राजेश धर्माणी ने मजदूरों के लिए मजबूत श्रम कानूनों पर जोर दिया
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के घुमारवीं में आयोजित प्रदेश इंटक की बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के घुमारवीं में आयोजित प्रदेश इंटक की बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा देना सरकार और श्रमिक संगठनों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मजदूरों के हित में मजबूत श्रम कानूनों की जरूरत पर जोर दिया।
राजेश धर्माणी आज घुमारवीं में आयोजित हिमाचल प्रदेश इंटक की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में श्रमिकों से जुड़े मुद्दों, उनके अधिकारों, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच लगातार बेहतर तालमेल जरूरी है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि श्रम कल्याण बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के कामगारों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पात्र श्रमिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ट्रेड यूनियनें कामगारों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उन्हें लाभ दिलाने में मदद कर सकती हैं।
राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय से मजदूरों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कामगारों से जुड़े मामलों को समझने और उनके समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा। इससे पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिलाने और उनकी समस्याओं को सामने लाने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि श्रम कानूनों में किसी भी तरह का बदलाव करते समय श्रमिकों के हितों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रोजगार की सुरक्षा, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे श्रमिकों के लिए बेहद जरूरी हैं। श्रम कानूनों में बदलाव के दौरान इन सभी बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कानूनों में बदलाव का असर मजदूरों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कौशल विकास और भविष्य की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जाना चाहिए। कामगारों का कल्याण केवल उनके रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों से जुड़े इन मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार, ट्रेड यूनियनों और अन्य संबंधित संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। इस मौके पर उन्होंने श्रीलंका और नेपाल से आए अधिकारियों तथा श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का हिमाचल प्रदेश की धरती पर स्वागत किया।
राजेश धर्माणी ने कहा कि विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का हिमाचल के श्रम कल्याण मॉडल को समझने के लिए यहां आना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। इससे विभिन्न देशों को श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के क्षेत्र में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश इंटक श्रम कल्याण बोर्ड के माध्यम से पात्र कामगारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर, इंटक के प्रदेश अध्यक्ष एवं नालागढ़ के विधायक बावा हरदीप सिंह, बिहार इंटक के अध्यक्ष सी.पी. सिंह, जगत राम शर्मा, इंटक महासचिव उमेश शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजेश धर्माणी ने मजदूरों के लिए किस बात पर जोर दिया?
उन्होंने मजदूरों के हित में मजबूत श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
राजेश धर्माणी ने श्रमिक संगठनों की क्या भूमिका बताई?
उन्होंने कहा कि श्रमिक संगठन कामगारों तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उन्हें लाभ दिलाने में मदद कर सकते हैं।
चार श्रम संहिताओं को लेकर राजेश धर्माणी का क्या कहना था?
उन्होंने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताएं बनाने का विरोध किया और मजदूरों के अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही।
असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए क्या जरूरत बताई गई?
उन्होंने असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने और उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास व कौशल विकास पर ध्यान देने की बात कही।
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