गुजरात के 20 लोग रूस में फंसे, पासपोर्ट जब्त, खाने-रहने की परेशानी
गुजरात के आनंद और वडोदरा के 20 युवक-युवतियां रूस में फंसे हैं। उन्हें नौकरी के नाम पर भेजा गया था, लेकिन अब वेतन कम मिलने और खराब हालात का सामना करना पड़ रहा है। आरोपी एजेंट को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गुजरात के आनंद और वडोदरा के 20 युवक-युवतियां रूस में फंस गए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें 1 से 1.5 लाख रुपए महीने की नौकरी का लालच देकर रूस भेजा गया, लेकिन अब बहुत कम वेतन मिल रहा है। साथ ही रहने-खाने को मोहताज हो गए हैं। गुजरात पुलिस के मुताबिक, पेटलाद निवासी रिम्पल कुमार पटेल ने फिश पैकिंग और टेलरिंग की नौकरी दिलाने के नाम पर 33 लोगों को रूस भेजा। इसके बदले उनसे 2.10 लाख से 3 लाख रुपए तक लिए गए। कुल वसूली करीब 78 लाख रुपए बताई जा रही है। इससे पहले नवंबर 2025 में रूस भेजे गए 13 लोग कम सैलरी और खराब हालात के कारण भारत लौट आए थे। वहीं इसी साल अप्रैल में 20 अन्य लोगों को भेजा गया, जो अभी भी रूस में हैं। मामले की जांच आनंद एलसीबी कर रही है। आरोपी रिम्पल पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस रूस में फंसे लोगों से लगातार संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की कोशिश कर रही है।
रूस में फंसी वडोदरा की शीतल मेवाड़ा ने वीडियो जारी कर बताया कि उन्हें और अन्य लोगों को डेढ़ लाख रुपए महीने की सैलरी का भरोसा दिया गया था। रूस पहुंचने के बाद पहले महीने पूरा काम कराया गया, लेकिन महिलाओं को केवल 6 हजार और पुरुषों को 10 हजारुपए के आसपास दिया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि सामान्य सिलाई और फिश पैकिंग का काम होगा, लेकिन वहां पहुंचने के बाद अलग तरह का काम कराया जाने लगा और वेतन में कटौती की गई।
पीड़ितों ने बताया कि जिस कंपनी के साथ उनका कॉन्ट्रेक्ट हुआ, उसने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए थे। जब उन्होंने भारत लौटने की इच्छा जताई तो कंपनी ने हर व्यक्ति से 500 डॉलर जमा कराने और हवाई टिकट का खर्च खुद उठाने को कहा। उनका आरोप है कि उन्हें कमरे में बंद रखा जाता है, बाहर निकलने पर रोक लगाई जाती है और भोजन-पानी भी उपलब्ध नहीं कराया जाता। कई लोग कर्ज लेकर रूस पहुंचे थे, इसलिए अतिरिक्त खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है।
नवंबर 2025 में रूसे लौटे लोगों ने बताया कि कई लोगों को एक ही हॉल में रखा गया, खराब क्वॉलिटी का खाना मिलता था। बीमार होने पर इलाज भी नहीं मिला। भारत लौटने की मांग करने पर उनसे भारी रकम मांगी गई।
रूस में फंसे लोगों के परिजन ने आनंद के सांसद मितेश पटेल को पत्र लिखकर मदद मांगी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। सांसद ने बताया कि प्रशासन रूस में फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रहा है। कुछ लोगों के पासपोर्ट वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
आनंद जिले के डीएसपी जेएन पंचाल ने बताया कि 5 जून को शिकायत दर्ज की गई। आरोपी रिम्पल कुमार पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें आरोप है कि रूस भेजे गए लोगों को तय सैलरी नहीं मिली और उन्हें वापस लाने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किया गया। जांच में सामने आया है कि लोगों को दो साल के अनुबंध पर रूस भेजा गया था और उन्हें एक लाख रुपए तक मासिक वेतन का भरोसा दिया गया था। एलसीबी की टीम रूस में मौजूद सभी 20 लोगों से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में है। गुजरात पुलिस, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि रूस में फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी की कोशिश में जुटे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि नौकरी के नाम पर लोगों को विदेश भेजने के इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुजरात के लोग रूस में क्यों फंसे हैं?
गुजरात के लोग रूस में नौकरी के लालच में गए थे, लेकिन उन्हें कम वेतन और खाने-रहने की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रूस में फंसे लोगों ने कितनी रकम खर्च की थी?
रूस में फंसे लोगों ने 2.10 लाख से 3 लाख रुपए तक की रकम खर्च की थी।
क्या रूस में फंसे लोगों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे?
हाँ, रूस में फंसे लोगों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे।
गुजरात पुलिस इस मामले में क्या कर रही है?
गुजरात पुलिस मामले की जांच कर रही है और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित भारत वापस लाने की कोशिश कर रही है।
रूस में फंसे लोगों की मदद के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
आनंद के सांसद मितेश पटेल ने प्रशासन को पत्र लिखकर मदद की मांग की है, और कुछ लोगों के पासपोर्ट वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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