्षा संस्थानों की इनोवेशन को करीब 2,500 इन्वेस्टर्स और कॉरपोरेट्स के सामने पेश किया गया। इस इवेंट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति ने किया।
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