बिलासपुर में 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का समापन
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दधोल में आयोजित दो दिवसीय 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का समापन हो गया।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दधोल में आयोजित दो दिवसीय 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का समापन हो गया। समापन समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बतौर मुख्यातिथि हिस्सा लिया। उन्होंने विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों की ओर से तैयार और प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक मॉडलों का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद भी किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत वैज्ञानिक मॉडलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन मॉडलों में विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, अध्ययन और व्यावहारिक सोच साफ दिखाई देती है। उनके मुताबिक, बच्चों ने अपने आसपास की समस्याओं और उनके संभावित समाधानों को समझने की कोशिश की है। इससे यह भी पता चलता है कि विद्यार्थियों में समाज के प्रति संवेदनशीलता और वैज्ञानिक समझ विकसित हो रही है।
राजेश धर्माणी ने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने का सशक्त मंच है। ऐसे आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को अपनी सोच को मॉडल और गतिविधियों के माध्यम से सामने रखने का मौका मिलता है। इससे उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ किसी समस्या को समझने और उसका समाधान तलाशने की दिशा में भी काम करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास मौजूद समस्याओं को ध्यान से समझें। इसके बाद उन समस्याओं के कारणों का विश्लेषण करें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर उनके समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ें। मंत्री ने कहा कि बच्चों की ओर से बनाए गए मॉडल यह दिखाते हैं कि वे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने आसपास की परिस्थितियों को देखकर उनके बारे में सोच भी रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि विज्ञान केवल तथ्यों को याद करने का विषय नहीं है। विज्ञान प्रत्येक घटना और परिस्थिति के पीछे छिपे कारणों को समझने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में क्या, क्यों, कब और कैसे जैसे सवाल पूछने की जिज्ञासा विकसित होनी चाहिए। किसी भी बात को बिना जांचे-परखे स्वीकार करने के बजाय उसके पीछे के तर्क और प्रमाण को समझना जरूरी है।
राजेश धर्माणी के मुताबिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विद्यार्थियों को किसी तथ्य को सवालों और प्रमाण के आधार पर समझने के लिए प्रेरित करता है। यही जिज्ञासा आगे चलकर अनुसंधान, आविष्कार और तकनीकी विकास की बुनियाद बनती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सवाल पूछने, अपनी सोच विकसित करने और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश आधुनिक सुविधाएं वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास का परिणाम हैं। जल शुद्धिकरण में फिल्ट्रेशन, अल्ट्रावायलेट तकनीक, ओजोन तकनीक और रिवर्स ऑस्मोसिस जैसी प्रक्रियाएं इसके उदाहरण हैं। इन तकनीकों के जरिए पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया गया है।
मंत्री ने कम बिजली खपत में बेहतर प्रकाश देने वाली एलईडी तकनीक का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास ने रोजमर्रा के जीवन को कई तरह से आसान बनाया है। चिकित्सा क्षेत्र में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों ने रोगों की पहचान और उपचार की संभावनाओं को व्यापक बनाया है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक की उपयोगिता समझाई।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से अपनी रुचि और क्षमता को पहचानकर भविष्य के विषयों और करियर का चयन सोच-समझकर करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दूसरों की देखा-देखी में विषय नहीं चुनना चाहिए। उन्हें अपनी जिज्ञासा, रुचि और योग्यता के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। अपने लिए सही क्षेत्र चुनने के लिए अपनी क्षमता और पसंद को समझना जरूरी है।
राजेश धर्माणी ने शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में शिक्षकों की भूमिका और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने के अवसर भी उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों का मूल्यांकन निष्पक्षता और योग्यता के आधार पर होना चाहिए। प्रतिभा किसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं होती। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी क्षमता दिखाने के समान अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देना जरूरी है, जिनमें अलग-अलग पृष्ठभूमि के विद्यार्थी हिस्सा ले सकें।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों, प्रश्नोत्तरी और अन्य प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने नाट्य प्रस्तुतियों जैसी रचनात्मक गतिविधियों को भी उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से विज्ञान विषय न पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक भी विज्ञान की जानकारी आसानी से पहुंचाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि गणितीय ओलंपियाड, प्रश्नोत्तरी, मॉडल प्रदर्शनी और गतिविधि कॉर्नर जैसी पहलें विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी जानकारी, सोच और रचनात्मकता सामने रखने का अवसर मिलता है। बाल विज्ञान कांग्रेस जैसे मंचों पर विद्यार्थी अलग-अलग वैज्ञानिक विषयों को समझते हुए अपने मॉडल और विचार प्रस्तुत करते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर भी राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों को सलाह दी। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल सहायक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए। एआई से जानकारी हासिल करना और अपने काम को बेहतर बनाना उपयोगी है, लेकिन इसके साथ विषय की मूल अवधारणाओं को समझना भी जरूरी है।
उन्होंने चेताया कि केवल तकनीकी उपकरणों पर निर्भर रहने से स्वतंत्र चिंतन, स्मरण शक्ति और समस्या-समाधान की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनके मुताबिक, तकनीक का सही इस्तेमाल वही है, जो व्यक्ति के ज्ञान और क्षमताओं में बढ़ोतरी करे। विद्यार्थियों को एआई का इस्तेमाल अपनी समझ और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए, न कि अपनी मूल सोच और मेहनत के स्थान पर।
समारोह के मौके पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बाल विज्ञान कांग्रेस में अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया। उन्होंने इन विद्यार्थियों को आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शुभकामनाएं दीं। इससे पहले मंत्री ने विभिन्न स्कूलों के बच्चों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडलों का बारीकी से अवलोकन किया और बच्चों के साथ संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन कहां हुआ?
इसका आयोजन बिलासपुर के घुमारवीं क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दधोल में हुआ।
कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि कौन थे?
समापन समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी मुख्य अतिथि थे।
मंत्री ने विद्यार्थियों के वैज्ञानिक मॉडलों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मॉडलों में बच्चों की कल्पनाशीलता, अध्ययन, व्यावहारिक सोच और वैज्ञानिक समझ दिखाई देती है।
बाल विज्ञान कांग्रेस से विद्यार्थियों को क्या लाभ मिलता है?
इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित होती है।
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