हाथरस में 39 स्कूलों के नोडल शिक्षकों को संविधान पर ट्रेनिंग
हाथरस में विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के लिए 39 विद्यालयों के नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।
हाथरस में विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के लिए 39 विद्यालयों के नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की ओर से विधिक साक्षरता क्लबों के नोडल शिक्षकों के लिए द्वितीय चरण का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में विधिक साक्षरता क्लबों के जरिए विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना विकसित करना है।
28 अक्टूबर को जनपद न्यायालय, हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में 39 विद्यालयों के नोडल शिक्षक शामिल हुए। उन्हें संवैधानिक जागरूकता अभियान चलाने की प्रक्रिया, इसकी रूपरेखा और विद्यार्थियों तक संविधान से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया।
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों और जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के आदेशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव आकांक्षा गर्ग उपस्थित रहीं।
आकांक्षा गर्ग ने कहा कि विधिक साक्षरता क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना विकसित की जाएगी। इसका मकसद नई पीढ़ी को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक बनाना है। उन्होंने बताया कि इन क्लबों के जरिए कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को संविधान के मूल सिद्धांतों और विधिक साक्षरता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा, सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी-द्वितीय अरिजीत सिंह तथा सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी-प्रथम रोबिन कुमार ने शिक्षकों को संविधान से जुड़े कई विषयों की जानकारी दी। इसमें संविधान निर्माण, संविधान निर्माताओं का योगदान, संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, संवैधानिक उपचार, राज्य के नीति-निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य शामिल रहे।
प्रशिक्षकों ने बताया कि संविधान सभा ने दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के अथक परिश्रम के बाद देश को भारतीय संविधान सौंपा। शिक्षकों को संविधान के निर्माण की प्रक्रिया और उसके प्रमुख प्रावधानों की जानकारी विद्यार्थियों तक सरल तरीके से पहुंचाने के लिए भी समझाया गया।
प्रशिक्षण के दौरान संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत मिलने वाले संवैधानिक उपचारों के महत्व पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों को बताया गया कि विद्यार्थियों को यह जानकारी दी जानी चाहिए कि संवैधानिक अधिकारों की समझ उन्हें अपने अधिकारों और कानूनी रास्तों के बारे में जागरूक बनाती है।
नोडल शिक्षकों को यह भी बताया गया कि विद्यालयों में विधिक साक्षरता क्लबों के माध्यम से प्रश्नोत्तरी, संवाद और अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ा जा सकता है। क्लबों का इस्तेमाल केवल जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सवाल पूछने और विषयों को समझने का अवसर देने के लिए भी किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के द्वितीय सत्र में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋतुराज सिंह और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष गौतम ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शासन व्यवस्था के इन तीनों अंगों की जिम्मेदारियों को समझाया, ताकि शिक्षक विद्यार्थियों को इन विषयों की बुनियादी जानकारी दे सकें।
इस सत्र में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों पर भी चर्चा की गई। शिक्षकों को पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह निषेध कानून और बाल श्रम उन्मूलन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया। उन्हें विद्यार्थियों को इन कानूनों के प्रति जागरूक करने और बाल अधिकारों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण के तृतीय सत्र में मध्यस्थ अधिवक्ता रमेश चन्द्र वर्मा और संदीप वर्मा ने निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत और कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 39ए समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था से संबंधित है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि इसके अंतर्गत पात्र जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क वकील और अन्य आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि आर्थिक या अन्य कठिनाइयों के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। नोडल शिक्षकों से कहा गया कि वे इस जानकारी को विद्यार्थियों तक पहुंचाएं, ताकि विद्यार्थी जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता के उपलब्ध रास्तों के बारे में बता सकें।
लोक अदालत के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह सुलभ और त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां आपसी सहमति और समझौते के आधार पर पात्र मामलों का निस्तारण किया जाता है। इससे समय और धन की बचत होती है। नियमानुसार न्यायालय शुल्क की वापसी का लाभ भी मिल सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान नोडल शिक्षकों को राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी दी गई। शिक्षकों से अपील की गई कि वे 15100 और निःशुल्क कानूनी सहायता से जुड़ी जानकारी विद्यार्थियों के माध्यम से उनके परिवारों तथा समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाएं। इसका उद्देश्य यह है कि जरूरतमंद नागरिक विधिक सहायता का लाभ उठा सकें और उन्हें उपलब्ध कानूनी मदद के बारे में जानकारी मिल सके।
कार्यक्रम में आगामी 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली जनपद स्तरीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों को प्रतियोगिता के नियमों और रूपरेखा के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, कानूनी जागरूकता, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति कर्तव्यबोध को मजबूत करना है। प्राधिकरण का मानना है कि विधिक रूप से जागरूक विद्यार्थी ही भविष्य में एक सशक्त, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हाथरस में कितने स्कूलों के नोडल शिक्षकों को संविधान पर ट्रेनिंग दी गई?
हाथरस में 39 विद्यालयों के नोडल शिक्षकों को संविधान, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों पर ट्रेनिंग दी गई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कब और कहां आयोजित हुआ?
यह कार्यक्रम 28 अक्टूबर को जनपद न्यायालय, हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य विधिक साक्षरता क्लबों के जरिए विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना विकसित करना और उन्हें अपने अधिकारों, कर्तव्यों व कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक बनाना था।
किन कक्षाओं के विद्यार्थियों को संविधान और कानून की जानकारी दी जाएगी?
विधिक साक्षरता क्लबों के जरिए कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को संविधान के मूल सिद्धांतों और विधिक साक्षरता की जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण में संविधान से जुड़े किन विषयों पर चर्चा हुई?
प्रशिक्षण में संविधान निर्माण, संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, संवैधानिक उपचार, राज्य के नीति-निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्यों पर चर्चा हुई।
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