ग्वालियर जेल की थाली पर एआई से नजर, आठ करोड़ की योजना
ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंदियों को परोसे जाने वाले भोजन और जेल की दूसरी व्यवस्थाओं पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक से नजर रखने की तैयारी है।
ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंदियों को परोसे जाने वाले भोजन और जेल की दूसरी व्यवस्थाओं पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक से नजर रखने की तैयारी है। इसके लिए करीब 8 करोड़ रुपए की योजना प्रस्तावित है। योजना लागू होने के बाद जेल में होने वाली गतिविधियों, भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।
ग्वालियर सेंट्रल जेल के लिए तैयार की जा रही इस व्यवस्था का मुख्य फोकस बंदियों की थाली पर रहेगा। जेल में बंदियों के लिए जो भोजन तैयार होता है, उसकी गुणवत्ता, भोजन के वितरण और तय मानकों के पालन को तकनीक के जरिए मॉनिटर करने की योजना है। यानी रसोई से लेकर थाली तक भोजन व्यवस्था पर निगरानी रखने की तैयारी की जा रही है।
प्रस्तावित सिस्टम में AI आधारित तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मकसद भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और निगरानी को ज्यादा मजबूत बनाना है। अभी जेल की व्यवस्थाओं की निगरानी मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से होती है। नई तकनीक लागू होने के बाद यही निगरानी जेल मुख्यालय के स्तर से भी की जा सकेगी।
नई व्यवस्था लागू होने पर जेल मुख्यालय से ग्वालियर सेंट्रल जेल की व्यवस्थाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग हो सकेगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे जेल मुख्यालय को जरूरत के अनुसार ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी और व्यवस्थाओं पर सीधे नजर रखी जा सकेगी।
करीब 8 करोड़ का यह प्रोजेक्ट सिर्फ भोजन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्ताव के मुताबिक, जेल की अलग-अलग व्यवस्थाओं को भी तकनीक से जोड़कर उनकी निगरानी और रिकॉर्डिंग को ज्यादा व्यवस्थित करने की योजना है। भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ जेल की अन्य व्यवस्थाएं भी इस ऑनलाइन निगरानी के दायरे में लाई जा सकती हैं।
जेल में बंदियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है। इसी वजह से AI और आधुनिक डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से भोजन व्यवस्था की निगरानी, रिकॉर्ड और जवाबदेही को मजबूत करने की कवायद की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए यह देखा जा सकेगा कि भोजन तय मानकों के हिसाब से तैयार और वितरित हो रहा है या नहीं।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें ₹8 करोड़ की प्रस्तावित लागत बताई गई है। निगरानी के लिए AI आधारित सिस्टम का प्रस्ताव है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग जेल मुख्यालय से सीधे की जा सकेगी। योजना का फोकस भोजन की गुणवत्ता और जेल की अन्य व्यवस्थाओं पर रहेगा।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और व्यवस्था लागू होती है, तो ग्वालियर सेंट्रल जेल में भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी का तरीका पूरी तरह तकनीक आधारित हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर की निगरानी के साथ-साथ मुख्यालय स्तर से भी व्यवस्थाओं पर नजर रखने की व्यवस्था बन सकेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्वालियर सेंट्रल जेल में क्या नई योजना प्रस्तावित है?
ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंदियों के भोजन और दूसरी व्यवस्थाओं पर AI आधारित तकनीक से नजर रखने की योजना प्रस्तावित है।
इस योजना पर कितना खर्च होने का अनुमान है?
इस योजना की प्रस्तावित लागत करीब 8 करोड़ रुपए बताई गई है।
AI सिस्टम का मुख्य फोकस किस पर रहेगा?
इस सिस्टम का मुख्य फोकस बंदियों की थाली पर रहेगा, यानी भोजन की गुणवत्ता, वितरण और तय मानकों के पालन की निगरानी की जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने पर निगरानी कौन कर सकेगा?
नई व्यवस्था लागू होने पर ग्वालियर सेंट्रल जेल की ऑनलाइन मॉनिटरिंग जेल मुख्यालय से भी की जा सकेगी।
क्या यह योजना सिर्फ भोजन तक सीमित रहेगी?
नहीं, प्रस्ताव के मुताबिक भोजन के साथ जेल की दूसरी व्यवस्थाओं को भी डिजिटल निगरानी और रिकॉर्डिंग के दायरे में लाया जा सकता है।
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